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जीत पर छात्रसंघ भवन पर मना जश्न, निकाला जुलूस
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 10 May 2016 02:21 AM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के लिए सोमवार जश्न मनाने का दिन रहा। हालांकि ऑफलाइन प्रवेश परीक्षा का विकल्प अभी मिला नहीं है लेकिन मानव संसाधन विकास मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद इसकी उम्मीद प्रबल हो गई है। मंगलवार को इस आशय का पत्र मिलने की भी उम्मीद है। छात्र-छात्राओं ने इसे सामूहिक जीत बताते हुए जमकर जश्न मनाया। ढोल-नगाडे़ के साथ उन्होंने परिसर में जुलूस भी निकाला।
शिक्षकों से लिखित आश्वासन मिलने के बाद शिक्षकों के अलावा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधाकांत ओझा, भाजपा नेता रामरक्षा द्विवेदी आदि ने जूस पिलाकर अनशन तोड़वाया। इसके बाद छात्रों ने अनशन पर बैठे नेताओं को कंधे पर बैठाकर परिसर में घुमाया। इसी दौरान ढोल भी पहुंच गया और वे जमकर झूमे। इस दौरान सभी दलों के वरिष्ठ नेता भी पहुंचे थे और इसे छात्रों जीत बताई। छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह का कहना था कि यह छात्रों की जीत है। ऑफलाइन का विकल्प मिलने से विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी। उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह का कहना था कि विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति को पता चल गया होगा कि यहां का छात्र दमन का प्रतिकार करके विजय पाना जानता है। महामंत्री सिद्धार्थ सिंह गोलू का कहना था कि छात्रों की ताकत बांटने वालों को करारा जवाब है। विश्वविद्यालय का छात्र छात्रसंघ के साथ था और यह उसी की जीत है। विवेकानंद पाठक, अखिलेश गुप्ता, अमरेंदू सिंह, मानस शर्मा, अजीत यादव विधायक, जिया कौनैन रिजवी, सूर्य प्रकाश मिश्रा ने भी इसे छात्रों की जीत बताई। एबीवीपी के शैलेंद्र मौर्य, अश्वनी मौर्य, अजीत उपाध्याय आदि ने फैसले का स्वागत किया। छात्र स्वतंत्रता संघर्ष के मोहम्मद सलमान, सीएमपी डिग्री कालेज के प्रशांत कुमार, भूपेंद्र श्रीवास्तव, पूजा मिश्रा, सुमित कुमार, विशाल श्रीवास्तव, प्रखर यादव आदि ने इसे ऐतिहासिक जीत बताया।
ऑफलाइन पर मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सभी पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा में ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने की मांग को लेकर बने चौतरफा दबाव के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने रिपोर्ट भेज दी है। ऑफलाइन के मुद्दे पर कुलपति दफ्तर पर दो मई को आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया था। इसके बाद छात्रसंघ पदाधिकारियों की अगुवाई में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी रहा। बुधवार से उन्होंने अनशन शुरू कर दिया। उनके इस आंदोलन को राजनीतिक दलों का व्यापक समर्थन मिला और नेताओं ने एमएचआरडी मंत्री से भी मुलाकात की। इसके अलावा अनशन पर बैठे छात्रों की तबीयत बिगड़ने लगी। इससे बने दबाव के बाद मंत्रालय ने सोमवार को इस बाबत रिपोर्ट मांगी। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्राें से हुई वार्ता में हुए फैसले के साथ सभी कोर्सेज के लिए पहुंचे आवेदनों तथा अन्य बिंदुओं को ध्यान में रखकर तैयार रिपोर्ट की गई है। शाम को रिपोर्ट मंत्रालय भेज भी दी गई। ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने के मुद्दे पर अब मंत्रालय के पत्र का इंतजार है।
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डबल पीजी के लिए चाहिए 60 फीसदी अंक
शिक्षकों के साथ वार्ता में छात्रसंघ पदाधिकारियों ने सात सूत्रीय मांग पत्र रखा था। इनमें से कई मांगे विश्वविद्यालय प्रशासन ने मान ली है। ऑफलाइन के विकल्प की मांग मंत्रालय के निर्देश पर निर्भर करेगा। दो विषयों में परास्नातक करने के इच्छुक विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ी राहत दी है। 80 फीसदी अंक की बाध्यता घटाकर 60 प्रतिशत कर दी गई है। पिछले दिनों अराजकता के आरोप में 17 विद्यार्थियों को निलंबित कर दिया गया था। छात्र कार्रवाई वापस लेने की मांग कर रहे थे। इस पर शिक्षकों ने लिखित आश्वासन दिया कि इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार होगा। जो लोग उस घटना में शामिल नहीं होंगे उनका निलंबन वापस ले लिया जाएगा लेकिन अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। आंदोलनों के दौरान छात्रों पर लिखाए गए मुकदमे वापस लेने की मांग पर शिक्षकाें का कहना था कि इस बारे में जरूरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। ओएसडी की नियुक्ति की जांच कराने की मांग पर शिक्षकाें का कहना था कि इस बारे में वे कुछ नहीं कर सकते हैं। ओएसडी की नियुक्ति एक प्रक्रिया के अंतर्गत हुई है और उन्हें हटाने के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
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शिक्षकों से लिखित आश्वासन मिलने के बाद शिक्षकों के अलावा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधाकांत ओझा, भाजपा नेता रामरक्षा द्विवेदी आदि ने जूस पिलाकर अनशन तोड़वाया। इसके बाद छात्रों ने अनशन पर बैठे नेताओं को कंधे पर बैठाकर परिसर में घुमाया। इसी दौरान ढोल भी पहुंच गया और वे जमकर झूमे। इस दौरान सभी दलों के वरिष्ठ नेता भी पहुंचे थे और इसे छात्रों जीत बताई। छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह का कहना था कि यह छात्रों की जीत है। ऑफलाइन का विकल्प मिलने से विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी। उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह का कहना था कि विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति को पता चल गया होगा कि यहां का छात्र दमन का प्रतिकार करके विजय पाना जानता है। महामंत्री सिद्धार्थ सिंह गोलू का कहना था कि छात्रों की ताकत बांटने वालों को करारा जवाब है। विश्वविद्यालय का छात्र छात्रसंघ के साथ था और यह उसी की जीत है। विवेकानंद पाठक, अखिलेश गुप्ता, अमरेंदू सिंह, मानस शर्मा, अजीत यादव विधायक, जिया कौनैन रिजवी, सूर्य प्रकाश मिश्रा ने भी इसे छात्रों की जीत बताई। एबीवीपी के शैलेंद्र मौर्य, अश्वनी मौर्य, अजीत उपाध्याय आदि ने फैसले का स्वागत किया। छात्र स्वतंत्रता संघर्ष के मोहम्मद सलमान, सीएमपी डिग्री कालेज के प्रशांत कुमार, भूपेंद्र श्रीवास्तव, पूजा मिश्रा, सुमित कुमार, विशाल श्रीवास्तव, प्रखर यादव आदि ने इसे ऐतिहासिक जीत बताया।
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ऑफलाइन पर मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सभी पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा में ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने की मांग को लेकर बने चौतरफा दबाव के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने रिपोर्ट भेज दी है। ऑफलाइन के मुद्दे पर कुलपति दफ्तर पर दो मई को आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया था। इसके बाद छात्रसंघ पदाधिकारियों की अगुवाई में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी रहा। बुधवार से उन्होंने अनशन शुरू कर दिया। उनके इस आंदोलन को राजनीतिक दलों का व्यापक समर्थन मिला और नेताओं ने एमएचआरडी मंत्री से भी मुलाकात की। इसके अलावा अनशन पर बैठे छात्रों की तबीयत बिगड़ने लगी। इससे बने दबाव के बाद मंत्रालय ने सोमवार को इस बाबत रिपोर्ट मांगी। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्राें से हुई वार्ता में हुए फैसले के साथ सभी कोर्सेज के लिए पहुंचे आवेदनों तथा अन्य बिंदुओं को ध्यान में रखकर तैयार रिपोर्ट की गई है। शाम को रिपोर्ट मंत्रालय भेज भी दी गई। ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने के मुद्दे पर अब मंत्रालय के पत्र का इंतजार है।
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शिक्षकों के साथ वार्ता में छात्रसंघ पदाधिकारियों ने सात सूत्रीय मांग पत्र रखा था। इनमें से कई मांगे विश्वविद्यालय प्रशासन ने मान ली है। ऑफलाइन के विकल्प की मांग मंत्रालय के निर्देश पर निर्भर करेगा। दो विषयों में परास्नातक करने के इच्छुक विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ी राहत दी है। 80 फीसदी अंक की बाध्यता घटाकर 60 प्रतिशत कर दी गई है। पिछले दिनों अराजकता के आरोप में 17 विद्यार्थियों को निलंबित कर दिया गया था। छात्र कार्रवाई वापस लेने की मांग कर रहे थे। इस पर शिक्षकों ने लिखित आश्वासन दिया कि इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार होगा। जो लोग उस घटना में शामिल नहीं होंगे उनका निलंबन वापस ले लिया जाएगा लेकिन अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। आंदोलनों के दौरान छात्रों पर लिखाए गए मुकदमे वापस लेने की मांग पर शिक्षकाें का कहना था कि इस बारे में जरूरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। ओएसडी की नियुक्ति की जांच कराने की मांग पर शिक्षकाें का कहना था कि इस बारे में वे कुछ नहीं कर सकते हैं। ओएसडी की नियुक्ति एक प्रक्रिया के अंतर्गत हुई है और उन्हें हटाने के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।