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कैप्टन महेंद्रनाथ मुल्ला: अफसरों संग 29 नौसेना कर्मियों की जान बचाने पर मिला था 'महावीर चक्र'

Wed, 27 Feb 2019 04:21 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: देव कश्यप Updated Wed, 27 Feb 2019 04:21 PM IST
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Capt Mahendranath Mulla got 'Mahavir Chakra' on saving lives of 29 Naval Personnel
Captain MahendraNath Mulla

भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकाने को तबाह कर पुलवामा के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि दी है। इस जवाबी कार्रवाई के बाद गमगीन लोग विजयी मुद्रा में हैं। इस समय लोगों ने कैप्टन महेंद्रनाथ मुल्ला के आत्मोत्सर्ग को भी सलाम किया। कैप्टन मुल्ला नेे 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान न केवल पाकिस्तान की नाक में दम कर दिया था, बल्कि हमले में डूबते पोत से अफसरों संग भारतीय नौसेना के 29 कर्मचारियों की जान बचाकर नौसेना की सर्वोच्च परंपरा का निर्वाह किया था। वीरता के लिए प्रयागराज के एमएन मुल्ला को मरणोपरांत 'महावीर चक्र' दिया गया।

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प्रयागराज के स्टैनली रोड निवासी महेंद्रनाथ मुल्ला को भारतीय नौसेना में कमीशन मिला था। भारत पाक युद्ध के दौरान 1971 में कैप्टन महेंद्रनाथ मुल्ला मुंबई बंदरगाह पर खड़े पोत में थे। आशंका थी पाकिस्तान की पनडुब्बियां मुंबई बंदरगाह को निशाने पर लेंगी। तय किया गया कि नौसेना फ्लीट को मुंबई से बाहर ले जाया जाए। दो और तीन दिसंबर 1971 की रात जब भारतीय नौसेना के पोत मुंबई छोड़ रहे थे, तभी पाकिस्तानी पनडुब्बी हंगोर ठीक उस पोत के नीचे उसे डुबो देने को तैयार खड़ी थी, जिसके कैप्टन महेंद्रनाथ मुल्ला थे।
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भारतीय पोतों की रवानगी के बीच सप्ताह बीत गया। इस बीच नौसेना मुख्यालय ने आदेश दिया कि पाकिस्तानी पनडुब्बी को तुरंत नष्ट किया जाए। इसके लिए एंटी सबमरीन प्रिगेट आईएनएस खुखरी और कृपाण को लगाया गया। दोनों पोत आठ दिसंबर को मुंबई से चले और नौ दिसंबर की सुबह उस इलाके में पहुंचे, जहां पाकिस्तानी पनडुब्बी होने का संदेह था। बताते हैं कि टोह लेने की क्षमता के कारण पाकिस्तानी पनडुब्बी हंगोर को खुखरी और कृपाण की गतिविधियों का पता चल गया।
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पाकिस्तानी पनडुब्बी ने 3000 मीटर से निशाना साधकर खुखरी पर फायर किया और दो से तीन मिनट के भीतर पोत डूबना शुरू हो गया। परंपरा के मुताबिक उस वक्त नौसेना के सभी अधिकारी रात 8.45 बजे समाचार सुनने को एकत्रित हुए थे। अचानक कैप्टन मुल्ला अपनी कुर्सी से गिरे, उनका सिर लोहे से टकराया और उनके सिर से खून बहने लगा। इस बीच दूसरा धमका होते ही पोत में अंधेरा हो गया। कैप्टन मुल्ला के आदेश पर पता किया गया कि खुखरी में हमले के कारण दो छेद हो चुके थे और पोत में तेजी से पानी भर रहा था।


संकट की इस घड़ी में कैप्टन मुल्ला ने पश्चिमी नौसेना कमान को हमले का सिग्नल भेजने का निर्देश दिया। तब तक पोत में घुटने तक पानी भर चुका था। जहाज को डूबता देख कैप्टन मुल्ला ने मनु शर्मा, लेफ्टिनेंट कुंदनमल को समुद्र में कूदने को कहा। इस बीच पोत में आग भी लग गई। कैप्टन मुल्ला से अफसरों ने साथ चलने को कहा तो उन्होंने इनकार करते हुए दोनों अफसरों को धक्का देकर पोत से बाहर किया। एक के बाद एक 29 लोगों की जान बचाने के लिए समुद्र में उतारा गया। देखते-देखते पोत डूब गया। शौर्य का परिचय देने वाले कैप्टन एमएन मुल्ला समेत 18 नौसेना अफसर और 174 नाविको ने इस ऑपरेशन में जान गंवाई। 

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