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सीबीएसई के छात्र दसवीं, बारहवीं में पढ़ेंगे क्षेत्रीय भाषा
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने दसवीं और बारहवीं के छात्रों के लिए तीसरी भाषा के तौर पर अब एक क्षेत्रीय भाषा को शामिल करने का फैसला किया है। छात्र चाहें तो छठे विषय के तौर पर क्षेत्रीय भाषा का चुनाव कर सकते हैं। बोर्ड का कहना है कि अगर कोई छात्र दो अनिवार्य भाषा विषय अर्थात हिंदी या अंग्रेजी में फेल हो जाता है और तीसरी भाषा में पास होता है तो वह भाषा से फेल वाले अनिवार्य भाषा को रिप्लेस भी कर सकते है।
बोर्ड की मानें तो क्षेत्रीय भाषा का विकल्प भले ही छात्रों को दिया गया है, लेकिन दो अनिवार्य भाषा हिंदी और अंग्रेजी छात्रों को लेना ही है। साथ ही इसके अलावा छात्र चाहें तो क्षेत्रीय भाषा पढ़ सकते हैं। क्षेत्रीय भाषा के तौर पर 41 भाषा का विकल्प छात्रों को मिलेगा। इसमें जर्मन, फ्रेंच, रशियन सहित कई विदेशी भाषाएं भी शामिल हैं। नौंवी और ग्यारहवीं के अलावा विद्यार्थी आठवीं में भी अब तीसरी भाषा पढ़ सकते हैं। बोर्ड ने इस संबंध में सभी स्कूलों को दिशानिर्देश भेज दिए हैं।
बोर्ड का कहना है कि अगर कोई छात्र चाहे तो आठवीं में भी तीसरी भाषा पढ़ सकता है। सीबीएसई की ओर से इन बदलावों के साथ किताबों का बोझ कम करने की कोशिश की गई है। पहले छात्रों को हिंदी और अंग्रेजी की दो-दो किताबें पढ़नी होती थीं, अब उसकी जगह एक किताब कर दी गई है। छात्र हिंदी और अंग्रेजी की दो-दो किताबों में से केवल एक किताब ही कोर्स में लेंगे। इसमें हिंदी कोर और हिंदी इलेक्टिव है। उसी तरह अंग्रेजी कोर और अंग्रेजी इलेक्टिव को रखा गया है। सीबीएसई की ओर से लॉकडाउन के दौरान लगातार छात्रों के हित को ध्यान में रखकर कोर्स को अपडेट करने के साथ छात्रों की अभिरुचि से जुड़े विषयों को शामिल किया जा रहा है।
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बोर्ड की मानें तो क्षेत्रीय भाषा का विकल्प भले ही छात्रों को दिया गया है, लेकिन दो अनिवार्य भाषा हिंदी और अंग्रेजी छात्रों को लेना ही है। साथ ही इसके अलावा छात्र चाहें तो क्षेत्रीय भाषा पढ़ सकते हैं। क्षेत्रीय भाषा के तौर पर 41 भाषा का विकल्प छात्रों को मिलेगा। इसमें जर्मन, फ्रेंच, रशियन सहित कई विदेशी भाषाएं भी शामिल हैं। नौंवी और ग्यारहवीं के अलावा विद्यार्थी आठवीं में भी अब तीसरी भाषा पढ़ सकते हैं। बोर्ड ने इस संबंध में सभी स्कूलों को दिशानिर्देश भेज दिए हैं।
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बोर्ड का कहना है कि अगर कोई छात्र चाहे तो आठवीं में भी तीसरी भाषा पढ़ सकता है। सीबीएसई की ओर से इन बदलावों के साथ किताबों का बोझ कम करने की कोशिश की गई है। पहले छात्रों को हिंदी और अंग्रेजी की दो-दो किताबें पढ़नी होती थीं, अब उसकी जगह एक किताब कर दी गई है। छात्र हिंदी और अंग्रेजी की दो-दो किताबों में से केवल एक किताब ही कोर्स में लेंगे। इसमें हिंदी कोर और हिंदी इलेक्टिव है। उसी तरह अंग्रेजी कोर और अंग्रेजी इलेक्टिव को रखा गया है। सीबीएसई की ओर से लॉकडाउन के दौरान लगातार छात्रों के हित को ध्यान में रखकर कोर्स को अपडेट करने के साथ छात्रों की अभिरुचि से जुड़े विषयों को शामिल किया जा रहा है।
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