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High Court : धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का केस एक साथ नहीं चल सकता
Fri, 05 Jun 2026 04:05 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 05 Jun 2026 04:05 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी का केस एक साथ नहीं चल सकता। आईपीसी की धारा-406 (आपराधिक विश्वासघात), धारा-420 (धोखाधड़ी) के तहत दर्ज अपराध परस्पर भिन्न और स्वतंत्र हैं।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी का केस एक साथ नहीं चल सकता। आईपीसी की धारा-406 (आपराधिक विश्वासघात), धारा-420 (धोखाधड़ी) के तहत दर्ज अपराध परस्पर भिन्न और स्वतंत्र हैं। इसलिए उन्हें एक ही मामले में समानांतर रूप से लागू नहीं किया जा सकता।
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यह आदेश न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की एकल पीठ ने सुदेश चंद्र गुप्ता की याचिका पर दिया है। झांसी के प्रेम थाने में याची के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के आरोप में एफआईआर 2022 में दर्ज कराई गई थी। ट्रायल कोर्ट ने 10 जनवरी 2025 के आदेश से याची के खिलाफ संज्ञान/समन आदेश जारी किया था। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की और मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द करने की गुहार लगाई।
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याची के अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली रेस क्लब लिमिटेड और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश मामले का हवाला देेते हुए दलील दी कि धारा-420 और धारा-406 एक साथ लागू नहीं हो सकती। दोनों अपराधों की प्रकृति एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है। धोखाधड़ी के लिए कपटपूर्ण इरादा शुरू से होना चाहिए। जबकि आपराधिक विश्वासघात तब होता है, जब किसी संपत्ति को वैध रूप से सौंपी जाती है। बाद में वह व्यक्ति बेईमानी से उसका दुरुपयोग करता है। वहीं, अपर शासकीय अधिवक्ता ने राहत देने का विरोध किया।
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कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का अवलोकन करने के बाद स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के केस एक साथ नहीं चल सकते हैं। साथ ही संज्ञान और समन आदेश को रद्द कर दिया। मामले को ट्रायल कोर्ट को वापस भेज दिया। कहा,आवश्यक हो तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में नया आदेश पारित कर सकते हैं।