फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   BSP will protect the Vaishya candidate with the help of credit!

बसपा वैश्य प्रत्याशी के सहारे बचाएगी साख!

Mon, 06 Nov 2017 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 06 Nov 2017 01:41 AM IST
विज्ञापन
BSP will protect the Vaishya candidate with the help of credit!
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
लोकसभा से विधानसभा चुनाव तक हार पर हार और बड़े नेताओं के पार्टी से जाने के कारण झटके खा रही बहुजन समाज पार्टी (बसपा) नगर निकाय चुनाव में दमखम दिखाने का दावा कर रही है। चयन कमेटी की संस्तुति के बाद सभी जोन इंचार्जों ने बैठक के बाद वैश्य मतों को साधने के लिए विजय का फंडा बताकर जोर आजमाइश में सक्रिय खांटी नेताओं को किनारे लगा दिया। पार्टी अध्यक्ष मायावती के निर्देश पर कारोबारी रमेश चंद्र केसरवानी को प्रत्याशी घोषित कर पार्टी ने पुराने बसपाई और नगर अध्यक्ष चौधरी सईद अहमद को किनारे कर दिया। संगमनगरी में देर रात तक पार्षद प्रत्याशियों के आवेदकों पर मंथन पर सूची को अंतिम रूप दिया गया।
विज्ञापन


महापौर पद के लिए सबसे पहले आवेदन करने वालों में बसपा शहर अध्यक्ष चौधरी सईद अहमद, संजय गोस्वामी, विदुला दिलीप के साथ कई और नाम चर्चा में रहे। माना जा रहा था कि बसपा एक बार फिर इलाहाबाद में अल्पसंख्यक कार्ड खेलकर सईद को प्रत्याशी बनाकर महापौर अपना बना सकती है। समय के साथ आवेदकों की संख्या बढ़ी। नए दावेदारों ने बसपा की परंपरा के मुताबिक अपने चयन को ही निश्चित बताया।
विज्ञापन


पिछले दिनों हुई चयन कमेटी की बैठक में जो नाम सामने आए उनमें चौधरी सईद के साथ संजय गोस्वामी, रमेश चंद्र केसरवानी, एक ज्वैलर्स और एक मोबाइल कारोबारी का नाम प्रमुखता से सामने आया। इन नामों पर तर्क दिया गया कि कारोबारियों को साध कर महापौर का पद बसपा अपने पास ला सकती है। जोर आजमाइश में अल्पसंख्यक कार्ड का दांव पार्टी ने फेल मान लिया। मायावती के निर्देश पर रमेश को पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी घोषित करते हुए जोन इंचार्ज डॉ. अशोक सिद्धार्थ ने चयन के आधार पर चुप्पी साध ली। उधर, देर रात तक पार्षद प्रत्याशियों के नाम महापौर प्रत्याशी रमेश और नगर-जिला अध्यक्ष की मौजूदगी में तय किए जाते रहे। माना जा रहा है कि सोमवार को पार्षद प्रत्याशियों के नाम घोषित किए जाएंगे। इस पर भी रार होना तय है। रविवार को कई कार्यकर्ता विरोध करते घूमते रहे। ऐेसे में यह स्थिति पार्टी के लिए घातक भी हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बहुजन समाज पार्टी ने महापौर पद के लिए आवेदन देने वाले पदाधिकारियों और पुराने नेताओं को किनारे करते हुए कारोबारी रमेश चंद्र केसरवानी को प्रत्याशी घोषित किया है। जोन इंचार्ज राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि पार्टी पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ेगी। सभी वार्डों में पार्षद प्रत्याशी पार्टी के सिंबल पर चुनाव लडे़ंगे।

बसपा में एक सप्ताह से महापौर के टिकट को लेकर उधेड़बुन चल रही थी। कई दिन इंतजार के बाद माना जा रहा था कि प्रत्याशी का नाम चौंकाने वाला होगा। रविवार को सिविल लाइंस में जोन इंचार्ज ने पत्रकार वार्ता में महापौर प्रत्याशी के नाम का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने रमेश चंद्र केसरवानी को महापौर प्रत्याशी घोषित किया है। पार्टी के नगर अध्यक्ष चौधरी सईद अहमद के प्रत्याशी न बनाए जाने पर उन्होंने चुप्पी साध ली। अल्पसंख्यकों की अनदेखी करने के सवाल पर कहा कि चयन कमेटी के निर्णय पर पार्टी सुप्रीमो की सहमति से नाम तय किया गया है। इसलिए इस पर बोलना उचित नहीं है। बसपा ने फतेहपुर, मंझनपुर समेत कई जिलों में अल्पसंख्यक प्रत्याशियों को निकाय चुनाव में प्रत्याशी बनाया है। जोन इंचार्ज ने कहा कि रमेश केसरवानी करीब 15 वर्षों से पार्टी से जुड़े हैं। व्यापारी वर्ग और जनता में उनकी छवि चुनाव में अच्छे परिणाम दिलाएगी। इस मौके पर जोन इंचार्ज राजू गौतम, नगर बसपा अध्यक्ष चौधरी सईद अहमद, जिलाध्यक्ष अवधेश गौतम, अमित श्रीवास्तव, ज्ञान सिंह समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

महापौर प्रत्याशी की घोषणा के दौरान प्रेसवार्ता में अचानक शोर मचाते हुए बादशाह खान नाम के बसपा कार्यकर्ता ने शोर मचाना शुरू कर दिया। उसने जोन इंचार्ज से सीधा सवाल किया कि ‘मेरा टिकट क्यों काटा...एक हफ्ते से आश्वासन दे रहे थे... अब क्या हो गया’। किसी तरह अन्य कार्यकर्ता उसे हाल से बाहर ले गए। उसके वहां से जाते ही जोन इंचार्ज बोले, यह प्रायोजित है जबकि जिलाध्यक्ष ने कहा कि बादशाह पार्टी का कार्यकर्ता ही नहीं है। इसके साथ कई अन्य कार्यकर्ता प्रेसवार्ता के दौरान हाल के बाहर टिकट वितरण में गड़बड़ी और मनमानी का आरोप लगाते रहे।


वर्ष 2006-07 में हुए नगर निकाय चुनाव में रमेश चंद्र केसरवानी ने बसपा से टिकट न मिलने पर पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी कुमार नारायण के खिलाफ बागी प्रत्याशी के तौर पर महापौर का चुनाव लड़ा था। उस वक्त उन पर जिलाध्यक्ष ने पार्टी का झंडा-बैनर इस्तेमाल करने का आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज कराई थी। चुनाव बाद फिर पार्टी में उनकी गतिविधियां पहले की तरह हुईं और उन्हें इस बार प्रत्याशी बनाया गया।
- पार्षद प्रत्याशियों की सूची पर देर रात तक मंथन, आज होगी जारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed