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नकल के लिए केंद्र व्यवस्थापक, शिक्षक होंगे जिम्मेदार

Fri, 02 Jun 2017 01:56 AM IST
विजय सक्सेना, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विजय सक्सेना, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Fri, 02 Jun 2017 01:56 AM IST
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Center admin for copying, teachers will be responsible
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भाजपा सरकार ने यूपी बोर्ड की परीक्षा को नकलविहीन बनाने की तैयारी शुरू कर हो गई। सरकार ने वर्ष 2018 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा के पहले नकल विरोधी अध्यादेश लागू करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। नकल विरोधी अध्यादेश के लिए यूपी बोर्ड एक्ट में संशोधन करने जा रहा है। इसमें केंद्र व्यवस्थापकों एवं शिक्षकों को नकल का जिम्मेदार मानते हुए सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया जा रहा है। शिक्षा निदेशक ने इस संबंध में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक को अवगत भी करा दिया है। शिक्षा निदेशक के निर्देश पर बोर्ड के अधिकारी नकल विरोधी अध्यादेश में संशोधन पर काम कर रहे हैं।
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यूपी बोर्ड की परीक्षा में नकल रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ तथा उप मुख्यमंत्री एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री दिनेश शर्मा के निर्देश के बाद यह तैयारी शुरू हुई है। इसी के बाद शिक्षा निदेशक अमर नाथ वर्मा ने यूपी बोर्ड के अफसरों को नकल विरोधी अध्यादेश फिर से लाने के लिए तैयारी तेजी से पूरी करने को कहा है।
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वर्ष 2018 की यूपी बोर्ड की परीक्षा में लागू होने वाला नकल विरोधी अध्यादेश पूर्व की तरह नहीं होगा। नए सिरे से लागू होने वाले इस अध्यादेश में विद्यार्थियों की गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं होगा, बल्कि नकल कराने वाले केंद्र व्यवस्थापकों, शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई के प्रावधान का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। शिक्षा निदेशक ने नकल विरोधी अध्यादेश में किए जा रहे संशोधन की कार्रवाई से पिछले दिनों अपर मुख्य सचिव को भी अवगत करा दिया है। हालांकि बोर्ड के अफसर इस बारे में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
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वर्ष 1992 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और शिक्षा मंत्री राजनाथ सिंह नकल विरोधी अध्यादेश लाए थे। इसके तहत परीक्षा में नकल को गैर जमानती आपराध की श्रेणी में डाल गया था। परीक्षा में नकल करते बड़ी संख्या में पकड़े गए विद्यार्थियों को जेल भी जाना पड़ा था। इस कानून के तहत मात्र एक वर्ष ही यूपी बोर्ड की परीक्षाएं हो सकीं। उस दौरान सफल होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या महज 14 प्रतिशत थी।


इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार हुई और सपा एवं बसपा के गठबंधन से सरकार बनी। मुख्यमंत्री बनते ही मुलायम सिंह यादव ने इस कानून को निरस्त कर दिया। 1998 के चुनाव में भाजपा और बसपा के गठबंधन में सरकार गठित हुई और मुख्यमंत्री बनने पर राजनाथ सिंह ने नकल विरोधी अध्यादेश फिर से लागू किया लेकिन अध्यादेश के प्रावधानों को कुछ हद तक नरम कर दिया गया।
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