{"_id":"5809145a4f1c1bf36e70459e","slug":"chance-in-online-shopping-company-in-this-october","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों को अक्तूबर तक की मोहलत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों को अक्तूबर तक की मोहलत
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद।
Updated Fri, 21 Oct 2016 12:55 AM IST
विज्ञापन
ऑनलाइन शॉपिंग
- फोटो : डेमो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद। वाणिज्य कर विभाग ने ऑनलाइन शॉपिंग एवं कोरियर सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों को सर्विस प्रोवाइडर नंबर (एसपीएन) लेने के लिए अक्तूबर तक की मोहलत दी है। टैक्स न देने वाली ई-कॉमर्स कंपनियों के कोरियर सेवा प्रदाता, ट्रांसपोर्टरों तथा गोदामों में माल रखने वालों को एसपीएन के दायरे में लाया जाना है। विभाग ने इसकी प्रक्रिया भी काफी सरल कर दी है, लेकिन कंपनियां एसपीएन में रुचि नहीं ले रही हैं। ऐसे में मुख्यालय ने अभियान चलाकर 31 अक्तूबर तक रजिस्ट्रेशन करने तथा त्योहार के मद्देनजर सघन जांच कराने का फरमान जारी किया है।
पूरे देश में ऑनलाइन शॉपिंग का कारोबार तेजी से बढ़ा है। उत्तर प्रदेश भी इससे अछूता नहीं है। इसमें बड़ी-बड़ी कंपनियां लगी हुई हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में यह कंपनियां बिना टैक्स चुकाए माल की डिलेवरी कर रही हैं। इससे राजस्व में करोड़ों रुपये की चपत लग रही है। ऐसे में प्रदेश सरकार ने इन कंपनियों को टैक्स के दायरे में लाने का फैसला लिया। ऑनलाइन शॉपिंग, कोरियर सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों के साथ कोरियर सेवा प्रदाता कंपनियों के गोदाम एवं ट्रांसपोर्टरों को भी एसपीएन के तहत रजिस्ट्रेशन का फरमान जारी किया गया। मुख्यालय से मई से अक्तूबर के बीच में चार बार आदेश जारी किया गया, लेकिन विभाग के अफसरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। नतीजा हुआ कि ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों ने भी रजिस्ट्रेशन में रुचि नहीं ली।
इसके बाद वाणिज्य कर कमिश्नर मुकेश कुमार मेश्राम ने पिछले सप्ताह नया आदेश जारी किया है। इसमें ऑनलाइन शॉपिंग, कोरियर सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों को एसपीएन के दायरे में लाते हुए इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने, एसपीएन के लिए आने वाले आवेदनों का तत्काल निस्तारण करने को कहा है। कमिश्नर ने कहा है कि प्रवेश कर की देयता से बचने के लिए ई-शॉपिंग कंपनियां दिवाली के अवसर पर एसपीएन न लेकर अत्यधिक मात्रा में कर योग्य वस्तुओं के परिवहन, भंडारण का कार्य कर रही हैं। ऐसी कंपनियों और ट्रांसपोर्टरों को एसपीएन की सरल प्रक्रिया से अवगत कराते हुए अभियान चलाकर 31 अक्तूबर तक ज्यादा से ज्यादा रजिस्ट्रेशन कराए जाएं। उन्होंने सचल दल इकाइयों को भी इनके खिलाफ सख्ती से कार्रवाई का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पूरे देश में ऑनलाइन शॉपिंग का कारोबार तेजी से बढ़ा है। उत्तर प्रदेश भी इससे अछूता नहीं है। इसमें बड़ी-बड़ी कंपनियां लगी हुई हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में यह कंपनियां बिना टैक्स चुकाए माल की डिलेवरी कर रही हैं। इससे राजस्व में करोड़ों रुपये की चपत लग रही है। ऐसे में प्रदेश सरकार ने इन कंपनियों को टैक्स के दायरे में लाने का फैसला लिया। ऑनलाइन शॉपिंग, कोरियर सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों के साथ कोरियर सेवा प्रदाता कंपनियों के गोदाम एवं ट्रांसपोर्टरों को भी एसपीएन के तहत रजिस्ट्रेशन का फरमान जारी किया गया। मुख्यालय से मई से अक्तूबर के बीच में चार बार आदेश जारी किया गया, लेकिन विभाग के अफसरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। नतीजा हुआ कि ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों ने भी रजिस्ट्रेशन में रुचि नहीं ली।
विज्ञापन
इसके बाद वाणिज्य कर कमिश्नर मुकेश कुमार मेश्राम ने पिछले सप्ताह नया आदेश जारी किया है। इसमें ऑनलाइन शॉपिंग, कोरियर सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों को एसपीएन के दायरे में लाते हुए इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने, एसपीएन के लिए आने वाले आवेदनों का तत्काल निस्तारण करने को कहा है। कमिश्नर ने कहा है कि प्रवेश कर की देयता से बचने के लिए ई-शॉपिंग कंपनियां दिवाली के अवसर पर एसपीएन न लेकर अत्यधिक मात्रा में कर योग्य वस्तुओं के परिवहन, भंडारण का कार्य कर रही हैं। ऐसी कंपनियों और ट्रांसपोर्टरों को एसपीएन की सरल प्रक्रिया से अवगत कराते हुए अभियान चलाकर 31 अक्तूबर तक ज्यादा से ज्यादा रजिस्ट्रेशन कराए जाएं। उन्होंने सचल दल इकाइयों को भी इनके खिलाफ सख्ती से कार्रवाई का निर्देश दिया है।
विज्ञापन