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सीबीआई ने पकड़ी कंप्यूटरों की अदला-बदली
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 24 Feb 2018 12:58 AM IST
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) में सीबीआई की फोरेंसिक टीम को कंप्यूटरों की अदला-बदली किए जाने के सुबूत मिले हैं। यह गड़बड़ी नेटवर्किंग की जांच के दौरान सामने आई। गड़बड़ी की आशंका पर सीबीआई टीम ने आयोग के कुछ कर्मचारियों से पूछताछ भी की है। सीबीआई को लग रहा है कि कई महत्वपूर्ण पटलों पर लगे कंप्यूटर दूसरे चरण की फोरेंसिक जांच शुरू होने से पहले इधर से उधर कर दिए गए। हालांकि, सीबीआई ने सभी कंप्यूटरों को तलाश कर उनकी स्कैनिंग कर ली है।
सीबीआई की फोरेंसिक टीम ने आयोग में पहली फरवरी से कंप्यूटरों की स्कैनिंग शुरू की थी। पहले चरण में गोपनीय विभाग के कई कंप्यूटरों को स्कैन किया गया था। बाद में कुछ अन्य विभागों के कंप्यूटर भी स्कैन किए गए थे। तकरीबन एक सप्ताह यह प्रक्रिया चली थी और इसके बाद सीबीआई टीम लौट गई थी। 19 फरवरी को टीम फिर इलाहाबाद लौटी ओर 20 फरवरी से फोरेंसिक टीम ने आयोग में दूसरे चरण के तहत कंप्यूटरों की स्कैनिंग शुरू कर दी। सूत्रों का कहना है था कि सीबीआई ने पहले चरण की जांच के दौरान नेटवर्किंग से पता लगा लिया था कि कौन सा कंप्यूटर कहां लगा है। फोरेंसिक टीम ने जांच शुरू की तो कई कंप्यूटरों की अदला-बदली पकड़ में आ गई। सूत्रों का कहना है कि कुछ कंप्यूटर ऐसी जगह लगे हुए मिले, जहां सीबीआई की टीम को नहीं जाना था, लेकिन मामला सामने आने के बाद टीम ने सभी अनुभागों के कंप्यूटरों को स्कैन किया। साथ ही गड़बड़ी किए जाने की आशंका पर कुछ कर्मचारियों से पूछताछ भी की गई।
यूपीपीएसी में सीबीआई ने कंप्यूटरों की स्कैनिंग का काम पूरा कर लिया। काम पूरा होने के बाद शुक्रवार को सीबीआई की फोरेंसिक टीम लौट गई। टीम का नेतृत्व कर रहे एसपी सीबीआई राजीव रंजन भी वापस चले गए हैं। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई अब आयोग के कंप्यूटरों से प्राप्त डाटा का विश्लेषण करेगी। इसके अलावा आयोग से लिए गए अन्य दस्तावेजों की जांच भी शुरू कर दी गई है। गोविंदपुर में सीबीआई कैंप कार्यालय में पूछताछ कक्ष तैयार किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही सीबीआई के अफसर लौटेंगे और अब तक गड़बड़ी के जो सुबूत मिले हैं, उनके आधार पर पूछताछ शुरू की जाएगी।
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आरओ/एआरओ परीक्षा-2014 में कटऑफ से 20 अंक अधिक पाने के बावजूद महिला अभ्यर्थी संचयिता दास अंतिम चयन से वंचित रह गईं। संचयिता ने शुक्रवार को सीबीआई कैंप कार्यालय में अपना बयान दर्ज कराया। आरओ/एआरओ परीक्षा में संचयिता ने ओ-लेवल सर्टिफिकेट भी लगाया था। आरटीआई से चयन न होने का कारण पूछा, लेकिन जवाब नहीं मिला और जब आयोग के पूछताछ काउंटर पर संपर्क किया तो जवाब मिला कि टाइप टेस्ट पास नहीं किया होगा। इसके अलावा संचयिता पीसीएस मुख्य परीक्षा-2015 में भी शामिल हुईं थीं, लेकिन इतिहास के पेपर में स्केलिंग के कारण उन्हें केवल 40 अंक मिले और जब आपत्ति किए जाने पर कॉपी दिखाई गई तो पाया कि मूल्यांकन में कई बार कटिंग की गई है। महिला अभ्यर्थी ने आरओ/एआरओ परीक्षा-2013 का इंटरव्यू भी दिया था। इस परीक्षा में भी अभ्यर्थी ने गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। मामले में सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है।
जांच का नेतृत्व कर रहे सीबीआई के एसपी शुक्रवार को मुख्यालय लौट गए। सूत्रों का कहना है कि उनकी गैर मौजूदगी में कैंप कार्यालय में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी से संबंधित जो भी शिकायतें आएंगी, उन्हें मुख्यालय भी भेजा जाएगा। मुख्यालय लौटने से पूर्व सीबीआई के एसपी ने सर्किट हाउस में कुछ अभ्यर्थियों से मुलाकात भी की और उनसे साक्ष्य लिए।
सीबीआई ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) से पिछले पांच वर्षों के दौरान जन सूचना अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारियों का हिसाब मांगा है। सीबीआई को अब तक जितनी शिकायतें मिली हैं, उनमें बड़ी संख्या में आरटीआई से जुड़े मामलों की हैं। इनको भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली से जोड़कर देखा जा रहा है। जब्त किए गए दस्तावेज और आरटीआई के तहत आयोग की ओर से दिए गए जवाबों के मिलान के बाद सीबीआई भर्ती परीक्षाओं में धांधली से जुड़े कई बड़े मामलों का खुलासा कर सकती है।
सीबीआई ने आयोग से पूछा है कि पिछले पांच वर्षों में आरटीआई के तहत कितने आवेदन आए। इनमें से कितने आवेदनों का आयोग ने जवाब दिया और कितने का जवाब नहीं दिया। सीबीआई ने आरटीआई से जुड़े सभी दस्तावेज भी मांगे हैं। यह भी पूछा है कि जिन मामलों में आरटीआई के तहत आए आवेदनों का जवाब नहीं दिया गया, उनके पीछे क्या वजह रही। आरटीआई के मामले में घिरने से आयोग में अब खलबली मची हुई है, क्योंकि आरटीआई के तहत ही अभ्यर्थियों को बताया गया था कि किन परीक्षाओं की कॉपियां नष्ट की जा चुकी हैं। बहुत से अभ्यर्थियों को यह भी बताया गया था कि किस तरह की खामियों के कारण उनका चयन नहीं हुआ। इसके अलावा भी तमाम विवादित मामलों में आयोग की ओर से आरटीआई के जवाब दिए गए थे। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई अब इन जवाबों के मूल दस्तावेजों से मिलान करेगी और इस आधार पर जांच को आगे बढ़ाएगी।
आरटीआई के तहत आए आवेदनों और आयोग की ओर से दिए गए जवाबों का मूल दस्तावेजों से मिलान के बाद गड़बड़ी के कई मामलों का खुलासा हो सकता है। ऐसा हुआ तो आरटीआई से जुड़े आयोग के अफसर और कर्मचारी इन मामलों में सीधे फंसेंगे। सूत्रों के मुताबिक आरटीआई से जुड़े मामलों की शुरुआती जांच में सीबीआई को गड़बड़ी के कुछ सुबूत मिले हैं।
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सीबीआई की फोरेंसिक टीम ने आयोग में पहली फरवरी से कंप्यूटरों की स्कैनिंग शुरू की थी। पहले चरण में गोपनीय विभाग के कई कंप्यूटरों को स्कैन किया गया था। बाद में कुछ अन्य विभागों के कंप्यूटर भी स्कैन किए गए थे। तकरीबन एक सप्ताह यह प्रक्रिया चली थी और इसके बाद सीबीआई टीम लौट गई थी। 19 फरवरी को टीम फिर इलाहाबाद लौटी ओर 20 फरवरी से फोरेंसिक टीम ने आयोग में दूसरे चरण के तहत कंप्यूटरों की स्कैनिंग शुरू कर दी। सूत्रों का कहना है था कि सीबीआई ने पहले चरण की जांच के दौरान नेटवर्किंग से पता लगा लिया था कि कौन सा कंप्यूटर कहां लगा है। फोरेंसिक टीम ने जांच शुरू की तो कई कंप्यूटरों की अदला-बदली पकड़ में आ गई। सूत्रों का कहना है कि कुछ कंप्यूटर ऐसी जगह लगे हुए मिले, जहां सीबीआई की टीम को नहीं जाना था, लेकिन मामला सामने आने के बाद टीम ने सभी अनुभागों के कंप्यूटरों को स्कैन किया। साथ ही गड़बड़ी किए जाने की आशंका पर कुछ कर्मचारियों से पूछताछ भी की गई।
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यूपीपीएसी में सीबीआई ने कंप्यूटरों की स्कैनिंग का काम पूरा कर लिया। काम पूरा होने के बाद शुक्रवार को सीबीआई की फोरेंसिक टीम लौट गई। टीम का नेतृत्व कर रहे एसपी सीबीआई राजीव रंजन भी वापस चले गए हैं। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई अब आयोग के कंप्यूटरों से प्राप्त डाटा का विश्लेषण करेगी। इसके अलावा आयोग से लिए गए अन्य दस्तावेजों की जांच भी शुरू कर दी गई है। गोविंदपुर में सीबीआई कैंप कार्यालय में पूछताछ कक्ष तैयार किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही सीबीआई के अफसर लौटेंगे और अब तक गड़बड़ी के जो सुबूत मिले हैं, उनके आधार पर पूछताछ शुरू की जाएगी।
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आरओ/एआरओ परीक्षा-2014 में कटऑफ से 20 अंक अधिक पाने के बावजूद महिला अभ्यर्थी संचयिता दास अंतिम चयन से वंचित रह गईं। संचयिता ने शुक्रवार को सीबीआई कैंप कार्यालय में अपना बयान दर्ज कराया। आरओ/एआरओ परीक्षा में संचयिता ने ओ-लेवल सर्टिफिकेट भी लगाया था। आरटीआई से चयन न होने का कारण पूछा, लेकिन जवाब नहीं मिला और जब आयोग के पूछताछ काउंटर पर संपर्क किया तो जवाब मिला कि टाइप टेस्ट पास नहीं किया होगा। इसके अलावा संचयिता पीसीएस मुख्य परीक्षा-2015 में भी शामिल हुईं थीं, लेकिन इतिहास के पेपर में स्केलिंग के कारण उन्हें केवल 40 अंक मिले और जब आपत्ति किए जाने पर कॉपी दिखाई गई तो पाया कि मूल्यांकन में कई बार कटिंग की गई है। महिला अभ्यर्थी ने आरओ/एआरओ परीक्षा-2013 का इंटरव्यू भी दिया था। इस परीक्षा में भी अभ्यर्थी ने गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। मामले में सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है।
जांच का नेतृत्व कर रहे सीबीआई के एसपी शुक्रवार को मुख्यालय लौट गए। सूत्रों का कहना है कि उनकी गैर मौजूदगी में कैंप कार्यालय में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी से संबंधित जो भी शिकायतें आएंगी, उन्हें मुख्यालय भी भेजा जाएगा। मुख्यालय लौटने से पूर्व सीबीआई के एसपी ने सर्किट हाउस में कुछ अभ्यर्थियों से मुलाकात भी की और उनसे साक्ष्य लिए।
सीबीआई ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) से पिछले पांच वर्षों के दौरान जन सूचना अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारियों का हिसाब मांगा है। सीबीआई को अब तक जितनी शिकायतें मिली हैं, उनमें बड़ी संख्या में आरटीआई से जुड़े मामलों की हैं। इनको भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली से जोड़कर देखा जा रहा है। जब्त किए गए दस्तावेज और आरटीआई के तहत आयोग की ओर से दिए गए जवाबों के मिलान के बाद सीबीआई भर्ती परीक्षाओं में धांधली से जुड़े कई बड़े मामलों का खुलासा कर सकती है।
सीबीआई ने आयोग से पूछा है कि पिछले पांच वर्षों में आरटीआई के तहत कितने आवेदन आए। इनमें से कितने आवेदनों का आयोग ने जवाब दिया और कितने का जवाब नहीं दिया। सीबीआई ने आरटीआई से जुड़े सभी दस्तावेज भी मांगे हैं। यह भी पूछा है कि जिन मामलों में आरटीआई के तहत आए आवेदनों का जवाब नहीं दिया गया, उनके पीछे क्या वजह रही। आरटीआई के मामले में घिरने से आयोग में अब खलबली मची हुई है, क्योंकि आरटीआई के तहत ही अभ्यर्थियों को बताया गया था कि किन परीक्षाओं की कॉपियां नष्ट की जा चुकी हैं। बहुत से अभ्यर्थियों को यह भी बताया गया था कि किस तरह की खामियों के कारण उनका चयन नहीं हुआ। इसके अलावा भी तमाम विवादित मामलों में आयोग की ओर से आरटीआई के जवाब दिए गए थे। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई अब इन जवाबों के मूल दस्तावेजों से मिलान करेगी और इस आधार पर जांच को आगे बढ़ाएगी।
आरटीआई के तहत आए आवेदनों और आयोग की ओर से दिए गए जवाबों का मूल दस्तावेजों से मिलान के बाद गड़बड़ी के कई मामलों का खुलासा हो सकता है। ऐसा हुआ तो आरटीआई से जुड़े आयोग के अफसर और कर्मचारी इन मामलों में सीधे फंसेंगे। सूत्रों के मुताबिक आरटीआई से जुड़े मामलों की शुरुआती जांच में सीबीआई को गड़बड़ी के कुछ सुबूत मिले हैं।