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High Court : फर्जी वरासत दर्ज कराने के आरोपी लेखपाल के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक, सरकार से जबाव तलब

Thu, 26 Dec 2024 04:52 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 26 Dec 2024 04:52 PM IST
सार

यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी की अदालत ने आगरा की किरावली तहसील के सेवानिवृत्त लेखपाल कृष्ण पाल सिंह की याचिका पर अधिवक्ता दिनेश मिश्र को सुनकर दिया है। याची ने सीजेएम आगरा की अदालत मेें 14 साल से लंबित आपराधिक कार्यवाही में जारी गैर जमानती वारंट व कुर्की के आदेश को चुनौती दी थी।

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Ban on criminal proceedings against accountant accused of registering fake inheritance
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी वरासत दर्ज कराने के आरोपी सेवानिवृत्त लेखपाल के खिलाफ जारी गैरजमानती वारंट, कुर्की व आपराधिक कार्यवाही पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है। साथ ही सरकार से दो हफ्ते में जबाव तलब किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी की अदालत ने आगरा की किरावली तहसील के सेवानिवृत्त लेखपाल कृष्ण पाल सिंह की याचिका पर अधिवक्ता दिनेश मिश्र को सुनकर दिया है। याची ने सीजेएम आगरा की अदालत मेें 14 साल से लंबित आपराधिक कार्यवाही में जारी गैर जमानती वारंट व कुर्की के आदेश को चुनौती दी थी।

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मामला आगरा की फतेहपुर सिकरी थाना क्षेत्र का है। आरोप है कि 27 साल पहले 1997 में कृष्ण पाल सिंह ने सीकरी गांव के सफात हुसैन को मृत दिखा उनके दो बेटाें के नाम बतौर वारिस दर्ज करने की आख्या राजस्व निरीक्षक को दी थी। इसके आधार पर सफात के बेटों को का नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज कर दिया गया। हलांकि, दो वर्ष बाद पिता ने अर्जी दाखिल कर बताया कि वह जिंदा हैं। उनके बेटों का नाम गलत दर्ज किया गया है।
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इस पर जांच की गई और पिता का नाम राजस्व अभिलेख में दुरुस्त कर दिया गया। याची के खिलाफ तहसीलदार की शिकायत पर विभागीय कार्यवाही में उसकी एक स्थायी वार्षिक वेतन वृद्धि रोक दी गई। इसके बाद तहसीलदार ने 2000 में लेखपाल व सफात हुसैन के दो बेटों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी।
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विवेचना में पुलिस ने बेटों के पक्ष में अंतिम रिपोर्ट व लेखपाल के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया। इस बीच वर्ष 2008 में याची सेवानिवृत्त हो गया। इस दौरान सीजेएम की अदालत ने याची को कई समन भेजा, जो कभी तामील नहीं हुआ। 2024 में उसे जानकारी मिली कि उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट व कुर्की का आदेश जारी हो चुका है। इसके खिलाफ 80 वर्षीय याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने संपूर्ण आपराधिक कार्यवाही पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा सरकार से दो हफ्ते में जवाबी हलफनामा तलब किया है।

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