Prayagraj : महाकुंभ क्षेत्र में मेला प्राधिकरण के अस्थायी कार्यालय का हुआ भूमि पूजन, भूमि का आवंटन शीघ्र
मेला क्षेत्र में बाढ़ का पानी अब भी भरा है। इसकी वजह से मेला प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन की कोशिश थी कि भूमि एवं सुविधाओं के आवंटन आदि की प्रक्रिया पूरी करने के साथ नवंबर के पहले सप्ताह से मेले की बसावट शुरू कर दी जाए।
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महाकुंभ क्षेत्र में प्रयागराज मेला प्राधिकरण का अस्थायी कार्यालय जल्द ही चालू होगा। यह त्रिवेणी मार्ग पर बांध से उतरते ही बनेगा। इससे पहले मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने बृहस्पतिवार को भूमि पूजन किया। इसके 20 से 25 दिनों में पूरी तरह से संचालित होने की उम्मीद है। इसके बाद भूमि एवं सुविधाओं के आवंटन से संबंधित पर्चियां भी वहीं से बंटेंगी। साथ ही अन्य गतिविधियां भी संचालित होंगी।
मेला क्षेत्र में बाढ़ का पानी अब भी भरा है। इसकी वजह से मेला प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन की कोशिश थी कि भूमि एवं सुविधाओं के आवंटन आदि की प्रक्रिया पूरी करने के साथ नवंबर के पहले सप्ताह से मेले की बसावट शुरू कर दी जाए। इसके तहत 10 अक्तूबर से नई संस्थाओं के पंजीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जाने की योजना बनाई गई थी। इसी के साथ पुरानी संस्थाओं से भी सुविधाओं में बढ़ोतरी के लिए आवेदन लिए जाने की तैयारी थी, लेकिन मेला क्षेत्र में गंगा नदी का जल स्तर स्थिर है।
इसकी वजह से मेला क्षेत्र में सभी काम ठप हैं। साथ ही बसावट शुरू नहीं हो पाई है। इसी के साथ भूमि एवं सुविधाओं के आवंटन की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो पा रही। मेलाधिकारी विजय किरन आनंद का कहना है कि भूमि एवं सुविधाओं के आवंटन की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। बाढ़ का पानी निकलते ही मैनपॉवर एवं संसाधन बढ़ाकर काम शुरू कर दिए जाएंगे।
इस बार नई संस्थाओं का पंजीकरण, पुरानी संस्थाओं की सुविधाओं में बढ़ोतरी से संबंधित आवेदन ऑनलाइन लिए जाएंगे। भूमि एवं सुविधाओं के आवंटन की पूरी प्रक्रिया भी ऑनलाइन कर दी गई है, लेकिन इससे संबंधित पर्चियां मेला प्राधिकरण के अस्थायी कार्यालय से वितरित की जाएंगी।
छोटी-बड़ी धाराओं को मिला निकाली जाएगी मुख्य धारा
शास्त्री ब्रिज से संगम नोज के बीच सिर्फ मुख्य धारा निकलेगी। छोटी-छोटी धाराओं को मिलाकर मुख्य धारा निकाली जाएगी। इसके लिए ड्रेजिंग का काम 16 अक्तूबर से शुरू करने की तैयारी है। गंगा और यमुना का संगम स्थल दाहिने किनारे की तरफ करीब 200 से 500 मीटर तक शिफ्ट हो गया है। इसके अलावा कटान की समस्या भी बढ़ गई है। इसकी वजह से कुंभ-2019 की तुलना में महाकुंभ-2025 में सर्कुलेटिंग एरिया में 60 फीसदी तक की कमी हो गई है, जबकि इस बार स्नानार्थियों की संख्या दोगुना होने की उम्मीद है।
इसे देखते हुए अब संगम नोज का सर्कुलेटिंग एरिया बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत गंगा नदी के सभी छोटी-बड़ी धाराओं को मिलाकर एक मुख्य धारा की योजना बनाई गई है।
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता रमेश कुमार सिंह ने बताया कि इसके लिए शास्त्री ब्रिज से संगम नोज तक ड्रेजिंग कराई जाएगी। संगम नोज तथा आसपास गंगा में कटान रोकने के लिए खास तरह के जियो बैग का इस्तेमाल किया जाएगा।
अधीक्षण अभियंता ने बताया कि अभी कई तरह की स्वीकृतियां शेष हैं। इसकी प्रक्रिया पूरी करने तथा मशीनें मंगाने के बाद 16 अक्तूबर से ड्रेजिंग शुरू करने की तैयारी है। उन्होंने बताया कि गंगा का मुख्य चैनल बनाने में 50 से 60 दिन लगेंगे।