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High Court : आपराधिक मुकदमे के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता शस्त्र लाइसेंस, डीएम का आदेश रद्द

Wed, 12 Mar 2025 04:25 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 12 Mar 2025 04:25 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक मुकदमा लंबित होने के आधार पर किसी का शस्त्र लाइसेंस रद्द नहीं किया जा सकता। यह स्थापित कानून है कि जब तक किसी व्यक्ति को दोषी न ठहराया जाए तब तक उसे निर्दोष माना जाता है।

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Arms license cannot be cancelled on the basis of criminal case, DM's order cancelled
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक मुकदमा लंबित होने के आधार पर किसी का शस्त्र लाइसेंस रद्द नहीं किया जा सकता। यह स्थापित कानून है कि जब तक किसी व्यक्ति को दोषी न ठहराया जाए तब तक उसे निर्दोष माना जाता है। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने बदायूं डीएम के शस्त्र लाइसेंस रद्द करने के आदेश को खारिज कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान की पीठ ने सत्यवीर की याचिका पर दिया।

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बदायूं निवासी याची का शस्त्र लाइसेंस डीएम ने आपराधिक मुकदमा लंबित रहने के आधार पर रद्द कर दिया था। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अधिवक्ता ने दलील दी कि याची पर दर्ज किए गए मुकदमे शारीरिक हमले से संबंधित हैं। इसमें ऐसा कोई आरोप नहीं है कि याची ने कथित घटना में शस्त्र का प्रयोग किया है। याची पर दर्ज मुकदमे अभी लंबित हैं। ऐसे में दर्ज मुकदमे के आधार पर शस्त्र लाइसेंस रद्द नहीं किया जा सकता है।
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यह भी साबित नहीं होता कि याची से सार्वजनिक शांति और सौहार्द को खतरा है। वहीं स्थायी अधिवक्ता ने विरोध किया। हालांकि वे इस तथ्य का प्रतिवाद नहीं कर सके कि समान मामले में इससे पूर्व याची के एक अन्य शस्त्र लाइसेंस को हाईकोर्ट ने बहाल कर दिया था। इसे कहीं चुनौती नहीं दी गई।
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न्यायालय ने कहा कि डीएम के सात दिसंबर 2012 के आदेश में ऐसा कुछ भी प्रदर्शित नहीं किया गया है जिससे यह पता चल सके कि याची शांति व सौहार्द के लिए खतरा है। न ही यह प्रदर्शित किया गया कि याची ने किसी भी तरह से अपने शस्त्र का दुरुपयोग किया है। सिर्फ एसपी की रिपोर्ट में आपराधिक मामले का हवाला दिया गया है। ऐसे में कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए डीएम के आदेश को रद्द कर दिया।

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