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स्मारक नहीं बन सकी महामना जन्मस्थली
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Thu, 25 Dec 2014 01:41 AM IST
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इलाहाबाद। तमाम वायदों, संकल्पों के बीच, शिक्षा,संस्कृति के लिए अतुलनीय योगदान करने वाले महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की जन्मस्थली फिर उपेक्षित है। इसे राष्ट्रीय स्मारक बनाने की मुहिम का सवाल अनुत्तरित ही रह गया है। महामना इलाहाबाद के भारती भवन स्थित जिस घर में पैदा हुए थे, वहां राधाकृष्ण की अति प्राचीन सुंदर मूर्ति सहित रामचरित मानस और शंख अब भी है, जिसकी बड़ी श्रद्धा भक्ति से पूजा की जाती है। परिजनों ने उनकी धरोहर को सुरक्षित रखा है।
वर्षों से महामना के परिजनों और कई संस्थाओं की ओर से भारती भवन स्थित उनकी जन्मस्थली को राष्ट्रीय स्मारक बनाए जाने की मुहिम जारी है, पर सरकारी पहल के बिना अब तय यह काम अधूरा ही है। प्रदेश सरकार की टालमटोल के साथ सरकार के दफ्तरों में भी फाइलें धूल खा रही हैं। अपने महापुरुषों से प्रेरणा लेने और नई पीढ़ी को उनके जीवनमूल्यों से परिचित कराने की कोशिश सिर्फ कोरी कवायद ही रह गई है।
हालांकि महामना ने अपनी वसीयत में भारती भवन स्थित अपने आवास के नीचे का हिस्सा ठाकुर जी के नाम समर्पित कर दिया था, पर शेष मकान में कई अन्य दावेदार भी हैं। इनमें से सिर्फ दो परिवारों को छोड़कर बाकी सभी ने स्मारक के लिए अपना दावा छोड़ने की हामी भर दी है। इन परिवारों के रहने के लिए अन्यत्र व्यवस्था के बाद महामना की जन्मस्थली को स्मारक बनाए जाने की राह में आ रही अड़चनें दूर हो जाएंगी। महामना के चचेरे भाई के दो प्रपौत्रों विवेक मालवीय और आनंद मालवीय का परिवार वहां रहता है, जिनका कहना है कि आवास की व्यवस्था हो जाए तो यहां से चले जाएं।
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महामना के प्रपौत्र और उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय कहते हैं, कई वर्षो पूर्व प्रदेश के राज्यपाल मोतीलाल वोरा ने इलाहाबाद विकास प्राधिकरण को उन दोनों के लिए आवास की नि:शुल्क व्यवस्था कराए जाने का निर्देश दिया था, पर ऐसा करने से पहले एडीए ने अठारह लाख रुपये की मांग कर दी। सो मामला अधर में लटक गया। बीते दिनों महामना मालवीय की डेढ़ सौवीं जयंती मनाने के लिए बनी सेंट्रल कमेटी ने स्मारक के मामले को मंजूरी दे दी थी, बावजूद इसके इस बारे में अब तक कुछ नहीं हो सका।
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वर्षों से महामना के परिजनों और कई संस्थाओं की ओर से भारती भवन स्थित उनकी जन्मस्थली को राष्ट्रीय स्मारक बनाए जाने की मुहिम जारी है, पर सरकारी पहल के बिना अब तय यह काम अधूरा ही है। प्रदेश सरकार की टालमटोल के साथ सरकार के दफ्तरों में भी फाइलें धूल खा रही हैं। अपने महापुरुषों से प्रेरणा लेने और नई पीढ़ी को उनके जीवनमूल्यों से परिचित कराने की कोशिश सिर्फ कोरी कवायद ही रह गई है।
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हालांकि महामना ने अपनी वसीयत में भारती भवन स्थित अपने आवास के नीचे का हिस्सा ठाकुर जी के नाम समर्पित कर दिया था, पर शेष मकान में कई अन्य दावेदार भी हैं। इनमें से सिर्फ दो परिवारों को छोड़कर बाकी सभी ने स्मारक के लिए अपना दावा छोड़ने की हामी भर दी है। इन परिवारों के रहने के लिए अन्यत्र व्यवस्था के बाद महामना की जन्मस्थली को स्मारक बनाए जाने की राह में आ रही अड़चनें दूर हो जाएंगी। महामना के चचेरे भाई के दो प्रपौत्रों विवेक मालवीय और आनंद मालवीय का परिवार वहां रहता है, जिनका कहना है कि आवास की व्यवस्था हो जाए तो यहां से चले जाएं।
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महामना के प्रपौत्र और उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय कहते हैं, कई वर्षो पूर्व प्रदेश के राज्यपाल मोतीलाल वोरा ने इलाहाबाद विकास प्राधिकरण को उन दोनों के लिए आवास की नि:शुल्क व्यवस्था कराए जाने का निर्देश दिया था, पर ऐसा करने से पहले एडीए ने अठारह लाख रुपये की मांग कर दी। सो मामला अधर में लटक गया। बीते दिनों महामना मालवीय की डेढ़ सौवीं जयंती मनाने के लिए बनी सेंट्रल कमेटी ने स्मारक के मामले को मंजूरी दे दी थी, बावजूद इसके इस बारे में अब तक कुछ नहीं हो सका।