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चंद्रशेखर आजाद पार्क में छह गेट रखने का है आदेश
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 07 Apr 2016 02:12 AM IST
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आजाद पार्क
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद संग्रहालय के जिस गेट को बंद करने को लेकर वहां के कर्मचारी और एडीए आमने-सामने हैं, दरअसल वह गेट अधिकतम 20 वर्ष पूर्व बना है। यह दावा है एडीए का। दूसरे, हाईकोर्ट ने चंद्रशेखर आजाद पार्क में पहले से बने छह गेटों को ही चालू रखने का आदेश दिया है। एडीए ने उन्हीं गेटों का नए सिरे से निर्माण भी कराया है। इस बीच संग्रहालय के सामने का गेट बंद करने को लेकर मंगलवार को शुरू हुआ बवाल बुधवार को भी जारी रहा। बुधवार को भी इसे लेकर हंगामा हुआ।
एडीए ने बुधवार को सुबह संग्रहालय के गेट के स्थान पर दीवार का निर्माण शुरू कराया। करीब दस बजे कर्मचारी संग्रहालय पहुंचे। इसके बाद दिन में करीब 12 बजे संग्रहालय की ओर से काम बंद करने और गेट बंद करने के संबंध में आदेश की प्रति दिखाने को कहा गया लेकिन आदेश नहीं दिखाया गया। इसे लेकर संग्रहालय कर्मियों की एडीए अभियंताओं से बहस हुई। हंगामे की सूचना पर वहां कई थानों की पुलिस भी पहुंच गई।
सूचना मिलने पर सांसद केशव प्रसाद मौर्या भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने आते ही काम बंद कराने और दो दिन इंतजार करने को कहा। एडीए अभियंताओं को दो दिन काम बंद रखने को कहा। उन्होंने भी अभियंताओं से गेट बंद करने का आदेश मांगा लेकिन अभियंताओं ने यह कह कर किनारा कर लिया कि आदेश सक्षम अधिकारियों के पास है। सांसद के जाने के बाद दीवार का निर्माण फिर शुरू हो गया। अभियंताओं ने साफ किया कि काम हाईकोर्ट के आदेश पर हो रहा है। राज्यपाल की ओर से किसी तरह का आदेश होता है तो उसका पालन किया जाएगा।
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एडीए के एक्सईएन आरडी राय का कहना है कि चंद्रशेखर आजाद पार्क में आजादी के पहले के छह गेट हैं। इसमें सेंट जोसेफ कॉलेज के सामने, सेंट्रल लाइब्रेरी, आजाद प्रतिमा के सामने, इंडियन प्रेस चौराहा, पन्ना लाल रोड पर दरभंगा कॉलोनी के सामने और डॉ. बंसल के सामने का गेट शामिल है। यह सभी गेट सुरखी, चूना और पत्थर से बने थे, जबकि संग्रहालय के सामने का गेट ईंट से बना था। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट ने पूर्व के छह गेटों को ही चालू रखने के आदेश दिए हैं। इस वजह से संग्रहालय के सामने का सातवां गेट हटाकर दीवार बनाई जा रही है। उधर, संग्रहालय के निदेशक गौरव कृष्ण बंसल ने कहा कि वह हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं। अगर गेट बंद करने का आदेश है तो उसकी प्रति दिखाई जाए और हमें भी अपनी बात रखने का मौका मिले।
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एडीए ने बुधवार को सुबह संग्रहालय के गेट के स्थान पर दीवार का निर्माण शुरू कराया। करीब दस बजे कर्मचारी संग्रहालय पहुंचे। इसके बाद दिन में करीब 12 बजे संग्रहालय की ओर से काम बंद करने और गेट बंद करने के संबंध में आदेश की प्रति दिखाने को कहा गया लेकिन आदेश नहीं दिखाया गया। इसे लेकर संग्रहालय कर्मियों की एडीए अभियंताओं से बहस हुई। हंगामे की सूचना पर वहां कई थानों की पुलिस भी पहुंच गई।
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सूचना मिलने पर सांसद केशव प्रसाद मौर्या भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने आते ही काम बंद कराने और दो दिन इंतजार करने को कहा। एडीए अभियंताओं को दो दिन काम बंद रखने को कहा। उन्होंने भी अभियंताओं से गेट बंद करने का आदेश मांगा लेकिन अभियंताओं ने यह कह कर किनारा कर लिया कि आदेश सक्षम अधिकारियों के पास है। सांसद के जाने के बाद दीवार का निर्माण फिर शुरू हो गया। अभियंताओं ने साफ किया कि काम हाईकोर्ट के आदेश पर हो रहा है। राज्यपाल की ओर से किसी तरह का आदेश होता है तो उसका पालन किया जाएगा।
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एडीए के एक्सईएन आरडी राय का कहना है कि चंद्रशेखर आजाद पार्क में आजादी के पहले के छह गेट हैं। इसमें सेंट जोसेफ कॉलेज के सामने, सेंट्रल लाइब्रेरी, आजाद प्रतिमा के सामने, इंडियन प्रेस चौराहा, पन्ना लाल रोड पर दरभंगा कॉलोनी के सामने और डॉ. बंसल के सामने का गेट शामिल है। यह सभी गेट सुरखी, चूना और पत्थर से बने थे, जबकि संग्रहालय के सामने का गेट ईंट से बना था। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट ने पूर्व के छह गेटों को ही चालू रखने के आदेश दिए हैं। इस वजह से संग्रहालय के सामने का सातवां गेट हटाकर दीवार बनाई जा रही है। उधर, संग्रहालय के निदेशक गौरव कृष्ण बंसल ने कहा कि वह हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं। अगर गेट बंद करने का आदेश है तो उसकी प्रति दिखाई जाए और हमें भी अपनी बात रखने का मौका मिले।