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टिकट हुआ पक्का, प्रत्याशी जुटे प्रचार में
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Mon, 09 Jan 2017 01:53 AM IST
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बसपा प्रतीक
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विधानसभा चुनाव 2017 की अधिसूचना जारी होने के बाद बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने पार्टी के कैंडिडेटों की लिस्ट फाइनल कर दी। लिस्ट जारी होने के साथ पार्टी प्रत्याशियों ने राहत की सांस ली है। अब उनको विश्वास हो गया है कि उनकी सीट पर नए प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारे जाएंगे। इतना ही नहीं बीएसपी मुखिया ने घोषित प्रत्याशियों संग बैठक कर उन्हें इसका भरोसा भी दिलाया। हालांकि उन्होंने इस बात के संकेत जरूर दिए हैं कि कोई प्रत्याशी दूसरी पार्टियों की तरफ जरा भी तांक-झांक करता है तो उनका पत्ता साफ हो सकता है।
बीएसपी ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा डेढ़ वर्ष पूर्व ही कर दी थी। इलाहाबाद और उसके आसपास के जिलों की विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा मिर्जापुर और इलाहाबाद मंडल के जोन कोआर्डिनेटर आरके चौधरी ने प्रेसवार्ता में की थी लेकिन उसके कुछ महीने बाद ही पार्टी में उठापटक शुरू गई। पार्टी के महासचिव और नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्या और बीएस-4 के अध्यक्ष आरके चौधरी पार्टी छोड़कर चले गए। इससे बीएसपी में नई खेमेबंदी शुरू हो गई। पार्टी में दोनों ही नेताओं से जुड़े लोगों को चिह्नित किया जाने लगा। इन दोनों नेताओं के कहने पर पार्टी ने जिनको मैदान में उतारने की घोषणा की उनकी जगह पर दूसरे प्रत्याशियों की तलाश की जाने लगी।
इलाहाबाद जिले की फाफामऊ विधान सभा सीट से गुरु प्रसाद मौर्य और शहर उत्तरी विधान सभा सीट पर घोषित प्रत्याशी संजय गोस्वामी का पत्ता साफ कर नए प्रत्याशी घोषित कर दिए। इसके चलते अन्य प्रत्याशियों में उहापोह की स्थिति बन गई। उन्हें यह डर सताने लगा कि कहीं मायावती उनका भी पत्ता न साफ कर दें। प्रत्याशियों का चुनाव प्रचार धीमा पड़ गया। प्रत्याशी यही चाह रहे थे कि एक बार बहन जी की ओर से उन्हें हरी झंडी मिल जाए तो वे आगे बढ़ें।
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बहन जी ने शनिवार को लखनऊ में प्रत्याशियों के साथ बैठक की और उन्होेंने न केवल संशय दूर किया बल्कि उन्हें चुनाव प्रचार में जुट जाने को कहा। इसके बाद से ही प्रत्याशियों ने अपना प्रचार अभियान तेज कर दिया है। रविवार को दिन भर बीएसपी कार्यालय के साथ ही प्रत्याशियों के आवास पर भी कार्यकर्ताओं की भीड़ नजर आई। जन संपर्क अभियान शुरू कर दिया।
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बीएसपी ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा डेढ़ वर्ष पूर्व ही कर दी थी। इलाहाबाद और उसके आसपास के जिलों की विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा मिर्जापुर और इलाहाबाद मंडल के जोन कोआर्डिनेटर आरके चौधरी ने प्रेसवार्ता में की थी लेकिन उसके कुछ महीने बाद ही पार्टी में उठापटक शुरू गई। पार्टी के महासचिव और नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्या और बीएस-4 के अध्यक्ष आरके चौधरी पार्टी छोड़कर चले गए। इससे बीएसपी में नई खेमेबंदी शुरू हो गई। पार्टी में दोनों ही नेताओं से जुड़े लोगों को चिह्नित किया जाने लगा। इन दोनों नेताओं के कहने पर पार्टी ने जिनको मैदान में उतारने की घोषणा की उनकी जगह पर दूसरे प्रत्याशियों की तलाश की जाने लगी।
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इलाहाबाद जिले की फाफामऊ विधान सभा सीट से गुरु प्रसाद मौर्य और शहर उत्तरी विधान सभा सीट पर घोषित प्रत्याशी संजय गोस्वामी का पत्ता साफ कर नए प्रत्याशी घोषित कर दिए। इसके चलते अन्य प्रत्याशियों में उहापोह की स्थिति बन गई। उन्हें यह डर सताने लगा कि कहीं मायावती उनका भी पत्ता न साफ कर दें। प्रत्याशियों का चुनाव प्रचार धीमा पड़ गया। प्रत्याशी यही चाह रहे थे कि एक बार बहन जी की ओर से उन्हें हरी झंडी मिल जाए तो वे आगे बढ़ें।
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बहन जी ने शनिवार को लखनऊ में प्रत्याशियों के साथ बैठक की और उन्होेंने न केवल संशय दूर किया बल्कि उन्हें चुनाव प्रचार में जुट जाने को कहा। इसके बाद से ही प्रत्याशियों ने अपना प्रचार अभियान तेज कर दिया है। रविवार को दिन भर बीएसपी कार्यालय के साथ ही प्रत्याशियों के आवास पर भी कार्यकर्ताओं की भीड़ नजर आई। जन संपर्क अभियान शुरू कर दिया।