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सिपाही भर्ती में भी क्षैतिज आरक्षण का पेच
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 19 Aug 2015 01:24 AM IST
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इलाहाबाद। दरोगा में भर्ती में मनमाने तरीके से आरक्षण लागू करने के बाद अब सरकार 41 हजार सिपाहियों की भर्ती भी इसी विवाद में घिर गई है। क्षैतिज आरक्षण के लाभार्थियों (महिला, विकलांग और पूर्व सैनिक) को सामान्य की सीटों पर नियुक्ति देने का आरोप लगाते हुए मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। रवि कुमार शर्मा और अन्य अभ्यर्थियों ने याचिका दाखिल आरक्षण में धांधली का आरोप लगाया है। न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने याचिका की सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार और पुलिस भर्ती बोर्ड से जवाब मांगा है।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि 16 जुलाई 2015 को घोषित 41 हजार पुलिस सिपाहियों की भर्ती के परिणाम में क्षैतिज आरक्षण लागू करने में गंभीर अनियमितताएं और धांधली की गई है। महिलाओं, विकलांग और पूर्व सैनिकों को आरक्षित 50 फीसदी कोटे के तहत ही आरक्षण का लाभ और नियुक्ति दी जा सकती है। पुलिस विभाग ने इसका उल्लंघन करते हुए सामान्य वर्ग की अनारक्षित सीटों पर इनकी नियुक्तियां कर दी हैं जबकि सामान्य वर्ग की कट ऑफ मेरिट 318 अंक थी और आरक्षित वर्ग की 314 अंक। सामान्य कोटे में जिन लोगों को नियुक्तियां दी गई हैं उन सभी के अंक 318 से कम हैं। ऐसे लगभग तीन हजार अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग में समायोजित कर दिया गया जो कि अनुचित है। कोर्ट इस मामले पर एक सितंबर को सुनवाई करेगी।
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याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि 16 जुलाई 2015 को घोषित 41 हजार पुलिस सिपाहियों की भर्ती के परिणाम में क्षैतिज आरक्षण लागू करने में गंभीर अनियमितताएं और धांधली की गई है। महिलाओं, विकलांग और पूर्व सैनिकों को आरक्षित 50 फीसदी कोटे के तहत ही आरक्षण का लाभ और नियुक्ति दी जा सकती है। पुलिस विभाग ने इसका उल्लंघन करते हुए सामान्य वर्ग की अनारक्षित सीटों पर इनकी नियुक्तियां कर दी हैं जबकि सामान्य वर्ग की कट ऑफ मेरिट 318 अंक थी और आरक्षित वर्ग की 314 अंक। सामान्य कोटे में जिन लोगों को नियुक्तियां दी गई हैं उन सभी के अंक 318 से कम हैं। ऐसे लगभग तीन हजार अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग में समायोजित कर दिया गया जो कि अनुचित है। कोर्ट इस मामले पर एक सितंबर को सुनवाई करेगी।
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