अशोक ध्यानचंद बोले : दद्दा को मिले भारत रत्न मेरी नहीं, करोड़ों खेल प्रेमियों की है मांग
माघ मेला क्षेत्र में एक खेल शिविर का उद्घाटन करने आए अशोक ध्यानचंद ने कहा कि देश में खेल के क्षेत्र में दो सबसे बड़े पुरस्कार उनके पिता के नाम पर ही रखे गए हैं। पीड़ा यह है कि जिनके नाम पर पुरस्कार बांटा जा रहा है, उन्हें ही देश के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से महरूम रखा गया है।
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हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के ओलंपियन बेटे (अर्जुन अवार्डी) अशोक कुमार ध्यानचंद ने कहा कि दद्दा (मेजर ध्यानचंद) को भारत रत्न देने की मांग उनकी नहीं, बल्कि देश के करोड़ों खेल प्रेमियों की है। दद्दा को भारत रत्न क्यों नहीं दिया गया, इसकी कोई एक वजह भी कोई बताने को तैयार नहीं है। अर्जुन अवार्डी सुजीत कुमार ने भी कहा कि दद्दा को भारत रत्न हर हाल में दिया जाना चाहिए।
माघ मेला क्षेत्र में एक खेल शिविर का उद्घाटन करने आए अशोक ध्यानचंद ने कहा कि देश में खेल के क्षेत्र में दो सबसे बड़े पुरस्कार उनके पिता के नाम पर ही रखे गए हैं। पीड़ा यह है कि जिनके नाम पर पुरस्कार बांटा जा रहा है, उन्हें ही देश के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से महरूम रखा गया है।
विश्व विजेता और ओलंपिक पदक विजेता हॉकी टीम के सदस्य रहे अशोक ध्यानचंद ने कहा कि मेजर ध्यानचंद का क्या योगदान रहा है, इससे कोई अनजान नहीं है। ब्रिटिश साम्राज्य के समय उनमें इतनी हिम्मत थी कि वह अपने सूटकेस में तिरंगे को लेकर 1936 के बर्लिन ओलंपिक खेलने गए और फाइनल में जर्मनी को हराकर भारतीय झंडे को लहराया था।
अर्जुन अवार्डी सुजीत कुमार ने कहा कि मेजर ध्यानचंद वह शख्सियत हैं, जिन्हें खेल की समझ नहीं रखने वाला भी जानता है। ध्यानचंद को भारत रत्न मिलना खिलाड़ियों, खेल भावना, खेल प्रेमियों और हॉकी के लोगों का सम्मान होगा। सुजीत कुमार ने कर्नलगंज इंटर कॉलेज और इलाहाबाद विश्वविद्यालय मैदान पर हॉकी खेलने के दिनों को भी याद किया।
प्रयागराज में ध्यानचंद के जन्म के संबंध में सवाल पर अशोक ध्यानचंद ने कहा कि उन्हें नहीं मालूम कि उनके पिता किस मोहल्ले या घर में जन्मे थे, लेकिन प्रयाग की पावन धरती में जन्म लेना गौरव की बात है। अध्यात्म की इस धरती से उनका जुड़ाव ही काफी है। यहां आकर बड़ी प्रसन्नता होती है।
माघ मेला में पहली बार खेलों के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से ''स्पोर्ट्स ए वे ऑफ लाइफ'' संस्था की ओर से शिविर लगाया गया है। मंगलवार को मेला क्षेत्र के हर्षवर्धन मार्ग पर लगे इस शिविर का उद्घाटन हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के बेटे ओलंपियन और अर्जुन अवार्डी अशोक ध्यानचंद ने किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि माघ मेले में खेलों को प्रोत्साहन देने एवं खेल को हर तबके तक पहुंचाकर राष्ट्र धर्म बनाने की पहल सराहनीय है। इससे ग्रामीण स्तर तक खेलों का वातावरण बनेगा।
ओलंपियन सुजीत कुमार ने भी संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे अनूठी पहल बताया। वहीं, संस्था के अध्यक्ष डॉ. कनिष्क ने बताया कि शिविर में खेलों से जुड़ी तमाम चीजों की जानकारी दी जाएगी। खासतौर पर बच्चों को शिविर में खेल से जुड़ी किताबें व एनीमेटेड फिल्में दिखाई जाएंगी। इसमें खेल संस्कृति विकसित करने, खेल में रोजगार, स्पोर्ट्सपर्सन वेलफेयर फोरम, आदर्श खेलगांव, खेल साक्षरता मिशन और स्पोर्ट्स थैरेपी के बारे में भी लोगों को जानकारी दी जाएगी।
डॉ. कनिष्क ने कहा कि खिलाड़ियों को भी शिविर में आकर अपने लिए बनाए गए कानूनों व उनके साथ होने वाली समस्याओं के समाधान के लिए क्या विकल्प हैं, इसकी जानकारी ले सकते हैं। आयोजकों ने बताया कि महाकुंभ-2025 में बड़े पैमाने पर शिविर में कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। शिविर में पहले दिन काफी संख्या में लोग पहुंचे। छत्तीसगढ़ राम नाम कमेटी के दल ने भी शिविर में पहुंचकर इसकी सराहना की। इस अवसर पर बतौर विशिष्ट अतिथि के रूप में ओलंपियन व अर्जुन अवार्डी सुजीत कुमार और संस्था के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. कनिष्क पांडेय भी मौजूद रहे।