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जेल बदलने के मामले में अतीक को राहत नहीं
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Wed, 05 Apr 2017 12:55 AM IST
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इलाहाबाद
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नैनी जेल से देवरिया जिला कारागार भेजे जाने के मामले में हाईकोर्ट ने पूर्व सांसद अतीक अहमद को राहत देने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि याची के किसी अधिकार का हनन हो रहा है तो वह निचली अदालत में अर्जी देकर राहत की मांग कर सकता है। इस मामले को सात अप्रैल को शुआट्स प्राक्टर रामकिशन सिंह की याचिका के साथ प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
अतीक की याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ सुनवाई कर रही है। अतीक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश त्रिवेदी ने कहा कि अदालत शुआट्स मामले की मॉनिटरिंग कर रही है। ऐसे में याची को दूसरे जिले में भेजना कोर्ट की कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न करेगा। कोर्ट ने इस दलील को नहीं माना। पीठ का कहना था कि लगातार अपराध करने वालों को जमानत देने पर सुप्रीमकोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक अपराध करने के बाद जमानत मिलने पर लोग दूसरा अपराध करते हैं इससे अपराध को बढ़ावा मिल रहा है। यदि आदतन अपराधियों को जमानत देना बंद कर दिया जाए तो कई लोगों की जान बच सकती है।
अतीक के अधिवक्ता कहना था कि कोर्ट की टिप्पणी के कारण जमानतीय अपराध में भी याची की बेल खारिज हो गई। प्रदेश सरकार ने अतीक के पुराने मुकदमों में भी जमानत निरस्त कराने की निचली अदालत में अर्जी दी है।
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अतीक की याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ सुनवाई कर रही है। अतीक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश त्रिवेदी ने कहा कि अदालत शुआट्स मामले की मॉनिटरिंग कर रही है। ऐसे में याची को दूसरे जिले में भेजना कोर्ट की कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न करेगा। कोर्ट ने इस दलील को नहीं माना। पीठ का कहना था कि लगातार अपराध करने वालों को जमानत देने पर सुप्रीमकोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक अपराध करने के बाद जमानत मिलने पर लोग दूसरा अपराध करते हैं इससे अपराध को बढ़ावा मिल रहा है। यदि आदतन अपराधियों को जमानत देना बंद कर दिया जाए तो कई लोगों की जान बच सकती है।
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अतीक के अधिवक्ता कहना था कि कोर्ट की टिप्पणी के कारण जमानतीय अपराध में भी याची की बेल खारिज हो गई। प्रदेश सरकार ने अतीक के पुराने मुकदमों में भी जमानत निरस्त कराने की निचली अदालत में अर्जी दी है।
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