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इंटरव्यू में किया फेल, उठे सवाल
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एएसओ भर्ती परीक्षा को लेकर एक और विवाद आया सामने
यूपीपीएससी की चयन प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। अर्थ एवं संख्या विभाग में सहायक सांख्यिकी अधिकारी के पदों पर भर्ती को लेकर शुरू हुआ विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। अब यह आरोप लगा है कि स्क्रीनिंग परीक्षा में न्यूनतम अर्हता अंक पाकर इंटरव्यू में शामिल हुए अभ्यर्थियों को नियमों के विपरीत जाकर साक्षात्कार में फेल कर दिया गया। इसके अलावा भी कई मामले सामने आए हैं, जिन पर अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए हैं।
सहायक सांख्यिकी अधिकारी भर्ती से संबंधित मामला न्यायालय में भी लंबित है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने न्यायालय में जो शपथपत्र प्रस्तुत किया है, उसके अनुसार सामान्य एवं ओबीसी वर्ग में न्यूनतम 40 फीसदी और एससी एवं एसटी वर्ग में न्यूनतम 35 फीसदी अंक पाने वालों को ही चयनित किया गया है। अभ्यर्थियों ने चयन की इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इंटरव्यू में न्यूनतम अर्हता अंक निर्धारित किए जाने का कोई प्रावधान नहीं है।
अभ्यर्थियों को पूर्व में इसकी कोई सूचना भी नहीं दी गई। अगर किसी अभ्यर्थी ने सभी सवालों के जवाब सही दिए और इंटरव्यू बोर्ड ने उसे कम अंक दिए तो अभ्यर्थी यह बात कैसे साबित करेगा कि उसे योग्यता के अनुसार अंक मिले या नहीं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग ने यह प्रक्रिया सिर्फ मनमाने तरीके से चयन करने के लिए अपनाई है, ताकि किसी को भी पास या फेल किया जा सके। यही वजह है कि आयोग ने सहायक सांख्यिकी अधिकारी के कुल 373 पदों के मुकाबले महज 142 अभ्यर्थियों का अंतिम रूप से चयन किया।
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अभ्यर्थियों का दावा है कि आयोग ने कई स्तर पर स्क्रीनिंग कराई, जो संदेहास्पद एवं अवैधानिक है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग ने इंटरव्यू में न्यूनतम अंक देने के न्यायालय के आदेश की अवहेलना करते हुए योग्य उम्मीदवारों को फेल करके अयोग्य ठहरा दिया। चयनित हुए तमाम अभ्यर्थी और चयन से वंचित हुए अभ्यर्थी समान योग्यता रखते हैं, इसके लिए बावजूद योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों का चयन नहीं किया गया और आधे से अधिक पद खाली छोड़ दिए गए। अभ्यर्थी लक्ष्मी शंकर, शिवेंद्र, अमित, रजनीश, अनिल, बृजेंद्र ने इन तमाम मामलों की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
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यूपीपीएससी की चयन प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। अर्थ एवं संख्या विभाग में सहायक सांख्यिकी अधिकारी के पदों पर भर्ती को लेकर शुरू हुआ विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। अब यह आरोप लगा है कि स्क्रीनिंग परीक्षा में न्यूनतम अर्हता अंक पाकर इंटरव्यू में शामिल हुए अभ्यर्थियों को नियमों के विपरीत जाकर साक्षात्कार में फेल कर दिया गया। इसके अलावा भी कई मामले सामने आए हैं, जिन पर अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए हैं।
सहायक सांख्यिकी अधिकारी भर्ती से संबंधित मामला न्यायालय में भी लंबित है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने न्यायालय में जो शपथपत्र प्रस्तुत किया है, उसके अनुसार सामान्य एवं ओबीसी वर्ग में न्यूनतम 40 फीसदी और एससी एवं एसटी वर्ग में न्यूनतम 35 फीसदी अंक पाने वालों को ही चयनित किया गया है। अभ्यर्थियों ने चयन की इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इंटरव्यू में न्यूनतम अर्हता अंक निर्धारित किए जाने का कोई प्रावधान नहीं है।
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अभ्यर्थियों को पूर्व में इसकी कोई सूचना भी नहीं दी गई। अगर किसी अभ्यर्थी ने सभी सवालों के जवाब सही दिए और इंटरव्यू बोर्ड ने उसे कम अंक दिए तो अभ्यर्थी यह बात कैसे साबित करेगा कि उसे योग्यता के अनुसार अंक मिले या नहीं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग ने यह प्रक्रिया सिर्फ मनमाने तरीके से चयन करने के लिए अपनाई है, ताकि किसी को भी पास या फेल किया जा सके। यही वजह है कि आयोग ने सहायक सांख्यिकी अधिकारी के कुल 373 पदों के मुकाबले महज 142 अभ्यर्थियों का अंतिम रूप से चयन किया।
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अभ्यर्थियों का दावा है कि आयोग ने कई स्तर पर स्क्रीनिंग कराई, जो संदेहास्पद एवं अवैधानिक है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग ने इंटरव्यू में न्यूनतम अंक देने के न्यायालय के आदेश की अवहेलना करते हुए योग्य उम्मीदवारों को फेल करके अयोग्य ठहरा दिया। चयनित हुए तमाम अभ्यर्थी और चयन से वंचित हुए अभ्यर्थी समान योग्यता रखते हैं, इसके लिए बावजूद योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों का चयन नहीं किया गया और आधे से अधिक पद खाली छोड़ दिए गए। अभ्यर्थी लक्ष्मी शंकर, शिवेंद्र, अमित, रजनीश, अनिल, बृजेंद्र ने इन तमाम मामलों की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।