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सूचना प्रौद्योगिकी में कृत्रिम दक्षता आज की आवश्यकता

Fri, 31 May 2019 10:36 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 31 May 2019 10:36 PM IST
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Artificial capability of information technology is today's need.
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भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) में इलेक्ट्रॉनिक्स एडवांस इलेक्ट्रिकल और कम्प्यूटेशनल इंटेलिजेंस विषयक दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी शुक्रवार को शुरू हुई। संगोष्ठी का शुभारंभ मदन मोहन मालवीय तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसएन सिंह और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विवि के कुलपति प्रोे. केएन सिंह ने किया। सम्मेलन के मुख्य वक्ता मदन मोहन मालवीय तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसएन सिंह ने मुख्य  वक्ता के रूप मे न्यूरल नेटवर्क व कृत्रिम दक्षता पर अपना व्यख्यान दिया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम दक्षता आज की आवश्यकता है।

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उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विवि के कुलपति प्रो. केएन सिंह ने सूचना प्रौद्योगिकी को आमजन के जीवन स्तर को सुधारने में एक बड़ा वरदान बताया। उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं के पास तीन गुण जुनून, ईमानदारी और समर्पण होना चाहिए। प्रधानमंत्री का नारा भारतीय प्रतिभा सूचना प्रौद्योगिकी के साथ कल का भारत अब वास्तविकता बन गया है। कुवेम्पु विश्वविद्यालय कर्नाटक के पूर्व कुलपति प्रो. के.चिदानंद गौड़ा ने सूचना प्रौद्योगिकी के उभरते हुए नए आयामों पर अपने विचार व्यक्त किया।
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ट्रिपलआईटी के निदेशक प्रो.पी नागभूषण ने शोध की गुणवत्ता में सुधार पर बल दिया। उन्होंने अफसोस जताया कि युवा रिसर्च सिर्फ  पेपर प्रकाशित करने के लिए कर रहे है। सिर्फ  पीएचडी पूरा करने के लिए उल्लेखित मानदंड को पूरा करने के फेर में मूल शोध विलुप्त हो रहा हैं। उन्होंने कहा कि एक शिक्षाविद को अपने पूरे जीवन में शोध करने की भावना से अलग नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यूजीसी, मानव संसाधन विकास मंत्रालय और अन्य आवश्यक निकायों को अनुसंधान की गुणवत्ता का उचित ध्यान रखना चाहिए। समन्वयक डॉ आशुतोष सिंह ने बताया कि दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान सभी एनआईआईटी और आईआईआईटी सहित एक सौ से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे थे। कुल 250 पेपर प्राप्त हुए थे, जिनमें से 90 को आखिरकार प्रकाशन के लिए चुना गया है।

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