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बसपा ने लिया चार साल पुराना बदला
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 15 Mar 2018 01:29 AM IST
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बसपा ने फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में आखिर भाजपा से चार साल पुराना बदला ले लिया। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने सभी प्रमुख दलों के वोट बैंक में सेंधमारी की थी और सबसे अधिक नुकसान बसपा को पहुंचाया था। इस बार बसपा ने सपा से गठबंधन कर भाजपा को तगड़ा झटका दिया है। सपा को 2014 के चुनाव में फूलपुर संसदीय क्षेत्र में सपा को महज 20.33 फीसदी वोट मिले थे लेकिन इस बार मत प्रतिशत बढ़कर 46.95 फीसदी हो गया है। माना जा रहा है कि बसपा के कैडर वोटों ने सपा के मतों में भारी इजाफा किया है।
फूलपुर संसदीय क्षेत्र से वर्ष 2009 के चुनाव में बसपा के कपिल मुनि करवरिया निर्वाचित हुए थे लेकिन पांच साल बाद वर्ष 2014 में मोदी लहर के बीच हुए चुनाव में बसपा को फूलपुर संसदीय क्षेत्र में 14.31 फीसदी वोटों का नुकसान उठाना पड़ा था। इसके साथ सपा के मत प्रतिशत में भी काफी गिरावट आई थी। इसके उलट 2014 के चुनाव में भाजपा को फूलपुर में पहली बाद मिली अप्रत्याशित जीत में उसका मत प्रतिशत 44.31 फीसदी बढ़ा था। भाजपा को कुल मतों के 52.42 फीसदी वोट मिले थे। सबसे अधिक नुकसान बसपा का हुआ था। इस बार बसपा ने सपा के साथ गठबंधन करते हुए भाजपा के वोटों में सेंधमारी कर दी। भाजपा को कुल 38.79 फीसदी मत मिले जबकि समाजवादी पार्टी को 46.95 फीसदी वोट मिले। यह मत प्रतिशत और बढ़ सकता था, अगर अतीक मैदान में न होते। अतीक अहमद को 6.58 फीसदी मत मिले।
चुनाव नतीजों ने साफ कर दिया है कि बसपा ने सपा से गठबंधन किया तो दोस्ती भी पूरी तरह से निभाई। मतदान के दिन बस्ते से लेकर बूथ तक बसपा कार्यकर्ताओं ने सपा का साथ निभाया। कार्यकर्ताओं ने बससा के कैडर वोटरों को बूथों तक पहुंचाने के लिए पूरा जोर लगा रखा था। बुधवार को नतीजे आने के बाद दोनों दलों के कार्यकर्ताओं ने जश्न भी साथ मनाया और जीत के जुलूसों में दोनों दलों के झंडे भी साथ दिखे।
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सपा-बसपा का गठबंधन इस बार तो काम कर गया लेकिन यही गठबंधन पिछली बार होता तो सपा और बसपा को झटका झेलना पड़ता। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के केशव प्रसाद मौर्य 503564 मत पाकर सांसद निर्वाचित हुए थे। वहीं, सपा को 195256 और बसपा को 503564 वोट मिले थे। अगर इन दोनों के वोट मिला दिए जाएं तो भी भाजपा को इन दोनों से एक लाख 44 हजार 604 वोट अधिक मिले थे।
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फूलपुर संसदीय क्षेत्र से वर्ष 2009 के चुनाव में बसपा के कपिल मुनि करवरिया निर्वाचित हुए थे लेकिन पांच साल बाद वर्ष 2014 में मोदी लहर के बीच हुए चुनाव में बसपा को फूलपुर संसदीय क्षेत्र में 14.31 फीसदी वोटों का नुकसान उठाना पड़ा था। इसके साथ सपा के मत प्रतिशत में भी काफी गिरावट आई थी। इसके उलट 2014 के चुनाव में भाजपा को फूलपुर में पहली बाद मिली अप्रत्याशित जीत में उसका मत प्रतिशत 44.31 फीसदी बढ़ा था। भाजपा को कुल मतों के 52.42 फीसदी वोट मिले थे। सबसे अधिक नुकसान बसपा का हुआ था। इस बार बसपा ने सपा के साथ गठबंधन करते हुए भाजपा के वोटों में सेंधमारी कर दी। भाजपा को कुल 38.79 फीसदी मत मिले जबकि समाजवादी पार्टी को 46.95 फीसदी वोट मिले। यह मत प्रतिशत और बढ़ सकता था, अगर अतीक मैदान में न होते। अतीक अहमद को 6.58 फीसदी मत मिले।
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चुनाव नतीजों ने साफ कर दिया है कि बसपा ने सपा से गठबंधन किया तो दोस्ती भी पूरी तरह से निभाई। मतदान के दिन बस्ते से लेकर बूथ तक बसपा कार्यकर्ताओं ने सपा का साथ निभाया। कार्यकर्ताओं ने बससा के कैडर वोटरों को बूथों तक पहुंचाने के लिए पूरा जोर लगा रखा था। बुधवार को नतीजे आने के बाद दोनों दलों के कार्यकर्ताओं ने जश्न भी साथ मनाया और जीत के जुलूसों में दोनों दलों के झंडे भी साथ दिखे।
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सपा-बसपा का गठबंधन इस बार तो काम कर गया लेकिन यही गठबंधन पिछली बार होता तो सपा और बसपा को झटका झेलना पड़ता। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के केशव प्रसाद मौर्य 503564 मत पाकर सांसद निर्वाचित हुए थे। वहीं, सपा को 195256 और बसपा को 503564 वोट मिले थे। अगर इन दोनों के वोट मिला दिए जाएं तो भी भाजपा को इन दोनों से एक लाख 44 हजार 604 वोट अधिक मिले थे।