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सुनवाई का मौका दिए बिना नहीं छीने जा सकते अधिकार
Fri, 01 Mar 2019 01:13 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 01 Mar 2019 01:13 AM IST
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चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
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हाईकोर्ट ने कहा है कि पंचायत राज अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ग्राम प्रधान को कारण बताओ नोटिस दिए बिना और उसे सुनवाई का मौका दिए बिना उसके वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार नहीं छीने जा सकते हैं। कोर्ट ने संभल के रामनगर टप्पा वैश ग्राम पंचायत के प्रधान का अधिकार छीनने का जिलाधिकारी संभल का आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि डीएम नियमानुसार ग्राम प्रधान को नोटिस देकर कार्यवाही कर सकते हैं।
ममता देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति वीके बिड़ला ने दिया है। याचिका में कहा गया कि गांव के बनवारी सिंह की शिकायत पर जिलाधिकारी ने बिना जांच किए और बिना सफाई का मौका दिए याची के अधिकार 19 जनवरी 2019 के आदेश से छीन लिए। शिकायत पंचायत राज अधिनियम के नियम तीन के विपरीत है। इसलिए यह विचारणीय नहीं है। कोर्ट ने कहा कि विवेकानंद यादव के केस में हाईकोर्ट की पूर्णपीठ ने कहा है कि ग्राम प्रधान को अपने खिलाफ की गई शिकायत पर आपत्ति करने का अधिकार नहीं है।
वह यह नहीं कह सकता है कि शिकायत नियम तीन के अनुरूप नहीं है। मगर, पंचायतीराज एक्ट की धारा 95(1)(जी) के तहत बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए और सुनवाई का मौका दिए बिना अधिकार नहीं जब्त किए जा सकते हैं। कोर्ट ने जिलाधिकारी के आदेश को रद्द करते हुए नए सिरे से नियमानुसार कार्यवाही करने का निर्देश दिया है।
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ममता देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति वीके बिड़ला ने दिया है। याचिका में कहा गया कि गांव के बनवारी सिंह की शिकायत पर जिलाधिकारी ने बिना जांच किए और बिना सफाई का मौका दिए याची के अधिकार 19 जनवरी 2019 के आदेश से छीन लिए। शिकायत पंचायत राज अधिनियम के नियम तीन के विपरीत है। इसलिए यह विचारणीय नहीं है। कोर्ट ने कहा कि विवेकानंद यादव के केस में हाईकोर्ट की पूर्णपीठ ने कहा है कि ग्राम प्रधान को अपने खिलाफ की गई शिकायत पर आपत्ति करने का अधिकार नहीं है।
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वह यह नहीं कह सकता है कि शिकायत नियम तीन के अनुरूप नहीं है। मगर, पंचायतीराज एक्ट की धारा 95(1)(जी) के तहत बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए और सुनवाई का मौका दिए बिना अधिकार नहीं जब्त किए जा सकते हैं। कोर्ट ने जिलाधिकारी के आदेश को रद्द करते हुए नए सिरे से नियमानुसार कार्यवाही करने का निर्देश दिया है।
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