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प्रदेश मे हुआ ‘कपटपूर्ण’, ‘सांठ-गांठ’ वाली सड़कों का निर्माण

Sat, 29 Jul 2017 01:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 29 Jul 2017 01:58 AM IST
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Built in the state, 'Fraudulent', 'Construction of Roads'
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
प्रदेश में सड़कों के निर्माण में हर स्तर पर अरबों रुपये घोटाला किया गया है। ठेकेदारों के चयन से लेकर निर्माण तक में गंभीर अनियमितता सामने आई है। सभी तरह के मानक एवं नियम ताक पर रख दिए गए। बीमा, पौधरोपण समेत कई मद में तो चहेते ठेकेदारों को सीधे तौर पर करोड़ों रुपये का लाभ पहुंचाया गया है। 2011 से 2016 के बीच लोक निर्माण विभाग में हुए घोटालाें को इससे ही समझा जा सकता है कि नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट में ‘कपटपूर्ण’ और ‘सांठ-गांठ’ जैसे शब्दों का उपयोग किया गया है।
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प्रधान महालेखाकार पीके कटारिया ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता में 2011 से 31 मार्च 2016 के दौरान सड़क निर्माण में हुई अनियमितता की बाबत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस अवधि में 40 अरब 854 करोड़ 63 लाख रुपये सड़क निर्माण में खर्च किए गए। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ठेकेदार पंजीकृत हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में मात्र एक या दो ने ही टेंडर डाला। उन्होंने बताया कि 598 सड़कों के निर्माण के लिए 33 अरब से अधिक राशि खर्च हुई। इनमें से 71 फीसदी मामलों में एक या दो ही ठेकेदार आगे आए। काम के लिए ठेकेदारों के आगे न आने पर सवाल उठाते हुए प्रधान महालेखाकार ने इसे कपटपूर्ण बताया। इतना ही नहीं 71 प्रतिशत मामलों में तो निगोशिएशन कर लिया गया। जबकि, असाधारण मामलों में निगोशिएशन का प्रावधान है। बात यहीं खत्म नहीं हो जाती।
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हैसियत, चरित्र, टर्नओवर, तकनीकी-मशीनरी-मानव क्षमता से संबंधित जैसे जरूरी कागजात के बगैर ही ठेकेदारों को भुगतान कर दिया गया। इतना ही नहीं सिक्योरिटी मनी भी नहीं ली गई। कटारिया ने बताया कि बड़ी संख्या में सांठ-गांठ करके ठेकेदारी दिए जाने के मामले भी आए हैं। उन्हाेंने बताया कि सड़कों के निर्माण से पहले सर्वे भी नहीं कराया गया। ठेकेदारी के साथ निर्माण भी इंडियन रोड कांग्रेस के सभी मानकों को दरकिनार कर दिया गया है। प्रधान महालेखाकार ने बताया कि कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए काम में देरी, पैसा स्वीकृत होने से पहले ही ठेकेदार का चयन कर लेने समेत कई अनियमितताएं भी अनियमितता सामने आई हैं।
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रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु
0 बिना सर्वे लिया गया सड़कों के निर्माण, चौड़ीकरण का निर्णय
0 सड़कों के निर्माण में कोई पंचवर्षीय या वार्षिक योजना नहीं
0 समय से धन नहीं मिलने की वजह से हुआ नुकसान
0 डिजाइन, निर्माण में इंडियन रोड कांग्रेस के नियमों की अनदेखी
0 टेंडर प्रक्रिया, ठेकेदारों के चयन में नियमों का नहीं हुआ पालन
0 निगोसिएशन बन गया नियम, जबकि असाधारण मामलों में है प्रावधान
0 अनुबंध के लिए दिया अतिरिक्त समय, ब्याज रहित अग्रिम भुगतान भी
0 अभियंताओं ने अधिकार से बाहर जाकर ठेकेदारों को पहुंचाए लाभ

सड़क निर्माण में घोटाले की वजह से पर्यावरण संरक्षण की योजनाओं को भी बड़ा झटका लगा है। सड़कों के किनारे सघन पौधरोपण के लक्ष्य को प्राप्त नहीं जा सका। मात्र 170 सड़कों के निर्माण में इस मद में 47.87 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसके अलावा गिट्टी, बालू, आदि खनिजों के रवन्ना, ढुलाई में भी बड़े स्तर पर अनियमितता सामने आई है। इससे करोड़ों रुपये के राजस्व का तो नुकसान हुआ ही है, पर्यावरण को भी भारी क्षति हुई।


चयन, रायल्टी आदि में ठेकेदारों को अप्रत्यक्ष लाभ तो पहुंचाया ही गया है, कई मद में उन्हें सीधे लाभ भी पहुंचाया गया है। ठेकेदारों को 2953 अनुबंधाें के सापेक्ष 75.36 अरब रुपये का बीमा कराना था, लेकिन मात्र एक ठेकेदार ने बीमा कराया। इस तरह से 1.71 करोड़ रुपये का उन्हें सीधे लाभ पहुंचाया गया। 23 ठेकेदारों को ब्याज रहित 36.14 करोड़ का अग्रिम भुगतान किया गया। बिना उपयोगिता के उपकरणों की खरीद के लिए ठेकेदारों को 204.97 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। ठेकेदाराें को कई अन्य तरह से भी करोड़ों रुपये के लाभ पहुंचाए गए।
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