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High Court : नाबालिग से फर्जी आधार बनवाकर एग डोनेशन कराने की आरोपी की जमानत अर्जी खारिज
Wed, 25 Feb 2026 06:35 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 25 Feb 2026 06:35 PM IST
सार
जिला अदालत ने नाबालिग से फर्जी आधार बनवाकर एग डोनेशन कराने की आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी प्रथम दिनेश कुमार गौतम ने दिया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जिला अदालत ने नाबालिग से फर्जी आधार बनवाकर एग डोनेशन कराने की आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी प्रथम दिनेश कुमार गौतम ने दिया। सिविल लाइंस के कूपर रोड निवासी आरोपी सीमा भारती के खिलाफ फाफामऊ थाने में छह फरवरी 2026 का आपराधिक साजिश और अपहरण समेत कई गंभीर धाराओं में पीड़िता की मां ने मुकदमा दर्ज कराया था।
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आरोप लगाया है कि उसकी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाया गया। उसका धर्म परिवर्तन कराया गया और उसे एग डोनेशन के लिए मजबूर किया गया। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में फर्जी आधार कार्ड तैयार कराया गया। पैसों की लालच में नाबालिग से एग डोनेशन कराया गया।
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पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि वह शादी समारोह में वेटर का काम करती थी, जहां उसकी मुलाकात सह-अभियुक्ताओं से हुई। उन्हें एग डोनेशन के नाम पर एक सेंटर ले जाया गया, जहां इंजेक्शन देकर एग निकाले गए। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि कई अन्य नाबालिग के साथ भी ऐसा किया जाता था।
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एडीजीसी मृत्युंजय त्रिपाठी ने दलील दी कि प्रथम दृष्टया फर्जी दस्तावेज तैयार कर नाबालिग से एग डोनेशन कराने का अपराध साबित होता है, जो गंभीर प्रकृति का है। कोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता, प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्य और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को जमानत पर रिहा करने का पर्याप्त आधार नहीं है।