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बकरीद करीब सज गया बकरे का बाजार
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 23 Sep 2015 01:15 AM IST
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लालगोपालगंज (ब्यूरो)। ईदुल अजहा करीब देख स्थानीय बकरा मंडी गुलजार होने लगी है। हालांकि बकरों पर महंगाई की छाया होने से अभी ग्राहक सिर्फ मंडी की नब्ज टटोल रहे हैं। अकीदतमंदों को भरवारी से आए जानवरों की खेप का इंतजार है। बाजार में औसत दर्जे के बकरों की कीमत दस हजार के करीब है।
ईदुल अजहा यानी बकरीद का त्योहार इस्लाम के एक जलीलुल कद्र पैगंबर हजरत इब्राहीम की याद में मनाया जाता है। रिवायतों में आता है कि अल्लाह के हुक्म से इब्राहीम ने अपने बेटे इस्माइल की गर्दन पर छुरी चला दिया था। तभी उनकी कुर्बानी कुबूल करते हुए जन्नत से एक दुंबा भेज दिया गया।
ईदुल अजहा शुक्रवार को मनाई जाएगी। स्थानीय बकरा मंडी जानवरों की भीड़ से परवान चढ़ने लगी है। बकरों पर महंगाई की मार होने से अभी ग्राहक सिर्फ मंडी का मिजाज समझ रहे हैं। एक ग्राहक ने बताया कि औसत दर्जे के बकरों की कीमत करीब दस हजार है। जबकि कौशांबी के भरवारी से जानवराें की खेप पहुंचने पर लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
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ईदुल अजहा यानी बकरीद का त्योहार इस्लाम के एक जलीलुल कद्र पैगंबर हजरत इब्राहीम की याद में मनाया जाता है। रिवायतों में आता है कि अल्लाह के हुक्म से इब्राहीम ने अपने बेटे इस्माइल की गर्दन पर छुरी चला दिया था। तभी उनकी कुर्बानी कुबूल करते हुए जन्नत से एक दुंबा भेज दिया गया।
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ईदुल अजहा शुक्रवार को मनाई जाएगी। स्थानीय बकरा मंडी जानवरों की भीड़ से परवान चढ़ने लगी है। बकरों पर महंगाई की मार होने से अभी ग्राहक सिर्फ मंडी का मिजाज समझ रहे हैं। एक ग्राहक ने बताया कि औसत दर्जे के बकरों की कीमत करीब दस हजार है। जबकि कौशांबी के भरवारी से जानवराें की खेप पहुंचने पर लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
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