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माई के दरबार में झुका सिर, लगाया जयकारा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 23 Sep 2017 01:53 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन शुक्रवार को शक्तिपीठों में देवी के ब्रह्मचारिणी स्वरूप का पूजन अर्चन किया गया। दरबार में भक्तों ने सिर झुकाया और जोर-जोर जयकारे लगाए। मां के शृंगार दर्शन के लिए भी लोगों का तांता लगा रहा। वहीं शतचंडी पाठ, दुर्गा सप्तशती पाठ जैसे अनुष्ठान भी हुए। मंगला आरती के बाद पूजन, दर्शन को श्रद्धालुओं के आने का क्रम आरंभ हुआ जो देर रात तक चलता रहा।
मीरापुर स्थित सिद्धपीठ ललिता देवी मंदिर में देवी के ब्रह्मचारिणी स्वरूप का विधिविधान से पूजन अर्चन हुआ। दोपहर बाद महिलाओं ने भजनों के माध्यम से त्रिपुर सुंदरी ललिता देवी की महिमा बखानी। बहुरंगी फूलों, स्वर्णाभूषणों से शृंगार किया गया। मंदिर परिसर में शतचंडी महायज्ञ, दुर्गा सप्तशती पाठ किया गया। पूजन, शृंगार दर्शन और त्रिकाल आरती को देर रात तक जयकारों के बीच श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भोग प्रसाद के लिए भी बड़ी संख्या में लोग जुटे।
चौक गंगादास स्थित मां खेमामाई मंदिर में देवी का नवदुुर्गा स्वरूप में शृंगार हुआ तो देवी गीतों की गूंज भी रही। सिविल लाइंस रोडवेज के सामने स्थित सिद्धेश्वरी गुप्त महापीठ में पीठाधीश्वर आचार्य कुशमुनि की देखरेख में अनुष्ठान हुए। वहीं मुट्ठीगंज कालीबाड़ी, कर्नलगंज कालीबाड़ी, कटरा कालीबाड़ी, सिविल लाइंस हनुमत निकेतन, हाईकोर्ट हनुमान मंदिर की देवी दुर्गा, हाईकोर्ट पानी टंकी अष्टभुजी मंदिर, समिया माई मंदिर सहित विभिन्न देवी मंदिरों में आरती, अनुष्ठान जारी रहा।
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अलोपीबाग स्थित सिद्धपीठ देवी अलोपीशंकरी में निशान चढ़ाने को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। सुबह से पूजन का शुरू हुआ सिलसिला देर रात तक चला। जयकारों के बीच महिलाओं में देवी का पालना झूने की होड़ सी लगी रही। महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामसेवक गिरि की देखरेख में मंदिर परिसर में खास अनुष्ठान भी किए गए। आचार्यों ने दुर्गा सप्तशती का पाठ हवन भी किया। बच्चों के संस्कार को भी श्रद्धालु आए। मुंडन, छेदन कराने के बाद देवी को कढ़ाई यानी मंदिर परिसर में ही हलवा पूड़ी बनाकर चढ़ाई गई। शृंगार आरती में शामिल होने के लिए लोगों का तांता लगा। जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा।
सिद्धपीठ कल्याणी देवी मंदिर में देवी का ब्रह्मचारिणी स्वरूप में शृंगार किया गया। अलग-अलग कतारों में महिलाओं, पुरुषों ने जयकारे लगाते हुए दर्शन किया। शाम से ही शृंगार दर्शन को भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। हाथ में कमंडल और बैजंती माला, बैल पर सवार होकर कल्याणी ने दर्शन दिया। मंदिर के बाहर सजावटी सामानों तथा बच्चों के खेल खिलौनों की दुकानें लगीं। अध्यक्ष सुशील पाठक की देखरेख में परिसर में विभिन्न संस्कार भी हुए।
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मीरापुर स्थित सिद्धपीठ ललिता देवी मंदिर में देवी के ब्रह्मचारिणी स्वरूप का विधिविधान से पूजन अर्चन हुआ। दोपहर बाद महिलाओं ने भजनों के माध्यम से त्रिपुर सुंदरी ललिता देवी की महिमा बखानी। बहुरंगी फूलों, स्वर्णाभूषणों से शृंगार किया गया। मंदिर परिसर में शतचंडी महायज्ञ, दुर्गा सप्तशती पाठ किया गया। पूजन, शृंगार दर्शन और त्रिकाल आरती को देर रात तक जयकारों के बीच श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भोग प्रसाद के लिए भी बड़ी संख्या में लोग जुटे।
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चौक गंगादास स्थित मां खेमामाई मंदिर में देवी का नवदुुर्गा स्वरूप में शृंगार हुआ तो देवी गीतों की गूंज भी रही। सिविल लाइंस रोडवेज के सामने स्थित सिद्धेश्वरी गुप्त महापीठ में पीठाधीश्वर आचार्य कुशमुनि की देखरेख में अनुष्ठान हुए। वहीं मुट्ठीगंज कालीबाड़ी, कर्नलगंज कालीबाड़ी, कटरा कालीबाड़ी, सिविल लाइंस हनुमत निकेतन, हाईकोर्ट हनुमान मंदिर की देवी दुर्गा, हाईकोर्ट पानी टंकी अष्टभुजी मंदिर, समिया माई मंदिर सहित विभिन्न देवी मंदिरों में आरती, अनुष्ठान जारी रहा।
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अलोपीबाग स्थित सिद्धपीठ देवी अलोपीशंकरी में निशान चढ़ाने को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। सुबह से पूजन का शुरू हुआ सिलसिला देर रात तक चला। जयकारों के बीच महिलाओं में देवी का पालना झूने की होड़ सी लगी रही। महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामसेवक गिरि की देखरेख में मंदिर परिसर में खास अनुष्ठान भी किए गए। आचार्यों ने दुर्गा सप्तशती का पाठ हवन भी किया। बच्चों के संस्कार को भी श्रद्धालु आए। मुंडन, छेदन कराने के बाद देवी को कढ़ाई यानी मंदिर परिसर में ही हलवा पूड़ी बनाकर चढ़ाई गई। शृंगार आरती में शामिल होने के लिए लोगों का तांता लगा। जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा।
सिद्धपीठ कल्याणी देवी मंदिर में देवी का ब्रह्मचारिणी स्वरूप में शृंगार किया गया। अलग-अलग कतारों में महिलाओं, पुरुषों ने जयकारे लगाते हुए दर्शन किया। शाम से ही शृंगार दर्शन को भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। हाथ में कमंडल और बैजंती माला, बैल पर सवार होकर कल्याणी ने दर्शन दिया। मंदिर के बाहर सजावटी सामानों तथा बच्चों के खेल खिलौनों की दुकानें लगीं। अध्यक्ष सुशील पाठक की देखरेख में परिसर में विभिन्न संस्कार भी हुए।