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प्रयागराज : सृष्टि का प्रथम यज्ञ कराते दर्शन देंगे ब्रह्मा, दिखेगा कुमारिल भट्ट का आत्मदाह

Mon, 03 Jul 2023 04:24 PM IST
विनोद सिंह अनूप ओझा, प्रयागराज
अनूप ओझा, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 03 Jul 2023 04:24 PM IST
सार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चाहते हैं कि इस बार के महाकुंभ को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने के साथ ही सांस्कृतिक महत्व के उन पहलुओं को विश्व पटल पर प्रदर्शित किया जाए, जो शास्त्रों-पुराणों में वर्णित हैं।

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Brahma will give darshan while performing the first Yajna of creation
ब्रह्मा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

महाकुंभ-2025 में प्रयागराज की पौराणिक महिमा को विश्व पटल पर प्रदर्शित करने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। आने वाले महाकुंभ की अलौकिक छटा विश्व समुदाय के लिए दर्शनीय होगी। देश-दुनिया के कोने-कोने से महाकुंभ में पुण्य की डुबकी लगाने के लिए आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को पहली बार प्रथम यज्ञ भूमि की महिमा का अहसास कराया जाएगा। संगम पर आदिशंकराचार्य और कुमारिल भट्ट से शास्त्रार्थ की स्मृतियां भी ताजा की जाएंगी, ताकि श्रद्धालु महाकुंभ में यहां की गौरवशाली संस्कृति को आत्मसात कर सकें।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चाहते हैं कि इस बार के महाकुंभ को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने के साथ ही सांस्कृतिक महत्व के उन पहलुओं को विश्व पटल पर प्रदर्शित किया जाए, जो शास्त्रों-पुराणों में वर्णित हैं। महाकुंभ में प्रयागराज के वैभव से विश्व समुदाय को परिचित कराने वाले पहलुओं को लेकर उन्होंने अफसरों और जन प्रतिनिधियों से जानकारी भी ली है।

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इस क्रम में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व के कई अहम सुझाव सीएम को दिए गए हैं। इसमें संगम के आसपास यज्ञ कराते ब्रह्मा की आदमकद प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। पौराणिक मान्यता है कि प्रयागराज सृष्टि की प्रथम यज्ञ भूमि रही है। कहा जाता है कि सृष्टि की रचना करने के बाद ब्रह्मा ने इसी संगम की रेती पर पहला यज्ञ किया था। उसकी आध्यात्मिक महिमा को आत्मसात करते हुए सनातनधर्मी माघ मेला, कुंभ और महाकुंभ में संगम की रेती पर महीने भर यज्ञ-अनुष्ठानों का संकल्प लेकर जप, तप और ध्यान करते हैं।

इस पौराणिक संस्कृति से आस्थावानों को सीधे जोड़ने के लिए ब्रह्मा की मूर्ति महाकुंभ से पहले लगाने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही कुमारिल भट्ट का भस्म होना और रामायण लिखते वाल्मीकि की भी मूर्तियां महाकुंभ की शोभा बनेंगी। आदि शंकराचार्य और मीमांसा के प्रकांड विद्वान कुमारिल भट्ट के शास्त्रार्थ को भी प्रतिमाओं में उकेरने की योजना है। महाकुंभ से पहले ब्रह्मा, वाल्मीकि और कुमारिल भट्ट की प्रतिमाओं के रूप में प्रयागराज की संस्कृति को प्रदर्शित करने की योजना को साकार करने की दिशा में काम शुरू हो गया है।

प्रयागराज की संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए ब्रह्मा, वाल्मीकि और कुमारिल भट्ट की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विस्तार से चर्चा हुई है। इस आशय का प्रस्ताव भी भेज दिया गया है। - गणेश केसरवानी, महापौर, प्रयागराज

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