ब्रांडेड कंपनियों के पैकटों में बिक रहे डुप्लीकेट बीज
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हालांकि कृषि विभाग का दावा है कि उसने अपने गोदामों पर किसानों को धान के बीज उपलब्ध कराने के लिए आठ कंपनियों को जिम्मेदारी सौंपी है। ये कंपनियां धान की हाईब्रिड बीज बेच रही हैं, लेकिन बड़ी संख्या में किसानों का ऐसा वर्ग है, जो गोदामों की बजाय बीज की निजी दुकानों से धान के बीज की खरीददारी कर रहा है। ऐसे किसानों ने जब धान की बेहन डाली तो बीज अंकुरित ही नहीं हुआ। गंगापार और यमुनापार के बड़ी संख्या में किसान इसकी शिकायत कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि कंपनियों ने उन्हें धोखा दे दिया है। बीज अंकुरित ही नहीं हुआ। हजारों किसानों की खेती भी चौपट होने के करीब है। धान की बेहन न आने से वे इसकी रोपाई नहीं कर पा रहे हैं।
करछना के पनासा गांव के रहने वाले राजेश कुमार पांडेय 25 बीघे के काश्तकार हैं। उन्हें नौ बीघा धान की बुआई करनी है। उन्होंने बताया कि वह करछना स्थित बीज की दुकान से 10 किलो धान का बीज खरीदा। बेहन डालने पर केवल तीस फीसदी बीज ही अंकुरित हुआ। इससे परेशानी खड़ी हो गई है। धान की रोपाई दूसरे किसान से बेहन खरीदकर लगवानी पड़ेगी। इसी तरह की बात करछना के बसही गांव के दयाशंकर तिवारी भी बताते हैं कि तीन बीघा धान की बुआई के लिए बीज खरीदा था। बीज आने का प्रतिशत बहुत ही कम है। अंकुरित होने के बाद पौधे ज्यादा बढ़े नहीं। गंगापार और यमुनापार के सैकड़ों किसानों का कहना है कि धान के बीजों में अधिकतर ऐसा ही हुआ है। जिला कृषि अधिकारी कहते हैं कि वह जांच कराकर डुप्लीकेट बीज बेच रहे किसानों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।