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मुखर : प्राथमिक शिक्षक भर्ती से बाहर होने पर बीएड अभ्यर्थियों ने छेड़ा अभियान

Mon, 14 Aug 2023 05:31 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 14 Aug 2023 05:31 PM IST
सार

युवा मंच अध्यक्ष अनिल सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार एवं एनसीटीई को संशोधित गजट जारी कर पुनर्विचार याचिका दाखिल करनी चाहिए। जिन लाखों अभ्यर्थियों ने एनसीटीई के गजट 28 जून 2018 के आधार पर बीएड की डिग्री हासिल की है, उन्हें सजा देना उचित नहीं है।

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B.Ed candidates launched campaign on being out of primary teacher recruitment
बीएड - फोटो : amar ujala

विस्तार

प्राथमिक शिक्षक भर्ती से बीएड अभ्यर्थियों को बाहर किए जाने का मुद्दा ट्विटर और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर छाया हुआ है। बीएड अभ्यर्थियों ने मांग की है कि उन्हें प्राइमरी शिक्षक भर्ती में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार एवं एनसीटीई संशोधित गजट लाए। रविवार को सलोरी में हुई संयुक्त युवा मोर्चा की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई।

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युवा मंच अध्यक्ष अनिल सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार एवं एनसीटीई को संशोधित गजट जारी कर पुनर्विचार याचिका दाखिल करनी चाहिए। जिन लाखों अभ्यर्थियों ने एनसीटीई के गजट 28 जून 2018 के आधार पर बीएड की डिग्री हासिल की है, उन्हें सजा देना उचित नहीं है। बीएड अभ्यर्थियों के शामिल होने के पूर्व 68500 प्राथमिक शिक्षक भर्ती में 27 हजार सीटें खाली रह गई थीं। कटऑफ 40/45 फीसदी अंक न लाने की वजह से ऐसा हुआ था।
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वहीं, बीएड शामिल होने के बाद 69000 शिक्षक भर्ती में 60/65 फीसदी अंक प्राप्त करने के बावजूद भी भारी संख्या में अभ्यर्थी मेरिट में न आने के कारण चयन से वंचित हो गए। स्पष्ट है कि बीएड अभ्यर्थियों के शामिल होने के बाद परिषदीय विद्यालयों को ज्यादा योग्य शिक्षक मिले। ऐसे में एनसीटीई के गजट में तकनीकी खामी के आधार पर बीएड अभ्यर्थियों को अपात्र कहना उचित नहीं है। सरकार को चाहिए कि बीएड एवं बीटीसी अभ्यर्थियों को आपस में न लड़ाए और सबको समान मौका दे। जो परीक्षा में सफल होगा, उसे नियुक्ति मिलेगी।

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इविवि के छात्रों का मुद्दा भी उठा


संयुक्त युवा मोर्चा ने इविवि में छात्रों पर हुई कार्रवाई पर क्षोभ व्यक्त किया। कहा गया कि छात्रों को वाजिब मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठाने की सजा दी गई और जेल भेजकर उनपर मुकदमे दर्ज किए गए। मांग की गई कि छात्रों का दमन बंद किया जाए। उन्हें तत्काल जेल से रिहा किया जाए और सभी पर दर्ज मुकदमे वापस हों। इस मौके पर राजेश सचान, रमेश चंद्रा, संगम कुमार, शिवेंद्र यादव, आलोक कुमार, अमित कुमार, नवीन पांडेय, श्रीराम, राजेश सरोज आदि मौजूद रहे।

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