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High Court : एटा के बीएसए पर आरोप तय, कोर्ट ने कहा-कारण बताएं कि मुकदमा चलाकर उन्हें क्यों न दंडित किया जाए

Wed, 09 Jul 2025 06:58 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 09 Jul 2025 06:58 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एटा के बीएसए (बेसिक शिक्षा अधिकारी) दिनेश कुमार पर अवमानना मामले में आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि तीन सप्ताह के भीतर कारण बताएं कि जानबूझकर न्यायालय के तीन नवंबर 2017 के आदेश का उल्लंघन करने के लिए उन पर अवमानना के तहत मुकदमा क्यों न चलाया जाए और दंडित क्यों न किया जाए।

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Charges framed against Etah's BSA, court said- give reasons why he should not be punished by filing a case
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एटा के बीएसए (बेसिक शिक्षा अधिकारी) दिनेश कुमार पर अवमानना मामले में आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि तीन सप्ताह के भीतर कारण बताएं कि जानबूझकर न्यायालय के तीन नवंबर 2017 के आदेश का उल्लंघन करने के लिए उन पर अवमानना के तहत मुकदमा क्यों न चलाया जाए और दंडित क्यों न किया जाए। साथ ही उन्हें 29 जुलाई को कोर्ट में उपस्थित रहने का आदेश दिया है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी ने रमेश चंद्र पचौरी की अवमानना अर्जी पर दिया है। एटा के याची रमेश चंद्र पचौरी 30 जून 1980 को उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद में जूनियर क्लर्क के पद पर नियुक्त हुए थे। वहीं, 31 दिसंबर 2016 को सेवानिवृत्त हो गए। ब्याज सहित अवकाश नकदीकरण की मांग को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। कोर्ट ने तीन नवंबर 2027 के आदेश से याचिका स्वीकार कर ली। इसके बाद भी उन्हें अवकाश नकदीकरण का लाभ नहीं दिया गया। इस पर उन्होंने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की।

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कोर्ट ने 13 मई 2025 को एटा के बीएसए को रमेश के अवकाश नकदीकरण राशि को दो माह में भुगतान करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि आठ जुलाई को बीएसए अनुपालन हलफनामा दाखिल करेंगे या हाजिर होकर भुगतान न किए जाने का कारण बताएंगे। मंगलवार को बीएसए कोर्ट में हाजिर हुए और हलफनामा दाखिल किया। कोर्ट को बताया गया कि आदेश के अनुपालन के लिए शिक्षा निदेशक बेसिक उत्तर प्रदेश से 30 जून को पत्र के माध्यम से निर्देश मांगा गया है।

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इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए बीएसए की उपस्थिति में आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने पर आरोप तय किए। साथ ही तीन सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है। रजिस्ट्रार अनुपालन को आदेश की कॉपी 24 घंटे में बीएसए को इलेक्ट्रॉनिक मोड में भेजने का निर्देश दिया है।

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