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आठ साल तक मुकदमे की लिस्टिंग नहीं कराने पर हर्जाना
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Wed, 08 Mar 2017 12:38 AM IST
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इलाहाबाद
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हाईकोर्ट में दाखिल मुकदमे को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराने हेतु अर्जी दाखिल नहीं करने पर कोर्ट ने याची के अधिवक्ता पर 2500 रुपये हर्जाना लगा दिया है। साथ ही इस मामले में महानिबंधक से स्पष्टीकरण मांगा है । मामले की सुनवाई 20 मार्च को होगी। कोर्ट ने अधिवक्ता के खिलाफ कार्रवाई हेतु हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को भी लिखा है।
श्रीमती प्रेम कली व अन्य की प्रथम अपील पर न्यायमूर्ति डा. केजे ठाकर ने यह आदेश दिया। अपील 2009 में दाखिल की गई थी। इस सुनवाई के लिए आठ वर्ष बाद दो फरवरी 2017 को अर्जी दाखिल की गई। कोर्ट ने आठ साल तक अपील की सुनवाई हेतु कोई प्रयास नहीं करने पर अधिवक्ता पर प्रति वर्ष एक हजार रुपये की दर से आठ हजार रुपये हर्जाना लगाया। महानिबंधक से भी स्पष्टीकरण मांगा है कि आठ वर्ष तक यह मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध क्यों नहीं हुआ।
आदेश पारित होने के बाद याची अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट की परंपरा के मुताबिक वादकारी के आने पर ही लिस्टिंग के लिए अर्जी दी जाती है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने भी इस मामले में दखल दिया। उनके अनुरोध पर कोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। मगर एक विधवा के मुकदमे में लापरवाही बरतने पर अधिवक्ता के आचरण पर विचार करने हेतु बार कौंसिल और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पास मामला भेज दिया है। हाईकोर्ट बार से कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है। बाद में कोर्ट ने अधिवक्ता पर लगाए हर्जाने की राशि को घटाकर 2500 रुपये कर दिया। यह राशि महानिबंधक कार्यालय में जमा करनी होगी।
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श्रीमती प्रेम कली व अन्य की प्रथम अपील पर न्यायमूर्ति डा. केजे ठाकर ने यह आदेश दिया। अपील 2009 में दाखिल की गई थी। इस सुनवाई के लिए आठ वर्ष बाद दो फरवरी 2017 को अर्जी दाखिल की गई। कोर्ट ने आठ साल तक अपील की सुनवाई हेतु कोई प्रयास नहीं करने पर अधिवक्ता पर प्रति वर्ष एक हजार रुपये की दर से आठ हजार रुपये हर्जाना लगाया। महानिबंधक से भी स्पष्टीकरण मांगा है कि आठ वर्ष तक यह मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध क्यों नहीं हुआ।
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आदेश पारित होने के बाद याची अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट की परंपरा के मुताबिक वादकारी के आने पर ही लिस्टिंग के लिए अर्जी दी जाती है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने भी इस मामले में दखल दिया। उनके अनुरोध पर कोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। मगर एक विधवा के मुकदमे में लापरवाही बरतने पर अधिवक्ता के आचरण पर विचार करने हेतु बार कौंसिल और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पास मामला भेज दिया है। हाईकोर्ट बार से कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है। बाद में कोर्ट ने अधिवक्ता पर लगाए हर्जाने की राशि को घटाकर 2500 रुपये कर दिया। यह राशि महानिबंधक कार्यालय में जमा करनी होगी।
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