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कैश की किल्लत बरकरार, अभी सुधार के नहीं आसार
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 01 Dec 2016 02:29 AM IST
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नोटबंदी के बाद से दिन बीतते लोगों की समस्या कम होने की बजाय बढ़ती ही जा रही है। महीने के आखिर में बैंकों में कैश की किल्लत है। बार-बार यही कहा जा रहा है कि आरबीआई से पैसा नहीं आया है, लेकिन लोग अब कुछ सुनना नहीं चाहते। माना जा रहा था कि वेतन और पेंशन जारी होने के बाद नगदी का टोटा खत्म हो जाएगा। सभी को महीने की 30 तारीख का ही इंतजार था, मगर हुआ ठीक इसके उलट। बुधवार को कैश की कमी पहले से भी ज्यादा रही। फिलहाल ऐसे कोई संकेत नहीं मिल रहे कि आगे हालात में कोई सुधार होगा। मतलब परेशानी और बढ़ेगी।
शहर में निजी बैंकों को छोड़ करीब-करीब सभी बैंकों में लोग ठोकर खा रहे हैं। कैश की किल्लत बीते शुक्रवार से ही बनी है। बैंकों के पास जो रिजर्व कैश था, उसी से बीते पांच दिन से काम चलाया जा रहा है। ग्राहकों को 24 की डिमांड पर चार हजार का भुगतान हो रहा है। अब तो रिजर्व कैश भी लगभग खत्म हो गया है। इसका नतीजा है कि बैंकों में काउंटर बंद हो गए हैं। लोगों को काई यह बताने वाला नहीं कि उनको भुगतान कब होगा या व्यवस्था पटरी पर कब लौटेगी।
सबसे खराब हालात पंजाब नेशनल बैंक में दिखे। बड़ी शाखाओं में सिविल लाइंस ब्रांच, कर्नलगंज ब्रांच, कीडगंज ब्रांच, कचहरी आदि में बुधवार को कैश नहीं था। लोहिया मार्ग स्थित शाखा में कुछ नकदी बची थी और दो-दो हजार का भुगतान किया जा रहा था। पीएनबी अधिकारी संघ के अध्यक्ष अश्वनी तिवारी ने बताया कि बैंक के एमडी एवं सीईओ को पत्र लिखकर कैश उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
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मुख्य शाखा को छोड़ दिया जाए तो एसबीआई की अन्य शाखाओं में भी स्थिति बदतर है। एसबीआई गोविंदपुर, तेलियरगंज, बाई का बाग, खुल्दाबाद सहित कई शाखाओं में ग्राहक पैसे के लिए परेशान रहे। नैनी की शाखा में लोग भटकते नजर आए लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं था। एसबीआई बाई का बाग से पैसा निकालने गए रामकुमार ने बताया कि वह कई शाखाओं में भटके, हर जगह से निराशा ही हाथ लगी। एसबीआई के अनिल सिन्हा ने बताया कि कैश की कमी है और सर्वर की भी समस्या है।
इलाहाबाद बैंक की सिविल लाइंस, एलनगंज, अल्लापुर, साहित्य सम्मेलन, कटरा शाखा में भी यही हाल रहा। बैंक के सहायक महामंत्री मदन जी उपाध्याय ने उच्च प्रबंधन से कैश उपलब्ध कराने की मांग की है। कहना है कि आरबीआई से कैश नहीं पहुंचने से समस्या गहराती जा रही है। इधर, शहर के डाकघरों में पैसे का संकट लगातार बना है। प्रधान डाकघर में पैसा नहीं होने से लोग लगातार वापस लौट रहे हैं।
शहर के राष्ट्रीयकृत बैंकों में कैश की कमी बीते सप्ताह से चल रही है। इसके उलट निजी बैंक लगातार भुगतान रहे हैं। उनके एटीएम से भी पैसा मिल रहा है। बुधवार को सरकारी बैंकों के एटीएम पूरी तरह से खाली मिले, जबकि निजी बैंकों एचडीएफसी, एक्सिस एवं आईसीआईसीआई के एटीएम से भुगतान होता रहा। सिविल लाइंस स्थित एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक के काउंटर से भी दिनभर पैसा मिला। इन बैंकों के एटीएम से 100 एवं दो हजार के नोट निकल रहे थे।
लोगों को जिसकी आशंका थी, वही हुआ। बुधवार को बैंकों में बुजुर्गों की काफी दुर्दशा हुई। महीने की 28 या 29 तारीख को पेंशन खाते में आ जाती है। इसके बाद 30 तारीख से अगले कुछ दिनों तक भुगतान के लिए आम दिनों में ही पेंशनरों की लंबी लाइन लगती है। नोटबंदी लागू होने के बाद आसार थे कि महीने के आखिर में बुजुर्गों को मुश्किल झेलनी पड़ सकती है और यही हुआ भी। अपने पैरों पर खड़े होने में लाचार तमाम पेंशनर घंटों लाइन में लगे रहे।
बैंकों में इनके लिए कोई अलग से व्यवस्था नहीं की गई। पेंशनर बैंककर्मियों से गुहार लगाते रहे लेकिन उनकी एक न सुनी गई। नतीजा रहा कि बहुत से लोग लौट गए। यह समस्या शहर के अलावा आसपास के कई इलाकों में रही। नैनी में एसबीआई की शाखा में जमा-भुगतान के लिए एक-एक काउंटर ही खोले गए। परेशान लोगों की बैंककर्मियों से झड़प भी हुई मगर बुजुर्गों पर किसी को तरस नहीं आया। दिन भर बुजुर्ग पेंशनर दुर्दशा झेलते रहे, फिर भी इनमें से कई को भुगतान नहीं हो सका।
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शहर में निजी बैंकों को छोड़ करीब-करीब सभी बैंकों में लोग ठोकर खा रहे हैं। कैश की किल्लत बीते शुक्रवार से ही बनी है। बैंकों के पास जो रिजर्व कैश था, उसी से बीते पांच दिन से काम चलाया जा रहा है। ग्राहकों को 24 की डिमांड पर चार हजार का भुगतान हो रहा है। अब तो रिजर्व कैश भी लगभग खत्म हो गया है। इसका नतीजा है कि बैंकों में काउंटर बंद हो गए हैं। लोगों को काई यह बताने वाला नहीं कि उनको भुगतान कब होगा या व्यवस्था पटरी पर कब लौटेगी।
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सबसे खराब हालात पंजाब नेशनल बैंक में दिखे। बड़ी शाखाओं में सिविल लाइंस ब्रांच, कर्नलगंज ब्रांच, कीडगंज ब्रांच, कचहरी आदि में बुधवार को कैश नहीं था। लोहिया मार्ग स्थित शाखा में कुछ नकदी बची थी और दो-दो हजार का भुगतान किया जा रहा था। पीएनबी अधिकारी संघ के अध्यक्ष अश्वनी तिवारी ने बताया कि बैंक के एमडी एवं सीईओ को पत्र लिखकर कैश उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
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मुख्य शाखा को छोड़ दिया जाए तो एसबीआई की अन्य शाखाओं में भी स्थिति बदतर है। एसबीआई गोविंदपुर, तेलियरगंज, बाई का बाग, खुल्दाबाद सहित कई शाखाओं में ग्राहक पैसे के लिए परेशान रहे। नैनी की शाखा में लोग भटकते नजर आए लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं था। एसबीआई बाई का बाग से पैसा निकालने गए रामकुमार ने बताया कि वह कई शाखाओं में भटके, हर जगह से निराशा ही हाथ लगी। एसबीआई के अनिल सिन्हा ने बताया कि कैश की कमी है और सर्वर की भी समस्या है।
इलाहाबाद बैंक की सिविल लाइंस, एलनगंज, अल्लापुर, साहित्य सम्मेलन, कटरा शाखा में भी यही हाल रहा। बैंक के सहायक महामंत्री मदन जी उपाध्याय ने उच्च प्रबंधन से कैश उपलब्ध कराने की मांग की है। कहना है कि आरबीआई से कैश नहीं पहुंचने से समस्या गहराती जा रही है। इधर, शहर के डाकघरों में पैसे का संकट लगातार बना है। प्रधान डाकघर में पैसा नहीं होने से लोग लगातार वापस लौट रहे हैं।
शहर के राष्ट्रीयकृत बैंकों में कैश की कमी बीते सप्ताह से चल रही है। इसके उलट निजी बैंक लगातार भुगतान रहे हैं। उनके एटीएम से भी पैसा मिल रहा है। बुधवार को सरकारी बैंकों के एटीएम पूरी तरह से खाली मिले, जबकि निजी बैंकों एचडीएफसी, एक्सिस एवं आईसीआईसीआई के एटीएम से भुगतान होता रहा। सिविल लाइंस स्थित एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक के काउंटर से भी दिनभर पैसा मिला। इन बैंकों के एटीएम से 100 एवं दो हजार के नोट निकल रहे थे।
लोगों को जिसकी आशंका थी, वही हुआ। बुधवार को बैंकों में बुजुर्गों की काफी दुर्दशा हुई। महीने की 28 या 29 तारीख को पेंशन खाते में आ जाती है। इसके बाद 30 तारीख से अगले कुछ दिनों तक भुगतान के लिए आम दिनों में ही पेंशनरों की लंबी लाइन लगती है। नोटबंदी लागू होने के बाद आसार थे कि महीने के आखिर में बुजुर्गों को मुश्किल झेलनी पड़ सकती है और यही हुआ भी। अपने पैरों पर खड़े होने में लाचार तमाम पेंशनर घंटों लाइन में लगे रहे।
बैंकों में इनके लिए कोई अलग से व्यवस्था नहीं की गई। पेंशनर बैंककर्मियों से गुहार लगाते रहे लेकिन उनकी एक न सुनी गई। नतीजा रहा कि बहुत से लोग लौट गए। यह समस्या शहर के अलावा आसपास के कई इलाकों में रही। नैनी में एसबीआई की शाखा में जमा-भुगतान के लिए एक-एक काउंटर ही खोले गए। परेशान लोगों की बैंककर्मियों से झड़प भी हुई मगर बुजुर्गों पर किसी को तरस नहीं आया। दिन भर बुजुर्ग पेंशनर दुर्दशा झेलते रहे, फिर भी इनमें से कई को भुगतान नहीं हो सका।