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हाईकोर्ट में दाखिल की गई फर्जी याचिका, जांच के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 30 Jul 2016 02:20 AM IST
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अमेरिका में बैठे व्यक्ति के नाम से हाईकोर्ट में फर्जी याचिका दाखिल कर राहत की मांग की गई है। याचिका में पारिवारिक विवाद का मामले में गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की गई। मामला तब खुला जब हाईकोर्ट ने मामले को समझौता केंद्र भेज दिया और समझौते की तारीख पर याची नहीं पहुंचा। कोर्ट ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए महानिबंधक को इसकी जांच का निर्देश दिया है। याची के अधिवक्ता और पैरोकार को निर्देश दिया है कि वह जांच में सहयोग करें।
अमेरिका निवासी वरुण तलवार के नाम से हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई, जिसमें कानपुर के गोविंद नगर थाने में 22 नवंबर 2015 को दहेज उत्पीड़न के एक मुकदमे में गिरफ्तारी पर रोक की मांग की गई है। याचिका में पैरोकार अविनाश शंकर ने खुद को याची का चाचा बताते हुए हलफनामा दाखिल किया। याचिका पर न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति एसबी सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई की। पारिवारिक विवाद को देखते हुए कोर्ट ने मामले को समझौता केंद्र स्थानांतरित कर दिया। समझौते की तारीख परवरुण तलवार हाजिर नहीं हुआ। उसकी पत्नी के वकील विष्णु बिहारी तिवारी ने कोर्ट को बताया कि याचिका पर वरुण के हस्ताक्षर नहीं है। खुद को वरुण का चाचा बताने वाले अविनाश शंकर का उससे कोई रिश्ता नहीं है। इस आपत्ति के बाद याची के अधिवक्ता घनश्याम दास ने याचिका वापस लेने की मांग की मगर अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है, जिसकी इजाजत नहीं दी जा सकती है। पैरोकार अविनाश शंकर और वरुण की पत्नी को महानिबंधक के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है।
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अमेरिका निवासी वरुण तलवार के नाम से हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई, जिसमें कानपुर के गोविंद नगर थाने में 22 नवंबर 2015 को दहेज उत्पीड़न के एक मुकदमे में गिरफ्तारी पर रोक की मांग की गई है। याचिका में पैरोकार अविनाश शंकर ने खुद को याची का चाचा बताते हुए हलफनामा दाखिल किया। याचिका पर न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति एसबी सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई की। पारिवारिक विवाद को देखते हुए कोर्ट ने मामले को समझौता केंद्र स्थानांतरित कर दिया। समझौते की तारीख परवरुण तलवार हाजिर नहीं हुआ। उसकी पत्नी के वकील विष्णु बिहारी तिवारी ने कोर्ट को बताया कि याचिका पर वरुण के हस्ताक्षर नहीं है। खुद को वरुण का चाचा बताने वाले अविनाश शंकर का उससे कोई रिश्ता नहीं है। इस आपत्ति के बाद याची के अधिवक्ता घनश्याम दास ने याचिका वापस लेने की मांग की मगर अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है, जिसकी इजाजत नहीं दी जा सकती है। पैरोकार अविनाश शंकर और वरुण की पत्नी को महानिबंधक के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है।
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