प्रयागराज : सीबीआई ने रिश्वत लेने वाले सेना के सीनियर ऑडिटर के ठिकानों को खंगाला
प्रिंसिपल कंट्रोलर ऑफ डिफेंस अकाउंट्स (पीसीडीए) के सीनियर ऑडिटर नीरज कुमार कौशल को शुक्रवार को गिरफ्तार करने के बाद सीबीआई ने प्रयागराज, अलीगढ़ और लखनऊ स्थित ठिकानों पर छापेमारी की।
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प्रिंसिपल कंट्रोलर ऑफ डिफेंस अकाउंट्स (पीसीडीए) के सीनियर ऑडिटर नीरज कुमार कौशल को शुक्रवार को गिरफ्तार करने के बाद सीबीआई ने प्रयागराज, अलीगढ़ और लखनऊ स्थित ठिकानों पर छापेमारी की। सीबीआई ने उसके ठिकानों से तमाम संदिग्ध दस्तावेज, संपत्तियों के कागजात, बैंक खातों का विवरण और कुछ नगदी बरामद की है। जांच मेंं सामने आया है कि नीरज कुमार 50 साल पहले दिवंगत मेजर की दोनों पुत्रियों को पेंशन और एरियर की पत्रावली मंजूर करने के लिए कई दिनों से परेशान कर रहा था। जब इसकी सूचना प्रयागराज की आर्मी इंटेलिजेंस यूनिट को मिली तो उन्होंने इसकी शिकायत सीबीआई से कराई, जिससे नीरज कुमार को रिश्वत लेने के बाद दबोच लिया गया।
दरअसल, शिकायकर्ता के मेजर पिता का देहांत वर्ष 1973 में हो गया था, जिसके बाद उनकी पत्नी को पेंशन मिलने लगी थी। पत्नी का वर्ष 1987 में देहांत होने के बाद मेजर की मां के खाते में पेंशन जाने लगी। वर्ष 1996 मेंं मेजर की मां का भी देहांत हो गया जिसके बाद उनकी अविवाहित पुत्रियों ने पेंशन और एरियर के लिए पीसीडीए कार्यालय मेंं संपर्क साधना शुरू किया।
करीब 26 साल से लंबित पेेंशन और एरियर की मंजूरी के लिए नीरज कुमार उनसे 30 हजार रुपये रिश्वत मांग रहा था। उसने इंडियन बैंक में क्लर्क अपने मित्र पंकज बिष्ट के लखनऊ के विराज खंड ब्रांच स्थित खाते का नंबर देकर उसमें रिश्वत की रकम जमा करने को कहा। जैसे ही मेजर की पुत्री ने क्लर्क के खाते में 20 हजार रुपये ट्रांसफर किए, सीबीआई ने आर्मी इंटेलिजेंस यूनिट की मदद से नीरज कुमार को दबोच लिया। जांच में सामने आया कि क्लर्क पंकज बिष्ट ने नीरज कुमार के साथ बीटेक किया था। उसे अपने खाते मेंं रिश्वत की रकम आने की कोई जानकारी नहीं थी, जिसकी वजह से सीबीआई ने उसे गिरफ्तार नहींं किया है।
मेरठ में भी दोस्त के खाते में ली थी रिश्वत
सीबीआई ने दो वर्ष पूर्व मेरठ मेंं भी इसी तरह पीसीडीए के ऑडिटर आशुतोष यादव को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। उसने भी अपने दोस्त के बैंक खाते मेंं रिश्वत ली थी। सीबीआई के अधिकारियों के मुताबिक पीसीडीए के कुछ कर्मचारी रिश्वत लेने के लिए यही तरीका अपना रहे हैं जिससे वे आसानी से जांच एजेंसियों की नजर में नहीं आते हैं।