फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   budget 2021: Decision to freeze DA resented silence on withdrawal, arrears, old pension and other issues

budget 2021 : डीए फ्रीज करने का फैसला वापस लिए जाने, एरियर देने, पुरानी पेंशन समेत अन्य मुद्दों पर चुप्पी से नाराजगी

Mon, 01 Feb 2021 08:40 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 01 Feb 2021 08:40 PM IST
विज्ञापन
budget 2021: Decision to freeze DA resented silence on withdrawal, arrears, old pension and other issues
education budget 2021 - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
संसद में सोमवार को पेश बजट से कर्मचारियों में घोर निराशा है। रिकार्ड जीएसटी के बाद कर्मचारियों में उम्मीद थी कि डीए फ्रीज करने का आदेश वापस लिए जाने के साथ एरियर की भी घोषणा की जाएगी। इसके अलावा आयकर में छूट की भी उम्मीद थी लेकिन इनके साथ पुरानी पेंशन समेत अन्य मुद्दों पर चुप्पी ने कर्मचारियों की नाराजगी बढ़ा दी है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में विनिवेश की घोषणा ने उनकी निराशा और बढ़ा दी है।
विज्ञापन


गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष पूर्व मंडलायुक्त आरएस वर्मा ने बजट को साधारण बताया। उनका कहना है कि बजट में आम लोगों और कर्मचारियों को कोई राहत नहीं दी गई है। आईआईटी जैसे शिक्षण संस्थान, हॉस्पिटल, मेडिकल कालेज, उद्योग लगाने जैसी कोई पहल नहीं की गई है। यह निराश करने वाला है।
विज्ञापन


उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष नरसिंह का कहना है कि पुरानी पेंशन, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती शुरू करने, इनकम टैक्स में छूट आदि बिंदुओं पर सरकार पूरी तरह से मौन है। इसलिए कर्मचारियों की दृष्टि से यह बजट काफी निराश करने वाला है। 75 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को आईटीआर से छूट दी गई है। यह छूट 60 साल की उम्र से होनी चाहिए थे। पीडब्ल्यूडी नियमित वर्कचार्ज कर्मचारी संघ क्षेत्रीय मंत्री रविशंकर मिश्र का कहना है कि पुरानी पेंशन पर सरकार मौन है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इनकम टैक्स के स्लैब में कोई परिवर्तन न करके भी सरकार ने बताया कि वह कर्मचारी विरोधी है। इलाहाबाद डिवीजन इंश्योरेंस इंप्लाइज यूनियन के पूर्व अध्यक्ष अविनाश कुमार मिश्र ने इसे घोर निराशाजनक वाला बजट बताया। बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा 74 फीसदी करने के प्रस्ताव को उन्होंने घातक बताया। उनका कहना है कि असंगठित क्षेत्र के 41 करोड़ कामगारों के लिए बजट में कुछ नहीं है। उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र कुमार त्रिपाठी ने भी बजट को निराशाजनक बताया। उनका कहना है कि कर्मचारी, अधिकारी, श्रमिक, मजदूर किसी के लिए बजट में कुछ नहीं है।

किसानों के लिए योजनाएं तो अच्छी हैं लेकिन प्रक्रिया भी सरल हो

कृषि कानूनों के विरोध में जारी आंदोलन के बीच सोमवार को पेश केंद्रीय बजट को लेकर किसानों का एक वर्ग उत्साहित है तो कई निराश भी हैं। किसानों का कहना है कि खेती के लिए बजट में अलग से प्रावधान है। इसके अलावा किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई अन्य प्रावधान भी किए गए हैं लेकिन प्रक्रिया का भी सरलीकरण होना चाहिए।

धरावत्स बायो एनर्जी फार्मर प्रोड्यूसर के त्रिभुवन नाथ पटेल का कहना है कि हर वर्ष केबजट में किसानों का ध्यान रखा जाता है। इस बार भी बजट में किसान हित में कई प्रावधान किए गए हैं लेकिन किसान नियमों की खानापूर्ति में ही फंस जाता है। किसान को योजनाओं में शामिल होने के लिए एक ही कागज हर बार देने होते हैं। जबकि सबकुछ ऑनलाइन हो चुका है। नियमों के प्रति बहुत जागरूक नहीं होने की वजह से उनका शोषण भी होता है। इस ओर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। जसरा के जीत लाल का कहना है कि बीज में सब्सिडी समेत अन्य योजनाओं में बड़े किसानों को भी शामिल किया जाना चाहिए।

कारपोरेट घरानों का रखा गया है ध्यान

सपा नेताओं ने बजट को सभी वर्ग के लिए निराश करने वाला बताया। महंगाई पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। वरिष्ठ नेता राज्यसभा सदस्य रेवती रमण सिंह ने बजट को किसान विरोधी और उद्योगपतियों का हितैषी बताया। उन्होंने कहा कि सरकार के दावे सिर्फ कागजी बाजीगीरी है। जैसे 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का पता नहीं चला उसी तरह से इस बजट से भी आमलोगों को कोई लाभ नहीं होगा।


जिला इकाई की बैठक में भी बजट को निराशाजनक बताया गया। जिलाध्यक्ष योगेश चंद्र यादव ने कहा कि सबकुछ निजी तंत्र के हवाले होता जा रहा है। बजट में निजीकरण को प्रोत्साहित किया गया है। यह बजट महंगाई और बेरोजगारी को और बढ़ाने वाला है। प्रवक्ता दान बहादुर मधुर ने तंज कसा कि आम बजट में पूंजीपतियों को सरकार पर निर्भर रहने और मध्यम वर्ग एवं गरीबों को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की गई है। बैठक में संदीप सिंह पटेल, राम सुमेर पाल, पंचू राम निषाद आदि मौजूद रहे। महानगर प्रवक्ता सै.मो.अस्करी ने कहा कि यह बजट महंगाई बढ़ाने वाला है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed