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9.46 करोड़ के गबन में आरोपी अफसर समेत छह के खिलाफ चार्जशीट

Mon, 06 Jul 2020 01:30 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 06 Jul 2020 01:30 AM IST
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Charge sheet against six including accused officer in embezzlement of 9.46 crore
Kotak Mahindra Bank. - फोटो : prayagraj
सिविल लाइंस स्थित कोटक महिंद्रा बैंक में 9.46 करोड़ रुपये के गबन मामले में जेल में बंद छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। इनमें मुख्य आरोपी कोटक महिंद्रा बैंक का पूर्व अफसर अंशुमान दुबे भी शामिल है। 
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कोटक महिंद्रा बैंक में पांच अप्रैल को 9.46 करोड़ के गबन का मामला सामने आया था, जिसकी रिपोर्ट सिविल लाइंस थाने में दर्ज कराई गई थी। मैनेजर की ओर से बैंक में एसडीओ के पद पर तैनात अंशुमान दुबे को नामजद कराया गया था। 11 अप्रैल को अंशुमान समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 1.2 करोड़ नगद व 70 लाख के गहने समेत अन्य सामान बरामद किया गया था।
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इनमें पूर्व ब्लॉक प्रमुख का बेटा पिंकू उर्फ अवेधश तिवारी व भदोही में तैनात बैंक मैनेजर मातंबर पांडेय के अलावा प्रॉपर्टी डीलिंग करने वाला कमलराज सचदेवा शामिल हैं। बाद में नाम प्रकाश में आने पर पुलिस ने अल्लापुर निवासी अजय वर्मा व प्रवीण कुमार दुबे को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा। विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने सभी छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक, साक्ष्यों से साफ है कि आरोपी अंशुमान ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रुपयों का गबन किया और अन्य आरोपियों ने गबन के रुपयों को ठिकाने लगाने में उसकी मदद की। मामले में पुलिस का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में प्रेषित कर दिया गया है। 

बैंक व कैशवैन कंपनीकर्मी भी संदेह के घेरे में

पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजे गए छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है लेकिन अभी कई अन्य लोग भी संदेह के घेरे में हैं। दरअसल मुख्य आरोपी अंशुमान ने कोटक महिंद्रा बैंक से बैंक ऑफ बड़ौदा के चेस्ट में भेजे जाने के दौरान रकम मेें हेरफेर किया। हालांकि जांच में यह भी सामने आया है कि चेस्ट में रकम भेजे जाने के दौरान बैंक व कैशवैन कंपनी के कई अन्य कर्मचारियों की भी जिम्मेदारी होती है। ऐसे में पता लगाया जा रहा है कि लंबे समय से चल रही हेराफेरी की आखिर इन कर्मचारियों को भनक कैसे नहीं लगी ।
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