गाइड लाइन बदलते ही अपात्रों में मची खलबली
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प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ देने के लिए चार माह से कवायद चल रही है। पात्रता चयन के लिए शासन ने वर्ष 2011 में कराई गई सामाजिक आर्थिक जनगणना को आधार माना। इसमें ऊपर से नीचे की ओर आने वाले नामों को पात्रता के आधार पर आवास मुहैया कराया जाना था। जनगणना सूची में नाम देख अपात्रों ने ग्राम प्रधानों और पंचायत सेक्रेट्रियों से साठगांठ करते हुए योजना का लाभ लेना चाहा। इसके लिए उनके द्वारा ग्राम सभा के जिम्मेदारों को मोटी रकम भी मुहैया करा दी गई। इधर सूची जब मुख्यालय पहुंची तो उसकी छानबीन शुरू कराई गई। जांच में 60 फीसदी लोगों के नाम योजना के लिए अपात्र मिले।
इस पर अफसरों ने गंभीरता दिखाते हुए पात्रता चयन का मानक निर्धारित कर दिया। इस बार सामाजिक आर्थिक जनगणना सूची में नाम होना आवास की पात्रता का आधार नहीं रखा गया। इसमें जो पात्र हैं उनकी सूची अलग से बनवाई जाने लगी। दो गांवों की सूची का प्रकाशन तो हुआ तो अपना नाम बाहर देख रुपया देने वालों के होश उड़ गए। अब वह ग्राम प्रधानों और सेक्रेट्रियों को दी गई रकम वापस मांगने लगे हैं। उधर ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी वसूली गई धनराशि को लौटाने से यह कहकर मना कर रहे हैं अभी और आवास आने हैं। उन्हें आवास दिलाया जाएगा। बहरहाल पात्रता चयन की नई तकनीक से रुपए के दम पर आवास लेने वालों के मंसूबों पर पानी फिर गया है।
प्रधानमंत्री आवास की पात्रता सूची नई बन रही है। इसमें धन बल के चलते आवास लेने वालों के नाम गायब हैं। सूची में नाम न होने पर प्रधान और सेक्रेटरी को धन देने वालों में हड़कंप मच गया है। अब वह प्रधान और सेक्रेटरी को दी धनराशि वापस मांग रहे हैं। वसूली गई मोटी रकम देने से ग्राम सभा के जिम्मेदार पूरी तरह से इनकार करते हुए आवास दिलाने का आश्वासन दे रहे हैं। ऐसे में आवास आवंटन शुरू होते ही प्रधानों व पंचायत सचिवों को रकम देने वाले शिकायत करने के लिए अफसरों की चौखट तक पहुंचना शुरू कर देंगे। वह पात्र होने के साथ आवास न मिलने का रोना तो रोएंगी ही धनराशि वापस कराने की भी मांग करेंगे।
प्रधानमंत्री आवास लक्ष्य के अनुरूप पात्रों को दिया जाना है। इसकी सूची में अपात्रों के नाम न हो इसकी पूरी कोशिश की गई है। इसके बावजूद यदि किसी अपात्र का नाम सूची में है तो उसे काटते हुए आगे के क्रम में आने वाले पात्र को आवास मुहैया कराया जा रहा है। अपात्र को आवास दिया गया तो रिकवरी के साथ-साथ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
राजेश कुमार मिश्र, पीडी कौशाम्बी