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कोर्स में बदलाव पर यूपी बोर्ड की बेरुखी, लाखों पर भारी

Fri, 24 Jun 2016 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Fri, 24 Jun 2016 01:31 AM IST
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Board up on the changes in the course of the harsh, heavy on millions
शिक्षा
संघ लोक सेवा आयोग और राज्यों के लोक सेवा आयोगों की ओर से प्रारंभिक परीक्षा में एप्टीट्यूड टेस्ट लागू किए जाने के बाद सबसे अधिक शिकार यूपी बोर्ड से पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राएं ही शामिल हैं। सीबीएसई एवं सीआईएससीई से पढ़ाई करने वाले छात्रों को अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करने का लाभ मिलता है। सीबीएसई एवं सीआईएससीई अपने पाठ्यक्रम में संघ लोक सेवा आयोग के बदलाव को ध्यान में रखकर संशोधन भी करते रहते हैं। वहीं दुनिया का सबसे बड़ा यूपी बोर्ड हर साल परीक्षा में शामिल होने वाले 60 से 65 लाख विद्यार्थियों के बारे में कुछ नहीं सोच रहा है।
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यूपी बोर्ड की ओर से अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को कम संख्या में मान्यता देना और पाठ्यक्रम को समय-समय पर रिवाइज नहीं करने के कारण यहां से परीक्षा पास करने वाले विद्यार्थी सिविल सेवा से बाहर होते जा रहे हैं। सीबीएसई एवं सीआईएससीई की ओर से जहां देश भर में प्रतिवर्ष सैकड़ों स्कूल खुल रहे हैं, वहीं यूपी बोर्ड की ओर से प्रतिवर्ष अंग्रेजी माध्यम के स्कूल गिनती के ही होते हैं।

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सी-सैट और अंग्रेजी के विरोध में आंदोलन चलाने वाले अधिकांश प्रतियोगी यूपी बोर्ड अथवा क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़े हैं। इन विद्यार्थियों की समस्या को ध्यान में रखकर यूपी बोर्ड अपनी ओर से कोई पहल नहीं कर रहा है जबकि इस दिशा में सीबीएसई एवं सीआईएससीई सी-सैट को ध्यान में रखकर अपने छात्रों के लिए नए बदलाव कर रहे हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो. एचके शर्मा कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में यूपी बोर्ड एवं हिन्दी पट्टी के छात्रों का सफलता मिले, इसके लिए पाठ्यक्रम में बदलाव के साथ यूपी बोर्ड को भी अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोलकर प्रतियोगिता की रेस में शामिल होना होगा। उन्होंने कहा कि बोर्ड के अधिकारियों को चाहिए कि वह संघ लोक सेवा आयोग एवं प्रदेश के लोक सेवा आयोगों के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर स्नातक एवं परास्नातक के कोर्स तैयार करें।

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बीबीएस इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या सीमा रानी श्रीवास्तव का कहना है कि हमें अपने बच्चों को सिविल सेवा की रेस में शामिल करने केलिए नए बदलावों को आत्मसात करना पड़ेगा। सिविल सेवा में पैटर्न में बदलाव को अबूझ पहेली न मानकर उनके अनुसार कुछ अतिरिक्त जानकारी के लिए बोर्ड के अधिकारी पहल करें।

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