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आयोगकर्मियों के नाते-रिश्तेदारों को रेवड़ी की तरह बांटी नौकरी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 03 Feb 2018 01:14 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
प्रारंभिक जांच के दौरान ही भर्ती परीक्षाओं में धांधली से जुड़े कुछ दस्तावेज सीबीआई के हाथ लगे हैं। साथ ही प्रतियोगियों ने भी सीबीआई को धांधली से जुड़े ढेरों साक्ष्य सौंपे हैं। पीसीएस, लोअर सबाऑर्डिनेट, आरओ-एआरओ परीक्षा के बाद सबसे अधिक शिकायत सहायक निजी सचिव (एपीएस) परीक्षा परिणाम को लेकर आई है। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई को कुछ ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जो इस ओर इशारा कर रहे हैं कि उप्र लोक सेवा आयोग के कुछ प्रभावशाली कर्मचारियों के नाते-रिश्तेदारों को रेवड़ी की तरह सरकारी नौकरी बांटी गई है।
सूत्रों के मुताबिक भर्तियों में धांधली को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर भी सीबीआई की एक टीम ने जांच शुरू कर दी है। इस दौरान सीबीआई के हाथ कुछ ऐसे दस्तावेज लगे हैं, जो इशारा कर रहे हैं कि पिछले दिनों जारी एपीएस परीक्षा परिणाम में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। आयोग के कुछ प्रभावशाली कर्मचारियों के नाते-रिश्तेदारों का भी चयन कर लिया गया, जबकि उनसे अधिक योग्य अभ्यर्थियों का चयन नहीं हुआ। सीबीआई ने इस दिशा में जांच भी शुरू कर दी है। आयोग के कंप्यूटरों में फीड भर्ती परीक्षाओं से संबंधित सूचनाओं को भी स्कैन किया जा रहा है, जिसका सीबीआई बाद में विश्लेषण करेगी और इस आधार पर भी भर्तियों में हुई गड़बड़ी का खुलासा सकता है।
सीबीआई के अफसर उन दलालों को तलाश रहे हैं, जो आयोग और प्रतियोगी के बीच लेनदेन का काम कर रहे थे। आयोग में दलाल सक्रिय थे, इस बाबत कुछ प्रतियोगियों ने सीबीआई को साक्ष्य सौंपे हैं। प्रतियोगियों ने सीबीआई को जो साक्ष्य सौंपे हैं, उनके अनुसार भर्तियों में लाखों रुपये का लेनदेन हो रहा था। इसमेें कौन लोग शामिल थे और यह खेल कैसे हो रहा था, यह जानने के लिए सीबीआई की टीम दलालों को तलाश रही है। प्रतियोगियों ने सीबीआई को कुछ दलालों के नाम भी बताए हैं।
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सीबीआई को यह शिकायत भी मिली है कि भर्तियों की आड़ में आयोग के कुछ प्रभावशाली कर्मचारियों और अफसरों ने लाखों, करोड़ों रुपये कमाए। इससे संबंधित कुछ दस्तावेज भी सीबीआई तक पहुंचाए गए हैं। इस आधार पर सीबीआई की टीम संदिग्ध कर्मचारियों के बैंक एकाउंट खंगालने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक सिर्फ बैंक एकाउंट ही नहीं, सीबीआई की टीम कर्मचारियों की संपत्ति को भी खंगालने की तैयारी कर रही है। इसके लिए कर्मचारियों की संपत्ति का ब्योरा भी जुटाया जा रहा है।
समाजवादी छात्रसभा और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रतियोगी छात्रों ने शुक्रवार को सर्किट हाउस में सीबीआई के एसपी राजीव रंजन को ज्ञापन देकर सीबीआई जांच का दायरा बढ़ाने की मांग की। छात्रों ने दो सूत्रीय ज्ञापन देते हुए मांग की कि केवल 2012 से 2017 के बीच हुई भर्तियों की जांच न की जाए, बल्कि वर्ष 1990 के बाद आयोग की ओर से आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं की जांच कराई जाए। साथ ही यह जांच भी की जाए कि मंडल कमीशन की सिफारिशों के अनुरूप आरक्षण लागू किया गया या नहीं। ज्ञापन देने वालों में इविवि छात्रसंघ अध्यक्ष अवनीश यादव, समाजवादी छात्र सभा के जिलाध्यक्ष अखिलेश गुप्ता, छात्र नेता अभिषेक यादव, अदील हमजा, राघवेंद्र यादव, डीपी यादव, अरविंद सरोज, अंकुश यादव, अजीत विधायक, धीरज सोनकर आदि शामिल रहे।
शुरुआती जांच में ही सीबीआई को भनक लग चुकी है कि भर्तियों में धांधली की यह जांच लंबी चलने जा रही है। यही वजह है कि सीबीआई ने शुक्रवार को गोविंदपुर स्थित सिंचाई विभाग के डाक बंगले में अपना कैंप कार्यालय खोल दिया। यह कार्यालय हफ्ते-दस दिन तक नहीं, बल्कि महीनों चलेगा। सिर्फ यही नहीं, सीबीआई ने आयोग में भी एक कमरा अपने कब्जे में ले लिया है और सिंचाई विभाग के एक ऑफिस में भी सीबीआई ने अपना सेटअप लगाया है।
सिंचाई विभाग का पूरा डाक बंगला सीबीआई के हवाले कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक तकरीबन चार माह के लिए डाक बंगला सीबीआई को दिया गया है। जरूरत पड़ने में यह अवधि बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा डाक बंगला परिसर में ही सिंचाई विभाग के एक कार्यालय में सीबीआई ने अपना सेटअप लगा दिया है, जहां सीबीआई के कुछ अफसर नियमित रूप से बैठेंगे और प्रतियोगियों से मिलकर उनसे साक्ष्य लेंगे। प्रतियोगियों को इसी कार्यालय में जाकर साक्ष्य देना होगा, जबकि डाक बंगले में सीबीआई की टीम के अलावा अन्य लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।
सूत्रों का कहना है कि आयोग में भी सीबीआई ने एक कमरा लिया है, ताकि जरूरत पड़ने पर वहां पूछताछ की जा सके। सीबीआई की टीम शुरुआत के तीन दिनों में सिर्फ यही समझती रही कि मामला कितना गंभीर है, लेकिन सीबीआई के पास जिस तरह से शिकायतें पहुंची और प्रतियोगियों ने ढेरों साक्ष्य उपलब्ध करा दिए, उसने जांच शुरू होने से पहले भी मामले को गंभीर बना दिया। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई की टीम सर्किट हाउस में भी कुछ कमरों को अपने पास रखेगी, क्योंकि सिंचाई डाक बंगले के मुकाबले सर्किट हाउस लोक सेवा आयोग से काफी नजदीक है।
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सूत्रों के मुताबिक भर्तियों में धांधली को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर भी सीबीआई की एक टीम ने जांच शुरू कर दी है। इस दौरान सीबीआई के हाथ कुछ ऐसे दस्तावेज लगे हैं, जो इशारा कर रहे हैं कि पिछले दिनों जारी एपीएस परीक्षा परिणाम में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। आयोग के कुछ प्रभावशाली कर्मचारियों के नाते-रिश्तेदारों का भी चयन कर लिया गया, जबकि उनसे अधिक योग्य अभ्यर्थियों का चयन नहीं हुआ। सीबीआई ने इस दिशा में जांच भी शुरू कर दी है। आयोग के कंप्यूटरों में फीड भर्ती परीक्षाओं से संबंधित सूचनाओं को भी स्कैन किया जा रहा है, जिसका सीबीआई बाद में विश्लेषण करेगी और इस आधार पर भी भर्तियों में हुई गड़बड़ी का खुलासा सकता है।
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सीबीआई के अफसर उन दलालों को तलाश रहे हैं, जो आयोग और प्रतियोगी के बीच लेनदेन का काम कर रहे थे। आयोग में दलाल सक्रिय थे, इस बाबत कुछ प्रतियोगियों ने सीबीआई को साक्ष्य सौंपे हैं। प्रतियोगियों ने सीबीआई को जो साक्ष्य सौंपे हैं, उनके अनुसार भर्तियों में लाखों रुपये का लेनदेन हो रहा था। इसमेें कौन लोग शामिल थे और यह खेल कैसे हो रहा था, यह जानने के लिए सीबीआई की टीम दलालों को तलाश रही है। प्रतियोगियों ने सीबीआई को कुछ दलालों के नाम भी बताए हैं।
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सीबीआई को यह शिकायत भी मिली है कि भर्तियों की आड़ में आयोग के कुछ प्रभावशाली कर्मचारियों और अफसरों ने लाखों, करोड़ों रुपये कमाए। इससे संबंधित कुछ दस्तावेज भी सीबीआई तक पहुंचाए गए हैं। इस आधार पर सीबीआई की टीम संदिग्ध कर्मचारियों के बैंक एकाउंट खंगालने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक सिर्फ बैंक एकाउंट ही नहीं, सीबीआई की टीम कर्मचारियों की संपत्ति को भी खंगालने की तैयारी कर रही है। इसके लिए कर्मचारियों की संपत्ति का ब्योरा भी जुटाया जा रहा है।
समाजवादी छात्रसभा और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रतियोगी छात्रों ने शुक्रवार को सर्किट हाउस में सीबीआई के एसपी राजीव रंजन को ज्ञापन देकर सीबीआई जांच का दायरा बढ़ाने की मांग की। छात्रों ने दो सूत्रीय ज्ञापन देते हुए मांग की कि केवल 2012 से 2017 के बीच हुई भर्तियों की जांच न की जाए, बल्कि वर्ष 1990 के बाद आयोग की ओर से आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं की जांच कराई जाए। साथ ही यह जांच भी की जाए कि मंडल कमीशन की सिफारिशों के अनुरूप आरक्षण लागू किया गया या नहीं। ज्ञापन देने वालों में इविवि छात्रसंघ अध्यक्ष अवनीश यादव, समाजवादी छात्र सभा के जिलाध्यक्ष अखिलेश गुप्ता, छात्र नेता अभिषेक यादव, अदील हमजा, राघवेंद्र यादव, डीपी यादव, अरविंद सरोज, अंकुश यादव, अजीत विधायक, धीरज सोनकर आदि शामिल रहे।
शुरुआती जांच में ही सीबीआई को भनक लग चुकी है कि भर्तियों में धांधली की यह जांच लंबी चलने जा रही है। यही वजह है कि सीबीआई ने शुक्रवार को गोविंदपुर स्थित सिंचाई विभाग के डाक बंगले में अपना कैंप कार्यालय खोल दिया। यह कार्यालय हफ्ते-दस दिन तक नहीं, बल्कि महीनों चलेगा। सिर्फ यही नहीं, सीबीआई ने आयोग में भी एक कमरा अपने कब्जे में ले लिया है और सिंचाई विभाग के एक ऑफिस में भी सीबीआई ने अपना सेटअप लगाया है।
सिंचाई विभाग का पूरा डाक बंगला सीबीआई के हवाले कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक तकरीबन चार माह के लिए डाक बंगला सीबीआई को दिया गया है। जरूरत पड़ने में यह अवधि बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा डाक बंगला परिसर में ही सिंचाई विभाग के एक कार्यालय में सीबीआई ने अपना सेटअप लगा दिया है, जहां सीबीआई के कुछ अफसर नियमित रूप से बैठेंगे और प्रतियोगियों से मिलकर उनसे साक्ष्य लेंगे। प्रतियोगियों को इसी कार्यालय में जाकर साक्ष्य देना होगा, जबकि डाक बंगले में सीबीआई की टीम के अलावा अन्य लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।
सूत्रों का कहना है कि आयोग में भी सीबीआई ने एक कमरा लिया है, ताकि जरूरत पड़ने पर वहां पूछताछ की जा सके। सीबीआई की टीम शुरुआत के तीन दिनों में सिर्फ यही समझती रही कि मामला कितना गंभीर है, लेकिन सीबीआई के पास जिस तरह से शिकायतें पहुंची और प्रतियोगियों ने ढेरों साक्ष्य उपलब्ध करा दिए, उसने जांच शुरू होने से पहले भी मामले को गंभीर बना दिया। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई की टीम सर्किट हाउस में भी कुछ कमरों को अपने पास रखेगी, क्योंकि सिंचाई डाक बंगले के मुकाबले सर्किट हाउस लोक सेवा आयोग से काफी नजदीक है।