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बार कौंसिल चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर रोक
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 02 Dec 2016 01:16 AM IST
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चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
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बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अनिल प्रताप सिंह के खिलाफ पारित अविश्वास प्रस्ताव पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। अविश्वास प्रस्ताव के तहत पारित सभी अन्य आदेशों पर भी रोक रहेगी। कोर्ट ने अविश्वास प्रस्ताव की पत्रावली और कौंसिल का जवाब 48 घंटे में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई छह दिसंबर को होगी।
अध्यक्ष अनिल प्रताप सिंह ने अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। उनके अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने तर्क दिया कि बार कौंसिल में अविश्वास प्रस्ताव का कोई प्रावधान नहीं है। एडवोकेट्स एक्ट में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इसके अलावा अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उपाध्यक्ष की मांग पर बैठक बुला ली गई और 26 नवंबर को 15 सदस्यों ने हस्ताक्षर करके अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया। उनके स्थान पर उपाध्यक्ष दरवेश सिंह को कार्यवाहक अध्यक्ष बना दिया गया।
कोर्ट ने बार कौंसिल से जानना चाहा है कि क्या अधिवक्ता अधिनियम और बार कौंसिल के बाईलॉज में अविश्वास प्रस्ताव का कोई प्रावधान है और क्या प्रस्ताव लाने में प्रक्रिया का पालन किया गया है। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि जिस सभा ने अध्यक्ष का चुनाव किया, उसी सभा ने अविश्वास प्रस्ताव लाकर उसे पद से हटाने में प्रक्रिया का पालन नहीं किया है।
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अध्यक्ष अनिल प्रताप सिंह ने अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। उनके अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने तर्क दिया कि बार कौंसिल में अविश्वास प्रस्ताव का कोई प्रावधान नहीं है। एडवोकेट्स एक्ट में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इसके अलावा अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उपाध्यक्ष की मांग पर बैठक बुला ली गई और 26 नवंबर को 15 सदस्यों ने हस्ताक्षर करके अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया। उनके स्थान पर उपाध्यक्ष दरवेश सिंह को कार्यवाहक अध्यक्ष बना दिया गया।
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कोर्ट ने बार कौंसिल से जानना चाहा है कि क्या अधिवक्ता अधिनियम और बार कौंसिल के बाईलॉज में अविश्वास प्रस्ताव का कोई प्रावधान है और क्या प्रस्ताव लाने में प्रक्रिया का पालन किया गया है। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि जिस सभा ने अध्यक्ष का चुनाव किया, उसी सभा ने अविश्वास प्रस्ताव लाकर उसे पद से हटाने में प्रक्रिया का पालन नहीं किया है।
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