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Court : झांसी की सिमराहा सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी की जीत की घोषणा पर रोक, भाजपा पार्षद को भी राहत नहीं

Thu, 14 Aug 2025 08:49 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 14 Aug 2025 08:49 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झांसी नगर निगम के वार्ड-24 सिमराहा सीट से जीते भाजपा पार्षद अंकित सहारिया की जगह लालता प्रसाद को विजयी घोषित करने वाले अपर जिला जज के आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही लालता प्रसाद को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

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Ban on declaration of victory of independent candidate on Simraha seat of Jhansi
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झांसी नगर निगम के वार्ड-24 सिमराहा सीट से जीते भाजपा पार्षद अंकित सहारिया की जगह लालता प्रसाद को विजयी घोषित करने वाले अपर जिला जज के आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही लालता प्रसाद को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

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यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की अदालत ने अंकित सहारिया की ओर से अपर जिला जज के फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर दिया है। 2023 में नगर निगम चुनाव में वार्ड-24 अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित था। खुद को आदिवासी बताते हुए अंकित सहारिया भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते थे। अंकित को 2482 वोट मिले थे जबकि दूसरे नंबर पर रहे निर्दलीय उम्मीदवार लालता प्रसाद को 1353 वोट मिले थे।

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लालता प्रसाद ने अंकित को पिछड़ा वर्ग का बताते हुए उनके खिलाफ जिला अदालत में चुनाव याचिका दाखिल की थी। 25 जुलाई को अपर जिला जज की अदालत ने इस अंकित के चुनाव को रद्द करते हुए लालता प्रसाद को विजेता घोषित कर दिया। कहा कि अंकित को राम कुंवर के परिवार में गोद लिया गया है। केवल इस आधार पर वह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने की अपनी पात्रता का दावा नहीं कर सकते है। लालता प्रसाद दूसरे नंबर पर रहे। लिहाजा, उन्हें विजेता घोषित किया जाता है। इसके खिलाफ अंकित ने हाईकोर्ट का रुख किया।

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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि अंकित को अनुसूचित जाति के परिवार ने गोद लिया था। 2008 में अपर सिविल जज (जूनियर डिविजन) ने अंकित की जाति आदिवासी घोषित करते हुए डिक्री पारित किया था। इसके बाद 2011 में तहसीलदार ने अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी कर दिया। इसी आधार पर उन्होंने चुनाव लड़ा और जीता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी

प्रथम दृष्टया अपीलकर्ता अंकित की ओर से अनुसूचित जाति के परिवार में गोद लेने के आधार पर आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने का का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन लालता प्रसाद को विजेता घोषित करना उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 72 के प्राविधानों के विपरीत है। 

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