चैत्र नवरात्रि : कालरात्रि स्वरूप का दर्शन कर निहाल हुए भक्त, अलोपशंकरी, कल्याणी और ललिता देवी में उमड़ी भीड़
माता कालरात्रि को ही महायोगीश्वरी, महायोगिनी और शुभंकरी कहा गया है। मां कालरात्रि की विधिवत पूजा अर्चना करने से माता अपने भक्तों को काल से बचाती हैं अर्थात माता के भक्त को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। माता कालरात्रि से ही सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं। शहर के तीनों शक्तिपीठ ललिता देवी, कल्याणी देवी और अलोपशंकरी देवी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ दिखी।
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चैत्र नवरात्रि की सप्तमी पर घरों और मंदिरों में आदिशक्ति मां जगदंबा के सप्तम स्वरूप महाकालरात्रि का विधि विधान से पूजन किया गया। घरों में स्थापित कलश पर गुड़हल का पुष्प अर्पित कर अक्षत, रोली, हल्दी, मौली सहित सौंदर्य प्रसाधान के सामान अर्पित किए गए। शहर के तीनों शक्तिपीठ ललिता देवी, कल्याणी देवी और अलोप शंकरी में भक्तों की भारी भीड़ दिखी।
मान्यता है कि माता कालरात्रि को ही महायोगीश्वरी, महायोगिनी और शुभंकरी कहा गया है। मां कालरात्रि की विधिवत पूजा अर्चना करने से माता अपने भक्तों को काल से बचाती हैं अर्थात माता के भक्त को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। माता कालरात्रि से ही सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं। इसलिए तंत्र मंत्र के साधक मां कालरात्रि के विशेष रूप से पूजा अर्चना करते हैं। इसे महानिशा पूजन भी किया जाता है। योगी और साधक महानिशा पूजा करके सिद्धियां प्राप्त करते हैं।
मां कालरात्रि की विधिवत पूजा अर्चना करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है और भूत प्रेत सहित सभी तरह की नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और शत्रुओं व दुष्टों का संहार कर सभी दुख दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति का वास होता है। माता की पूजा रात्रि के समय विशेष होती है।
देवी मंदिरों में लगी भक्तों की लंबी कतार
वासंतिक नवरात्रि के सातवें दिन पर सोमवार को देवी मंदिरों में देवी के सप्तम स्वरूप मां कालरात्रि के स्वरूप की आराधना की गई। मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देवी के दर्शन के लिए लगी रहीं। अलोपीबाग में अलोपशंकरी देवी, अतरसुइया में शक्तिपीठ कल्याणी देवी और मीरापुर में सिद्धपीठ ललिता देवी के दरबारों में दिन भर तिल रखने की जगह नहीं रही।
तीनों शक्तिपीठों में सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। देवी के शृंगार दर्शन के लिए पहुंचे भक्त नारियल, चुनरी अर्पित कर मां के दरबार में अपनी अर्जी लगा रहे थे। ललिता देवी मंदिर के पुजारी शिवमूरत मिश्रा के मुताबिक सहज दर्शन के लिए जरूरी इंतजाम किए गए हैं। भोर में चार बजे मंगला आरती के बाद दर्शन के लिए कपाट खोल दिए गए। 11 वैदिक ब्राहमण प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ कर रहे हैं।
इसी तरह कल्याणी देवी मंदिर में सुबह मंगला आरती के साथ पांच वैदिक ब्राह्मणों ने शंखध्वनि से मां को पुकार लगाई। इसके बाद दर्शन के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए। यहां 11 वैदिक ब्राह्मण लोक कल्याण की कामना से प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ कर रहे हैं। शतचंडी महायज्ञ भी प्रतिदिन हो रहा है।