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Prayagraj News: अतीक ने 14 लाख में लिखाई थी 2.85 करोड़ की जमीन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 04 May 2024 03:40 AM IST
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Atiq had written the land worth Rs 2.85 crore for Rs 14 lakh
अतीक अहमद ने गुंडई के बल पर सिर्फ करेली, धूमनगंज व खुल्दाबाद में ही जमीनें नहीं हथियाई। उसने सिविल लाइंस में बेशकीमती जमीनों को अपनेे नाम कराने में भी खेल किया था। ताजा मामला एमजी मार्ग पर हाईकोर्ट हनुमान मंदिर के पास स्थित बेशकीमती जमीन का है। 2.85 करोड़ की इस जमीन को महज 14 लाख में उसने अपने नाम करा लिया था। वह तब जब उस समय सरकारी मालियत के मुताबिक ही जमीन की कुल कीमत 57 लाख रुपये से ज्यादा थी।
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पिछले दिनों इस जमीन पर हो रहे अवैध निर्माण पर पीडीए की कार्रवाई के बाद गोपनीय ढंग से पुलिस की ओर से शुरू की गई जांच में यह बात सामने आई। सूत्रों के मुताबिक, जमीन से जुड़े दस्तावेजों के हाथ लगने पर माफिया की अपराध से अर्जित संपत्ति के संबंध में बेहद अहम खुलासे हुए। पता चला कि 2006 में इस जमीन पर माफिया की नजर पड़ी। इसके बाद उसने एमजी मार्ग निवासी अब्दुल रब से इस जमीन का सौदा किया।
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अप्रैल 2006 में इस जमीन का बैनामा अतीक ने अपने नाम कराया। बैनामे में जमीन की कुल सरकारी मालियत 57 लाख रुपये दर्शायी गई। नियमानुसार 5.71 लाख की स्टाम्प ड्यूटी भी दी गई। हालांकि, जमीन के लिए विक्रेता को महज 14 लाख रुपये अदा किए गए। सवाल यह उठता है कि जिस जमीन की सरकारी मालियत ही 57 लाख हो, उसका बैनामा 14 लाख रुपये लेकर क्यों किया गया। जबकि, उस वक्त जमीन का बाजारू मूल्य करोड़ों में था। दरअसल, तब सर्किल रेट भले ही 10 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर रहा, लेकिन बाजारू कीमत 50 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर से ज्यादा थी। इस हिसाब से देखा जाए तो तब ही इस जमीन की कीमत 2.85 करोड़ रुपये के आसपास थी। पुलिस का मानना है कि अतीक ने दबंगई के बल पर इस जमीन का सौदा किया। जमीन का बैनामा तब कराया गया जब राजूपाल हत्याकांड के बाद अतीक गैंग का खौफ हर तरफ था।
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2020 में चला था बुलडोजर
अतीक ने इस जमीन पर 25 लाख की लागत से व्यावसायिक भवन का निर्माण भी कराया। 2020 में माफिया के खिलाफ चले अभियान के दौरान प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने जमीन पर हुए निर्माण को अवैध बताते हुए बुलडोजर चलवाकर ध्वस्त कर दिया था। इसके बाद से यह यूं ही पड़ा हुआ था। पिछले दिनों यहां अवैध निर्माण की शिकायत मिलने पर पीडीए ने फिर कार्रवाई की।


2007 में गैंगस्टर में हो चुकी है जब्त
उपरोक्त जमीन 2007 में गैंगस्टर एक्ट में कुर्क हो चुकी है। सरकार बदलने पर इस संबंध में माफिया की ओर से एक प्रार्थनापत्र देकर आपत्ति लगाई गई। जिस पर सक्षम न्यायालय के आदेश पर तत्कालीन डीएम ने आपत्ति का निस्तारण कर दिया। इसके पहले कुर्क किए जाने के बाद तत्कालीन एसडीएम को जमीन का प्रशासन भी नियुक्त किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि सरकारी कब्जे में होने के बावजूद जमीन कब्जाने की नीयत से इस पर पिछले दिनों अवैध निर्माण किया गया। सूत्रों का कहना है कि प्रकरण में एक गोपनीय रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी गई है। यह भी कहा जा रहा है कि मामले में जल्द ही विधिक कार्रवाई भी की जा सकती है।
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