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Prayagraj News: कम उम्र में ही युवाओं को जकड़ रहा सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस
Mon, 27 Jul 2026 01:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Mon, 27 Jul 2026 01:44 AM IST
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लगातार सिर झुकाकर मोबाइल देखने और गलत शारीरिक मुद्रा में बैठने से युवाओं में टेक्स्ट नेक सिंड्रोम यानी सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इससे गर्दन की मांसपेशियों पर 20 से 25 किलो तक का अतिरिक्त दबाव पड़ता है जिससे कम उम्र में ही जोड़ों और हड्डियों को नुकसान पहुंच रहा है।
चिकित्सकों का कहना है कि गर्दन में सात हड्डियां होती हैं। इनके बीच से दिमाग से स्पाइनल कार्ड नामक नस निकलती है। यह नस ही शरीर को नियंत्रित करती है। गर्दन से स्पाइनल कार्ड की कई शाखाएं निकलकर दोनों हाथों में जाती हैं। गर्दन में झुकाव और टेढ़ी होने से मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है।
धीरे-धीरे गर्दन की हड्डियों में बदलाव होने से यह शाखाएं दबने लगती हैं। इससे जहां तक नसें जाती हैं, वहां समस्याएं होने लगती है। बाइक का अधिक प्रयोग, मोबाइल पर घंटों सिर झुकाकर बैठना, लैपटॉप चलाते समय सिर लगातार नीचे रखना इस बीमारी का प्रमुख कारण है।
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इससे गर्दन में पीछे हड्डी में दर्द होना, शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द होने के साथ ही सुन्नपन की समस्या होने लगती है। एसआरएन अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में रोजाना करीब 10 मरीज सर्वाइक के देखने को मिलते हैं। इनमें दो से तीन मरीज 25 से 40 वर्ष के बीच होते हैं।
पांच से छह घंटे मोबाइल पर बिताना
सिविल लाइंस निवासी प्रियंका सिंह (29) को चार माह से चक्कर आना, जी मतलाना व गर्दन में दर्द की शिकायत थी। काउंसलिंग के दौरान उन्होंने बताया कि वह रोजाना पांच से छह घंटे मोबाइल पर समय देती हैं।
लकड़ी के कुर्सी पर बैठने की सलाह राजरूपपुर निवासी स्तुति मिश्रा (25) को गर्दन व पीठ में दर्द की शिकायत थी। इसकी वजह से उनका पढ़ने में मन नहीं लग रहा था। जांच में सर्वाइकल की पुष्टि हुई। इसके बाद डॉक्टर ने उन्हें लकड़ी की कुर्सी पर बैठने की सलाह दी।
युवाओं में क्यों बढ़ रहा खतरा
1. घंटों मोबाइल फोन पर सोशल मीडिया चलाना या रील्स देखना (इसे मोबाइल नेक भी कहते हैं)।
2. ऑफिस या घर में कंप्यूटर व लैपटॉप पर काम करते समय लंबे समय तक गलत तरीके से झुककर बैठना।
3. व्यायाम या योग न करने से गर्दन और कंधों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।
4. सोते समय गलत या बहुत मोटा तकिया इस्तेमाल करना और पोषण (विटामिन डी व कैल्शियम) की कमी होना।
यह होता है सर्वाइकल और स्पॉन्डिलाइटिस सर्वाइकल और स्पॉन्डिलाइटिस (या स्पोंडिलोसिस) रीढ़ की हड्डी के गर्दन वाले हिस्से में होने वाली घिसाव, सूजन और दर्द की समस्याएं हैं, जो गलत पॉश्चर, उम्र बढ़ने या हड्डियों के आपस में रगड़ने से होती हैं।
यह है सही पोस्चर
1. दोनों पैरों के बीच थोड़ा अंतर रखें और वजन दोनों पैरों पर बराबर डालें।
2. छाती को थोड़ा आगे (ऊपर) रखें और कंधों को पीछे की ओर ढीला छोड़ें।
3. सिर को सीधा और कंधों के ठीक ऊपर रखें।
4. कुर्सी पर बैठते समय पीठ को सीधा रखें और कुर्सी के निचले हिस्से का सहारा लें।
5. दोनों पैर फर्श पर पूरी तरह सपाट होने चाहिए और घुटने 90 डिग्री के कोण पर मुड़े होने चाहिए।
6. कंप्यूटर या फोन का उपयोग करते समय स्क्रीन आंखों के स्तर पर होनी चाहिए ताकि गर्दन झुकानी न पड़े।
सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। सही समय पर पहचाना जाए तो इसे घरेलू उपायों और जीवनशैली में बदलाव के जरिये पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है। - डॉ. कमलेश सोनकर, विभागाध्यक्ष, न्यूरोलॉजी विभाग, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज।
योग, संतुलित आहार और सही पॉश्चर अपनाकर आप इस समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा पा सकते हैं। नियमितता ही सबसे बड़ा इलाज है। - डॉ. वैशाली सिंह, प्रमुख अधीक्षक, छावनी सामान्य अस्पताल
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चिकित्सकों का कहना है कि गर्दन में सात हड्डियां होती हैं। इनके बीच से दिमाग से स्पाइनल कार्ड नामक नस निकलती है। यह नस ही शरीर को नियंत्रित करती है। गर्दन से स्पाइनल कार्ड की कई शाखाएं निकलकर दोनों हाथों में जाती हैं। गर्दन में झुकाव और टेढ़ी होने से मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है।
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धीरे-धीरे गर्दन की हड्डियों में बदलाव होने से यह शाखाएं दबने लगती हैं। इससे जहां तक नसें जाती हैं, वहां समस्याएं होने लगती है। बाइक का अधिक प्रयोग, मोबाइल पर घंटों सिर झुकाकर बैठना, लैपटॉप चलाते समय सिर लगातार नीचे रखना इस बीमारी का प्रमुख कारण है।
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इससे गर्दन में पीछे हड्डी में दर्द होना, शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द होने के साथ ही सुन्नपन की समस्या होने लगती है। एसआरएन अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में रोजाना करीब 10 मरीज सर्वाइक के देखने को मिलते हैं। इनमें दो से तीन मरीज 25 से 40 वर्ष के बीच होते हैं।
पांच से छह घंटे मोबाइल पर बिताना
सिविल लाइंस निवासी प्रियंका सिंह (29) को चार माह से चक्कर आना, जी मतलाना व गर्दन में दर्द की शिकायत थी। काउंसलिंग के दौरान उन्होंने बताया कि वह रोजाना पांच से छह घंटे मोबाइल पर समय देती हैं।
लकड़ी के कुर्सी पर बैठने की सलाह राजरूपपुर निवासी स्तुति मिश्रा (25) को गर्दन व पीठ में दर्द की शिकायत थी। इसकी वजह से उनका पढ़ने में मन नहीं लग रहा था। जांच में सर्वाइकल की पुष्टि हुई। इसके बाद डॉक्टर ने उन्हें लकड़ी की कुर्सी पर बैठने की सलाह दी।
युवाओं में क्यों बढ़ रहा खतरा
1. घंटों मोबाइल फोन पर सोशल मीडिया चलाना या रील्स देखना (इसे मोबाइल नेक भी कहते हैं)।
2. ऑफिस या घर में कंप्यूटर व लैपटॉप पर काम करते समय लंबे समय तक गलत तरीके से झुककर बैठना।
3. व्यायाम या योग न करने से गर्दन और कंधों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।
4. सोते समय गलत या बहुत मोटा तकिया इस्तेमाल करना और पोषण (विटामिन डी व कैल्शियम) की कमी होना।
यह होता है सर्वाइकल और स्पॉन्डिलाइटिस सर्वाइकल और स्पॉन्डिलाइटिस (या स्पोंडिलोसिस) रीढ़ की हड्डी के गर्दन वाले हिस्से में होने वाली घिसाव, सूजन और दर्द की समस्याएं हैं, जो गलत पॉश्चर, उम्र बढ़ने या हड्डियों के आपस में रगड़ने से होती हैं।
यह है सही पोस्चर
1. दोनों पैरों के बीच थोड़ा अंतर रखें और वजन दोनों पैरों पर बराबर डालें।
2. छाती को थोड़ा आगे (ऊपर) रखें और कंधों को पीछे की ओर ढीला छोड़ें।
3. सिर को सीधा और कंधों के ठीक ऊपर रखें।
4. कुर्सी पर बैठते समय पीठ को सीधा रखें और कुर्सी के निचले हिस्से का सहारा लें।
5. दोनों पैर फर्श पर पूरी तरह सपाट होने चाहिए और घुटने 90 डिग्री के कोण पर मुड़े होने चाहिए।
6. कंप्यूटर या फोन का उपयोग करते समय स्क्रीन आंखों के स्तर पर होनी चाहिए ताकि गर्दन झुकानी न पड़े।
सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। सही समय पर पहचाना जाए तो इसे घरेलू उपायों और जीवनशैली में बदलाव के जरिये पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है। - डॉ. कमलेश सोनकर, विभागाध्यक्ष, न्यूरोलॉजी विभाग, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज।
योग, संतुलित आहार और सही पॉश्चर अपनाकर आप इस समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा पा सकते हैं। नियमितता ही सबसे बड़ा इलाज है। - डॉ. वैशाली सिंह, प्रमुख अधीक्षक, छावनी सामान्य अस्पताल