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आजम खां को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 29 एफआईआर पर रोक
Wed, 25 Sep 2019 11:56 PM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 25 Sep 2019 11:56 PM IST
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सपा सांसद मोहम्मद आजम खां को राहत देते हुए उनके विरुद्ध दर्ज 27 मुकदमों में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। ये मुकदमे रामपुर के किसानों ने अजीमनगर थाने में दर्ज कराए हैं। आजम पर किसानों की जमीनें हड़पने का आरोप है। कोर्ट ने इस मामले में पूर्व सांसद जयाप्रदा और किसानों को नोटिस जारी किया है। राज्य सरकार और जयाप्रदा सहित अन्य विपक्षियों से याचिका पर जवाब मांगा गया है। याचिका की सुनवाई 24 अक्तूबर को होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्र तथा न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान की खंडपीठ ने मोहम्मद आजम खां और अन्य की याचिका पर दिया है। आजम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रवि किरण जैन, अधिवक्ता कमरुल हसन सिद्दीकी और सफ़दर काजमी ने बहस की, जबकि किसानों का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम ने रखा। सफदर काजमी ने बताया कि जौहर विश्वविद्यालय की जमीन को लेकर किसानों ने एफआईआर दर्ज कराई है। रामपुर से भाजपा प्रत्याशी रहीं जया प्रदा पर किसानों को उकसाकर प्राथमिकी दर्ज करवाने का आरोप लगाया गया है।
किसानों ने आजम खां पर जबरन जमीन लिखवा लेने और कब्जा कर लेने का आरोप लगाया है। याचिका में बदले की भावना से कार्यवाही करने का राज्य सरकार पर आरोप लगाया गया है। जब कि सरकार का कहना है कि किसानों ने एफआईआर दर्ज कराई है, जिससे उसका कोई सरोकार नहीं है।
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वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि किसानों से ली गई जमीनों में तीन चक का बैनामा ही नहीं हुआ है। किसानों को ऐसे चेक दिए गए जो भुनाए नहीं जा सके। कोर्ट ने इन सभी सवालों पर सुनवाई के लिए 24 अक्तूबर के तिथि नियत की है। तब तक आजम की गिरफ्तारी नहीं करने के लिए कहा है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्र तथा न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान की खंडपीठ ने मोहम्मद आजम खां और अन्य की याचिका पर दिया है। आजम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रवि किरण जैन, अधिवक्ता कमरुल हसन सिद्दीकी और सफ़दर काजमी ने बहस की, जबकि किसानों का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम ने रखा। सफदर काजमी ने बताया कि जौहर विश्वविद्यालय की जमीन को लेकर किसानों ने एफआईआर दर्ज कराई है। रामपुर से भाजपा प्रत्याशी रहीं जया प्रदा पर किसानों को उकसाकर प्राथमिकी दर्ज करवाने का आरोप लगाया गया है।
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किसानों ने आजम खां पर जबरन जमीन लिखवा लेने और कब्जा कर लेने का आरोप लगाया है। याचिका में बदले की भावना से कार्यवाही करने का राज्य सरकार पर आरोप लगाया गया है। जब कि सरकार का कहना है कि किसानों ने एफआईआर दर्ज कराई है, जिससे उसका कोई सरोकार नहीं है।
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वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि किसानों से ली गई जमीनों में तीन चक का बैनामा ही नहीं हुआ है। किसानों को ऐसे चेक दिए गए जो भुनाए नहीं जा सके। कोर्ट ने इन सभी सवालों पर सुनवाई के लिए 24 अक्तूबर के तिथि नियत की है। तब तक आजम की गिरफ्तारी नहीं करने के लिए कहा है।
याचिका में बदले की कार्रवाई करने का राज्य सरकार पर आरोप लगाया गया है। जबकि सरकार का कहना है कि किसानों ने एफआईआर दर्ज कराई है। जिससे सरकार का कोई सरोकार नहीं है।
इससे पहले, मंगलवार को किसानों की जमीन कब्जाने के मामलों में दर्ज मुकदमों की जांच कर रही एसआईटी (विशेष जांच दल) ने सांसद आजम खां को 27 नोटिस जारी किए थे।
एसआईटी ने आजम खां को नोटिस जारी कर इन मुकदमों के संबंध में 25 सितंबर तक अपना बयान दर्ज कराने को कहा था। आजम खां के घर पर किसी ने नोटिस को रिसीव नहीं किए तो इसे उनके घर के गेट पर चस्पा कर दिए गए। हालांकि, कुछ देर बाद ही नोटिस गेट से फाड़ दिए।
इससे पहले, मंगलवार को किसानों की जमीन कब्जाने के मामलों में दर्ज मुकदमों की जांच कर रही एसआईटी (विशेष जांच दल) ने सांसद आजम खां को 27 नोटिस जारी किए थे।
एसआईटी ने आजम खां को नोटिस जारी कर इन मुकदमों के संबंध में 25 सितंबर तक अपना बयान दर्ज कराने को कहा था। आजम खां के घर पर किसी ने नोटिस को रिसीव नहीं किए तो इसे उनके घर के गेट पर चस्पा कर दिए गए। हालांकि, कुछ देर बाद ही नोटिस गेट से फाड़ दिए।