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सीएजी रिपोर्ट : कुंभ-2019 में 42000 में खरीदे गए 36500 रुपये के शौचालय

Thu, 19 Aug 2021 11:18 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 19 Aug 2021 11:18 PM IST
सार

  • प्रधान लेखाकार ने प्रस्तुत की रिपोर्ट, शौचालय पर खर्च कर दिए गए 8.75 करोड़ रुपये अतिरिक्त
  • स्थायी,अस्थाई निर्माण में हर स्तर पर जताई आपत्ति, मानक के अनुरूप काम होता तो बच जाते करोड़ों 

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CAG Report: In Kumbh-2019, toilets worth Rs 36500 were purchased for 42000
कुंभ मेला 2019

विस्तार

कुंभ-2019 में शौचालय खरीद में ही करोड़ों रुपये की अनियमितताएं सामने आई हैं। 36500 रुपये के शौचालय 42 हजार रुपये में खरीदे गए। इस वजह से 8.75 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ा। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में कई अन्य बिंदुओं पर भी आपत्ति उठाई गई है। स्पष्ट कहा गया है कि मानक के अनुसार भुगतान हुआ होता तो करोड़ों रुपये बचाए जा सकते थे। प्रधान महालेखाकार बीके मोहंती ने बृहस्पतिवार को मार्च 2019 तक जनरल एवं सोशल सेक्टर में हुए कार्यों की ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत की। 

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CAG Report: In Kumbh-2019, toilets worth Rs 36500 were purchased for 42000
कुंभ 2019 पैंटिंग

पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रधान महालेखाकार ने बताया कि कुंभ के कार्यों को लेकर कोई मानक तय नहीं किया गया। श्रद्धालुओं की संभावित संख्या को देखते हुए शौचालय की व्यवस्था करने के साथ अन्य कार्य कराए गए होते तो बड़ी धनराशि बचाई जा सकती थी। इसके अलावा न्यूनतम निविदा की बजाय अधिक राशि पर शौचालय लिए गए। कुंभ में अलग-अलग तरीके के शौचालय खरीदे गए थे। फाइबर प्रबलित प्लास्टिक शौचालय 42 हजार रुपये में खरीदे गए। 

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CAG Report: In Kumbh-2019, toilets worth Rs 36500 were purchased for 42000
कुंभ 2019 पैंटिंग

उन्होंने बताया कि फाइबर प्रबलित प्लास्टिक सेप्टिक 36500 तथा फाइबर प्रबलित प्लास्टिक सोकपिट 29000 की दर से खरीदे गए होते तो 8.75 करोड़ रुपये बचाए जा सकते थे। अधिकतम निविदा पर शौचालय खरीदे जाते तब भी दो करोड़ से अधिक राशि बच जाती। ठेकेदारों को भी 1.27 करोड़ का अतिरिक्त लाभ पहुंचाया गया। कुंभ कार्यों की थर्ड पार्टी जांच कराई गई थी लेकिन जांच करने वाली एजेंसी लेखा टीम के सामने रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर सकी। कुंभ के कई अन्य कार्यों की रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं कराई गई। कुंभ के कार्यों में कई अन्य स्तर पर भी नियमों की अनदेखी तथा अनियमितता सामने आई हैं।

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कुंभ के कार्यों को लेकर सीएजी रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

CAG Report: In Kumbh-2019, toilets worth Rs 36500 were purchased for 42000
toilet - फोटो : अमर उजाला
  • कुंभ मेलाधिकारी दूसरे विभागों से कराए गए कार्यों की रिपोर्ट नहीं दे पाए
  • आपदा राहत कोष से नियमों के विरुद्ध 65.87 करोड़ दिए गए
  • टेंट तथा अन्य अस्थाई निर्माण के लिए कार्यदायी संस्थाओं ने 231.45 करोड़ के बिल दिए। हालांकि, 143.13 करोड़ के बिल ही भुगतान के योग्य पाए गए
  • बिना अनुमति मेलाधिकारी के मौखिक आदेश पर करा दिए गए कई काम
  • 21.75 करोड़ रुपये के गुम हो गए टिन, टेंट, फर्नीचर। हालांकि जांच तक भुगतान नहीं हुआ था
  • खराब क्वालिटी की वजह से 32.50 लाख रुपये में खरीदे गए 10 ड्रोन कैमरे उपयोग में नहीं लाए जा सके
  • सडक़ चौड़ीकरण के काम में ओवरहेड चार्ज ढाई से छह प्रतिशत कर दिया गया। इससे लागत में 2.68 करोड़ की वृद्धि हो गई
  • लोक निर्माण विभाग ने एलईडी लाइट की कीमत 10500 रुपये तय की थी लेकिन नगर निगम ने 22650 रुपये बताया। प्रति एलईडी लाइट 16589 रुपये का भुगतान किया गया। इससे 32.11 लाख रुपये का अधिक व्यय हुआ
  • सड़क निर्माण में कम गारंटी राशि जमा कराके ठेकेदारों को 2.40 करोड़ का लाभ पहुंचाया गया
  • कम क्षमता वाले ठेकेदाराें को काम दिए गए
  • बैरिकेडिंग को लेकर विभागों के चार्ज में अंतर है। अधिक चार्ज पर काम कराने से 3.24 करोड़ अतिरिक्त व्यय हुआ

दस वर्षों में सिर्फ 132 किमी हो सका इंडो-नेपाल बॉर्डर सड़क का निर्माण

CAG Report: In Kumbh-2019, toilets worth Rs 36500 were purchased for 42000
toilet - फोटो : अमर उजाला

इंडो-नेपाल बॉर्डर रोड परियोजना में भी करोड़ों रुपये का अतिरिक्त भुगतान कर दिया गया है। इतना ही नहीं, निर्माण कार्य भी काफी धीमा है तथा 10 वर्षों में सिर्फ 132 किमी सड़क का निर्माण हो सका है। इसकी वजह से सड़क निर्माण की लागत तो बढ़ ही गई, अधूरी होने की वजह से इसका उपयोग भी नहीं हो पा रहा।

प्रधान महालेखाकार बीके मोहंती ने प्रेसवार्ता में बताया कि उत्तर प्रदेश के अंतर्गत 564 किमी सड़क का निर्माण होना है लेकिन 10 वर्षों में सिर्फ 132 किमी सड़क ही बन पाई है। इसमें भी कई जगहों पर वन विभाग से एनओसी नहीं मिल पाई है। इसकी वजह से बीच-बीच में सड़क का निर्माण नहीं हो सका। इसके अलावा इस मार्ग से सेना के कैंप के बीच लिंक मार्ग का निर्माण भी नहीं हो सका है। इन वजहों से यह सड़क अब तक उपयोग में नहीं आ पाई है। अब तक जमीन का अधिग्रहण भी नहीं हो सका है। इसके अलावा बिजली, टेलीफोन आदि के पोल भी नहीं हटाए गए हैं।

इस विलंब की वजह से परियोजना की लागत 550.12 करोड़ से बढ़ाकर 779.20 करोड़ रुपये कर दी गई है। भूमि अधिग्रहण का खर्च भी 173.53 करोड़ से बढ़ाकर 458.33 करोड़ रुपये कर दिया गया है। सड़क के निर्माण में 84.85 करोड़ रुपये के ब्याज रहित अग्रिम भुगतान करके ठेकेदारों को अतिरिक्त लाभ पहुंचाया गया। इतना ही नहीं, एक ही प्रकार की मशीनों की अलग-अलग कीमत तय की गई। इससे परियोजना की लागत 11.93 करोड़ रुपये बढ़ गई। ऑडिट में कई अन्य तरह की अनियमितताएं भी सामने आई हैं।

सीएजी रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • केंद्र सरकार के राष्ट्रीय पशुधन मिशन का प्रदेश को 2014 से 2019 के बीच कोई लाभ नहीं मिला
  • पशुओं से संबंधित डाटा के लिए 822 कंम्प्यूटर सेंटर हैं लेकिन कोई उपयोग में नहीं
  • मेरठ, अलीगढ़ में बिना उपयोग के मांस की गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं का निर्माण शुरू हुआ। बीच में परियोजना निरस्त हो जाने से 79.56 लाख का नुकसान हुआ।
  • राज्य सडक़ निधि से सडक़ों की मरम्मत में मानदंडों का ध्यान नहीं रखा गया। इससे 16.32 करोड़ रुपये का अधिक व्यय हुआ
  • लोक निर्माण विभाग ने ई-टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किया 
  • 1396 आईटीआई के निर्माण में मानक का उपयोग नहीं किया गया।
  • 14 आईटीआई के निर्माण में 3.36 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान कर दिया गया
  • बेसिक शिक्षा में स्कूल बैग की खरीद प्रक्रिया विसंगतिपूर्ण रही
  • विलंब की वजह से 2016-17 में 1.15 करोड़ विद्यार्थी बैग से वंचित रह गए
  • तीन वर्षों में 9.46 करोड़ रुपये के 6.55 लाख स्कूल बैग पड़े रह गए
  • चट्टानों को अनुपयोगी घोषित किए जाने से 28.44 करोड़ का नुकसान हुआ। ठेकेदारों को इसे कम कीमत पर दे दिया गया
  • उपखनिजों की कम कीमत पर नीलामी करके ठेकेदारों को 96.98 करोड़ का लाभ पहुंचाया गया
  • आगरा के अस्पताल में 10 वर्षों में नहीं हो सका ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण
  • कई अधूरी तथा अव्यावहारिक परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए
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