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स्वाद-शिल्प-संगीत के संगम में डुबकी लगाकर शिल्पी विदा
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प्रयागराज। स्वाद, शिल्प और संगीत के संगम में डुबकी लगाने के साथ मंगलवार को एनसीजेडसीसी में राष्ट्रीय शिल्प मेले की आखिरी निशा यादगार बनी। दिन भर हस्त उत्पादों से स्टालों पर लोगों की भीड़ उमड़ती रही तो सांझ ढलते ही फिल्मी नगमों पर झूमने-थिरकते का सिलसिला हर किसी को मुग्ध कर देने वाला रहा। इस शिल्प मेले में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना को साकार करने की कोशिश की गई।
10 दिवसीय श्पि मेेले की आखिरी शाम पूरब से लेकर पश्चिम एवं उत्तर -दक्षिण तक के राज्यों की लोक संस्कृति के विविध रंगों के मिलन, सुर-ताल के समन्वय के जरिए लोक संस्कृति व शिल्प से नई पीढ़ी का नाता जोड़ने की कोशिश की गई। संगीत संध्या की शुरुआत लोकगीतों से भारतीय सिनेमा के रिश्तों को जोड़ते हुए हुई। मुंबई से आए गौरव बांगिया ने लोक संगीत और सिनेमा जगत के सुनहरे दिनों, पुराने गीतों को पूरी मिठास के साथ प्रस्तुत किया। ‘सा रे गा मा पा’ के विजेता पार्श्व गायक बांगिया व अमृता नाटू ने कई गीत पेश किए। गुलाबी आंखें जो तेरी देखीं/ शराबी ये दिल हो गया...आइए मेहरबां, लग जा गले ... जैसे गीतों पर तालियों की जमकर बौछार हुई। इनके बाद भूपेंद्र शुक्ला ने अनाड़ी फिल्म का गीत ‘किसी की मुस्कराहटों पे हों निसार... तथा लाली-लाली होंठवा... की प्रस्तुति कर वाहवाही बटोरी। एकता केसर ने बाबू जी धीरे चलना... की प्रस्तुति की। इसी तरह यशस्वी गुप्ता ने ‘पान खाएं सैंया हमारो... को सुरों से सजाकर तालियां बटोरी। केंद्र निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर ने चल अकेला चल अकेला... के अलावा मेरे महबूब कयामत होगी...जैसे पुराने गीतों को पेश कर गुजरे जमाने की यादों को ताजा कराया।
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10 दिवसीय श्पि मेेले की आखिरी शाम पूरब से लेकर पश्चिम एवं उत्तर -दक्षिण तक के राज्यों की लोक संस्कृति के विविध रंगों के मिलन, सुर-ताल के समन्वय के जरिए लोक संस्कृति व शिल्प से नई पीढ़ी का नाता जोड़ने की कोशिश की गई। संगीत संध्या की शुरुआत लोकगीतों से भारतीय सिनेमा के रिश्तों को जोड़ते हुए हुई। मुंबई से आए गौरव बांगिया ने लोक संगीत और सिनेमा जगत के सुनहरे दिनों, पुराने गीतों को पूरी मिठास के साथ प्रस्तुत किया। ‘सा रे गा मा पा’ के विजेता पार्श्व गायक बांगिया व अमृता नाटू ने कई गीत पेश किए। गुलाबी आंखें जो तेरी देखीं/ शराबी ये दिल हो गया...आइए मेहरबां, लग जा गले ... जैसे गीतों पर तालियों की जमकर बौछार हुई। इनके बाद भूपेंद्र शुक्ला ने अनाड़ी फिल्म का गीत ‘किसी की मुस्कराहटों पे हों निसार... तथा लाली-लाली होंठवा... की प्रस्तुति कर वाहवाही बटोरी। एकता केसर ने बाबू जी धीरे चलना... की प्रस्तुति की। इसी तरह यशस्वी गुप्ता ने ‘पान खाएं सैंया हमारो... को सुरों से सजाकर तालियां बटोरी। केंद्र निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर ने चल अकेला चल अकेला... के अलावा मेरे महबूब कयामत होगी...जैसे पुराने गीतों को पेश कर गुजरे जमाने की यादों को ताजा कराया।
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