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आठवीं अनुसूची में शामिल हो भोजपुरी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 10 Apr 2017 02:36 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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दिलों के बीच दूरियां कम करने और आपसी मिठास घोलने वाली भोजपुरी को नए मुकाम तक पहुंचाने के लिए संगमनगरी संकल्पभूमि बनी। संगमनगरी में पहली बार आयोजित भोजपुरी महोत्सव में देश-दुनिया से जुटे भोजपुरी भाषियों ने एकजुटता व्यक्त करते हुए भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने का संकल्प लिया।
सांस्कृतिक केंद्र प्रेक्षागृह में ‘भोजपुरी हमार मांई, ओकर सम्मान अउर हमार कर्तव्य’ के तहत भोजपुरी भाषियों की ओर से चर्चा के बाद मुख्यमंत्री को संबोधित पांच सूत्री प्रस्ताव पारित किया गया। इसके मुताबिक भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए प्रदेश सरकार प्रस्ताव पारित करके केंद्र सरकार को भेजे। चर्चा में ओमान के मुहम्मद इरशाद, सऊदी अरब में पुरबिया मंच के संस्थापक कृष्ण प्रताप सिंह सहित अनेक विशिष्टजनों ने भोजपुरी की खूबियों के साथ इसके विकास की राह में आ रही दिक्कतों को दूर करने के सुझाव दिए।
संचालक डॉ.श्लेष गौतम ने कहा, भोजपुरी भारतीय संस्कृति और सामाजिक एकता की धुरी है। समरसता का सेतु है भोजपुरी। उन्होंने सुनाया, ‘घरे दुआरे साँझ-सबेरे, पूछत बाड़िन माई,कब अच्छा दिन आई बबुआ, कब अच्छा दिन आई।’ दूसरे चरण में सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत भोजपुरी कलाकारों मदन राय, पारुल नंदा, दीपक त्रिपाठी आदि ने बहुरंगी प्रस्तुतियों के तहत सुरों से मिठास घोली।
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इस दौरान नामचीन हस्तियों को ‘भोजपुरी भगीरथ सम्मान’ से नवाजा गया। दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। महाराष्ट्र् के उत्तर भारतीय संघ के अध्यक्ष व भाजपा के महामंत्री अमरजीत मिश्रा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता और संयोजक अजीत सिंह ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में रोहतास के प्रो.गुरुचरण सिंह, महाराष्ट्र केपंकज गांधी जायसवाल, संगीत नाटक अकादमी की नीतू कुमारी नूतन, एमएन झा, केके राय, अजीत प्रताप सिंह, रतन दीक्षित सहित अनेक विशिष्टजन मौजूद थे।
00 प्रस्ताव के मुख्य बिंदु
0 उत्तर प्रदेश में भोजपुरी को द्वितीय राजभाषा के रूप में मान्यता दी जाए।
0 उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा आयोग की परीक्षाओं में भोजपुरी भाषा को शामिल किए जाए।
0 भोजपुरी अकादमी को पूर्ण रूप से सक्रिय किया जाए।
0 विद्यालयों, महाविद्यालयों में आरंभिक कक्षा से लेकर स्नातकोत्तर कक्षा तक भोजपुरी को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।
0 भोजपुरी पत्र-पत्रिकाओं के विकास सहित भोजपुरी साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी स्तर पर अनुदान की व्यवस्था की जाए।
00
फोटो 52 सहित
संवैधानिक दर्जा मिलने में अब बहुत देर नहीं है। भोजपुरी की ताकत उसकी संस्कृति और उसके लोग हैं।
0 मोहम्मद इरशाद, ओमान
00
फोटो 53 सहित
भोजपुरी आज अंतरराष्ट्रीय पहचान रखती है। देश-विदेश में भोजपुरी का मतलब भारत ही है।
0 कृष्ण प्रताप सिंह, दुबई
0 भाजपा नेता दयाशंकर सिंह ने कहा, अफसर-मंत्री जाग रहे, जनता चैन की नींद सो रही
इलाहाबाद। वरिष्ठ भाजपा नेता दयाशंकर सिंह ने पुरजोर तरीके से कहा है कि भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। इस राह में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए रोडमैप तैयार करके मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक अपनी बात पहुंचाई जाएगी। उम्मीद है कि भोजपुरी भाषियों की एकजुटता से इस काम में सफलता मिलेगी।
भोजपुरी महोत्सव में शामिल होने देर रात पहुंचे दयाशंकर सिंह ने ‘अमर उजाला’ से खास मुलाकात में कहा, सत्ता तक पैठ और भोजपुरी भाषियों के बीच एकजुटता न होने से अब तक भोजपुरी को अपेक्षित सम्मान नहीं मिल पा रहा था, अब मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री से लेकर देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग भोजपुरी क्षेत्रों से ही हैं। ऐसे में उम्मीद है कि भोजपुरी समाज की अरसे से चली आ रही मांग पूरी होगी। गंगा-जमुनी संस्कृति के केंद्र में भी भोजपुरी ही है।
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सांस्कृतिक केंद्र प्रेक्षागृह में ‘भोजपुरी हमार मांई, ओकर सम्मान अउर हमार कर्तव्य’ के तहत भोजपुरी भाषियों की ओर से चर्चा के बाद मुख्यमंत्री को संबोधित पांच सूत्री प्रस्ताव पारित किया गया। इसके मुताबिक भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए प्रदेश सरकार प्रस्ताव पारित करके केंद्र सरकार को भेजे। चर्चा में ओमान के मुहम्मद इरशाद, सऊदी अरब में पुरबिया मंच के संस्थापक कृष्ण प्रताप सिंह सहित अनेक विशिष्टजनों ने भोजपुरी की खूबियों के साथ इसके विकास की राह में आ रही दिक्कतों को दूर करने के सुझाव दिए।
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संचालक डॉ.श्लेष गौतम ने कहा, भोजपुरी भारतीय संस्कृति और सामाजिक एकता की धुरी है। समरसता का सेतु है भोजपुरी। उन्होंने सुनाया, ‘घरे दुआरे साँझ-सबेरे, पूछत बाड़िन माई,कब अच्छा दिन आई बबुआ, कब अच्छा दिन आई।’ दूसरे चरण में सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत भोजपुरी कलाकारों मदन राय, पारुल नंदा, दीपक त्रिपाठी आदि ने बहुरंगी प्रस्तुतियों के तहत सुरों से मिठास घोली।
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इस दौरान नामचीन हस्तियों को ‘भोजपुरी भगीरथ सम्मान’ से नवाजा गया। दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। महाराष्ट्र् के उत्तर भारतीय संघ के अध्यक्ष व भाजपा के महामंत्री अमरजीत मिश्रा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता और संयोजक अजीत सिंह ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में रोहतास के प्रो.गुरुचरण सिंह, महाराष्ट्र केपंकज गांधी जायसवाल, संगीत नाटक अकादमी की नीतू कुमारी नूतन, एमएन झा, केके राय, अजीत प्रताप सिंह, रतन दीक्षित सहित अनेक विशिष्टजन मौजूद थे।
00 प्रस्ताव के मुख्य बिंदु
0 उत्तर प्रदेश में भोजपुरी को द्वितीय राजभाषा के रूप में मान्यता दी जाए।
0 उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा आयोग की परीक्षाओं में भोजपुरी भाषा को शामिल किए जाए।
0 भोजपुरी अकादमी को पूर्ण रूप से सक्रिय किया जाए।
0 विद्यालयों, महाविद्यालयों में आरंभिक कक्षा से लेकर स्नातकोत्तर कक्षा तक भोजपुरी को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।
0 भोजपुरी पत्र-पत्रिकाओं के विकास सहित भोजपुरी साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी स्तर पर अनुदान की व्यवस्था की जाए।
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फोटो 52 सहित
संवैधानिक दर्जा मिलने में अब बहुत देर नहीं है। भोजपुरी की ताकत उसकी संस्कृति और उसके लोग हैं।
0 मोहम्मद इरशाद, ओमान
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फोटो 53 सहित
भोजपुरी आज अंतरराष्ट्रीय पहचान रखती है। देश-विदेश में भोजपुरी का मतलब भारत ही है।
0 कृष्ण प्रताप सिंह, दुबई
0 भाजपा नेता दयाशंकर सिंह ने कहा, अफसर-मंत्री जाग रहे, जनता चैन की नींद सो रही
इलाहाबाद। वरिष्ठ भाजपा नेता दयाशंकर सिंह ने पुरजोर तरीके से कहा है कि भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। इस राह में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए रोडमैप तैयार करके मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक अपनी बात पहुंचाई जाएगी। उम्मीद है कि भोजपुरी भाषियों की एकजुटता से इस काम में सफलता मिलेगी।
भोजपुरी महोत्सव में शामिल होने देर रात पहुंचे दयाशंकर सिंह ने ‘अमर उजाला’ से खास मुलाकात में कहा, सत्ता तक पैठ और भोजपुरी भाषियों के बीच एकजुटता न होने से अब तक भोजपुरी को अपेक्षित सम्मान नहीं मिल पा रहा था, अब मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री से लेकर देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग भोजपुरी क्षेत्रों से ही हैं। ऐसे में उम्मीद है कि भोजपुरी समाज की अरसे से चली आ रही मांग पूरी होगी। गंगा-जमुनी संस्कृति के केंद्र में भी भोजपुरी ही है।