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High Court: बुजुर्ग की हत्या में उम्रकैद पाए बेटे, बहू, पोते-पोती की जमानत मंजूर, फर्श पर गिरने से हुई थी मौत

Wed, 26 Jun 2024 12:14 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 26 Jun 2024 12:14 PM IST
सार

मामला गाजीपुर के जमनियां कोतवाली थानाक्षेत्र का है। बरुईन गांव के भृगु तिवारी ने बुजुर्ग पिता हरिहर तिवारी की हत्या आरोप अपने ही भाई, भाभी, भतीजे और विवाहित भतीजी पर लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। तहरीर में बताया कि 25 अप्रैल 2020 को उसके पिता हरिहर तिवारी बगल के हाते में गए थे।

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Bail granted to son, daughter-in-law, grandson who were sentenced to life imprisonment for the murder of an el
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संपत्ति विवाद में बुजुर्ग की हत्या में आजीवन कारावास की सजा पाए बेटे, बहू, पोते और पोती की जमानत मंजूर कर ली है। साथ ही 20-20 हजार रुपये के मिले अर्थदंड की आधी राशि पर भी रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति मो.अजहर हुसैन इदरीशी की खंड पीठ ने मृतक के बेटे भीष्मदत्त तिवारी, बहू रोशनीवती देवी, पौत्र विद्यासागर उर्फ गणेश तिवारी और पौत्री दीपू तिवारी उर्फ कुसुमलता की ओर से सजा के खिलाफ दाखिल अपील पर सुनवाई करते हुए दिया है।

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मामला गाजीपुर के जमनियां कोतवाली थानाक्षेत्र का है। बरुईन गांव के भृगु तिवारी ने बुजुर्ग पिता हरिहर तिवारी की हत्या आरोप अपने ही भाई, भाभी, भतीजे और विवाहित भतीजी पर लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। तहरीर में बताया कि 25 अप्रैल 2020 को उसके पिता हरिहर तिवारी बगल के हाते में गए थे।
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उसी समय उसके बड़े भाई भीष्म दत्त तिवारी ने अपने बेटे विद्यासागर उर्फ गणेश तिवारी, पत्नी रोशनावती देवी और बेटी दीपू तिवारी उर्फ कुसुमलता संग मिलकर पिता पर रॉड और लाठी से प्रहार करके गंभीर रूप से घायल कर दिया। घायलवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया था।

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विवेचना के बाद अदालत में प्रस्तुत आरोप पत्र के आधार पर ट्रायल चला। इस दौरान कुल दस गवाहों को पेश किया गया, जिसके बाद जिला जज की अदालत ने चारों को आजीवन कारावास के साथ प्रत्येक को 20-20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ चारों दाषियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

अपीलार्थियों के अधिवक्ता ने चिकित्सक के बयान पर भरोसा जताते हुए तर्क दिया कि बुजुर्ग की हत्या नहीं हुई थी, बल्कि फर्श पर गिरने से उन्हें चोट आई थी। इस वजह से वह कोमा में चले गए थे। इसकी वजह से उनकी मौत हुई है। कोर्ट ने मामले को विचारणीय मानते हुए चारों आरोपियों की जमानत मंजूर करते हुए मिली अर्थदंड की आधी राशि पर रोक लगा दी है। शेष राशि छह माह मेें अदा करनी होगी।

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