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बखूबी बुना रिश्तों का ताना-बाना
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 08 Oct 2015 01:27 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। संस्था बैकस्टेज की ओर से बुधवार को सांस्कृतिक केंद्र प्रेक्षागृह में मंचित ‘हास्य रसायन’ के बहाने जहां सामाजिक सच सहित प्रेम, राजनीति और रिश्तों का ताना-बाना बखूबी बुना गया। सतीश दवे लिखित और प्रवीण शेखर निर्देशित नाटक को कलाकारों ने अपने कुशल अभिनय से सार्थक बनाया।
ठहाकों की गूंज के बीच दर्शक बार-बार सामाजिक दोगलेपन, विसंगतियों, भ्रष्टाचार और राजनैतिक शक्तियों के दुरुपयोग से रूबरू होते रहे। संस्कृत प्रहसन कौतुक रत्नाकर, लटकमेलकम और धूर्त समागम के संगम को सतीश तिवारी, सिद्धार्थ पाल, संदीप कुमार शुक्ला, सुनील कुमार, अभिषेक गुप्ता, संध्या शुक्ला, संजना शुक्ला, संजय यादव, अनुराग पांडेय, सुशील कुमार, निखिलेश कुमार मौर्या, अर्पित श्रीमान, कौशलेंद्र तिवारी, सौरभ आदि ने विभिन्न भूमिकाओं के साथ सार्थक किया। सिद्धार्थ पाल ने सहायक निर्देशक और विजयंत सिंह ने प्रस्तुति नियंत्रक की जिम्मेदारी संभाली। सुजाय घोषाल की प्रकाश परिकल्पना और संदीप का संगीत प्रभावपूर्ण रहा।
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ठहाकों की गूंज के बीच दर्शक बार-बार सामाजिक दोगलेपन, विसंगतियों, भ्रष्टाचार और राजनैतिक शक्तियों के दुरुपयोग से रूबरू होते रहे। संस्कृत प्रहसन कौतुक रत्नाकर, लटकमेलकम और धूर्त समागम के संगम को सतीश तिवारी, सिद्धार्थ पाल, संदीप कुमार शुक्ला, सुनील कुमार, अभिषेक गुप्ता, संध्या शुक्ला, संजना शुक्ला, संजय यादव, अनुराग पांडेय, सुशील कुमार, निखिलेश कुमार मौर्या, अर्पित श्रीमान, कौशलेंद्र तिवारी, सौरभ आदि ने विभिन्न भूमिकाओं के साथ सार्थक किया। सिद्धार्थ पाल ने सहायक निर्देशक और विजयंत सिंह ने प्रस्तुति नियंत्रक की जिम्मेदारी संभाली। सुजाय घोषाल की प्रकाश परिकल्पना और संदीप का संगीत प्रभावपूर्ण रहा।
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