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अयोध्या विस्फोट कांड में अजीज जेल से रिहा  

Thu, 20 Jun 2019 01:17 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 20 Jun 2019 01:17 AM IST
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Ayodhya released from Aziz prison in blast case
aziz - फोटो : प्रयागराज
अयोध्या विस्फोट कांड में बरी हुए जम्मू के मो. अजीज की 19 जून की शाम को रिहाई हो गई। वह जेल से बाहर बने गार्ड रूम में रुके हुए हैं। जेल पहुंचे उनके वकील ने जेल प्रशासन को बताया कि वह उन्हें हवाई जहाज से दिल्ली भेजेंगे। उनके साथ सुरक्षा भी रहेगी। दिल्ली से जम्मू दूसरी फ्लाइट से भेजा जाएगा। जिसके टिकट का इंतजाम उनके वकील शमशुल हसन की ओर से ही किया गया है। 
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वरिष्ठ जेल अधीक्षक हरिबक्श सिंह ने बताया कि मो. अजीज को शाम को जेल से रिहा कर दिया गया।

पहले कुछ देर तक उन्हें जेल के अंदर ही रखा गया था। वहां से उन्हें शाम को बाहर गार्ड रूम में शिफ्ट कर दिया गया है। वहां उनके खाने और बिस्तर की व्यवस्था कर दी गई है। एसपी प्रोटोकाल आशुतोष द्विवेदी ने सिक्योरिटी भेजने को कहा है। देर-सबेर जैसे ही सिक्योरिटी आ जाएगी, उन्हें बम्हरौली एयरपोर्ट के लिए रवाना कर दिया जाएगा। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि बम्हरौली से फ्लाइट से वह दिल्ली के लिए रवाना होंगे। टिकट मिल गया है, जिसका पूरा खर्चा उनके वकील शमशुल हसन उठाएंगे। जेल प्रशासन से उसका कोई लेना देना नहीं है। 
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Ayodhya released from Aziz prison in blast case
कैदी - फोटो : FILE PHOTO

अयोध्या के रामजन्म भूमि विस्फोट मामले में साक्ष्य के अभाव में बरी किए गए जम्मू के पुंछ जनपद के मेंडर थानांतर्गत बारीदार गांव निवासी मो. अजीज 19 जून की देर शाम केंद्रीय कारागार, नैनी से रिहा हो गए। फिलहाल वह जेल परिसर में ही बने गार्ड रूम में ठहरे हुए हैं। पुलिस सुरक्षा मिलने के बाद वह भोर में अपने घर जम्मू के लिए रवाना होंगे। जेल में मो. अजीज की डेढ़ दशक की जिंदगी गुजर चुकी है। उनकी जिंदगी जोश का दौर खत्म हो चुका है। अब सिर्फ जज्बात बचे हैं, जो गीली आंखों से स्पष्ट बयां हो रहे हैं। बेकसूर साबित होने के बाद आज मो. अजीज के दिलोदिमाग में कोई शिकवा शिकायत नहीं है। अगर कुछ है तो बस अल्लाताला पर वह अडिग विश्वास, जिसके बूते उन्होंने अब तक का सफर तय किया और आखिरकार बेदाग होकर अपने परिवार से मिलने जा रहे हैं। 

एक मामूली किसान मो. वसील के दो बेटों में बड़े मो. अजीज जम्मू में जल निगम के प्लंबर (मिस्त्री) के रूप में सरकारी मुलाजिम थे। ठीक ढंग से तारीख तो नहीं याद हैं लेकिन मेंडर थाने के एक सिपाही ने उनके वालिद मो. वसील से 2005 में संदेशा कहलाकर थाने पर बुलाया था। अगले दिन जब मो. अजीज थाने पहुंचे तो वहां उन्हें बताया गया कि उन्हें जम्मू जाना पड़ेगा। पूछने पर कुछ भी नहीं बताया गया। रात भर मेंडर थाने में रहने के बाद अगली सुबह उन्हें जम्मू भेज दिया गया। जहां अलग-अलग जगहों में करीब 21 दिन तक उनसे पूछताछ की गई। जहां उनसे सिर्फ सिम खरीदने के बारे में ही पूछा जाता रहा, जिसे वो लगातार नकारते रहे। उसके बावजूद 22 दिन उन्हें केंद्रीय कारागार नैनी भेज दिया गया।

यहां आने के बाद पता चला कि उनके साथ चार अन्य लोग भी अयोध्या विस्फोट प्रकरण में पकड़े गए हैं। मो. अजीज का दावा है कि उन चारों से इनका कभी कोई ताल्लुक नहीं था। जेल में सुनवाई का दौर शुरू हुआ। लगातार अदालतें लगती रहीं, जज बदलते रहे और फैसला लटकता रहा। जिसकी वजह से उनकी उम्मीदों पर हर बार पानी फिरता रहा, नतीजा 14 बरस का समय गुजर गया। पीठ और रीढ़ की हड्डी के दर्द से गुजर रहे मो. अजीज आज घर लौटकर अपनी पत्नी अनवर बी, दोनों बेटों जफर व जावेद तथा बेटी नाजिया बी के साथ जिंदगी बसर करना चाहते हैं। 19 जून की शाम जेल के बाहर आने के बाद उनकी आंखें गीली हैं, जुबां कंपकंपा रही है लेकिन, भरोसा अडिग है कि खुदा के दरवाजे पर देर भले हो पर अंधेर नहीं होता। वहीं आज उनके साथ हुआ है। वह जेल से बाहर गार्ड रूम में ढहरे हुए हैं। देर रात या भोर में पुलिस सुरक्षा आते ही वह जेल से चले जाएंगे और वहां जाकर फिर से नई जिंदगी शुरू करेंगे। उनकी नौकरी के चार साल बचे हैं। जेल में गुजारी जिंदगी के लिए भी वे विभाग से क्लेम करेंगे। 
कल तक आतंकी की नजर से देखे जाने वाले मो. अजीज के प्रति आज जेल प्रशासन का भी रवैया बदला-बदला नजर आया। जेल के लोगों ने उन्हें ससम्मान बाहर तख्ते पर बैठाया। शाम का खाना जेल में खिलाया गया। रात में चटाई और कंबल बिस्तर बिछाने के लिए दिए गए। बाहर बैठे सिपाहियों से जब उन्होंने बताया कि उनका सिर दर्द हो रहा है। चाय पीना चाहते हैं तो सिपाहियों ने पैसे देकर उन्हें चाय मंगाकर पिलाया। वह जेल प्रशासन के व्यवहार से खुश हैं।

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